विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'द वन' का छठी मैया गाना तो सुन लिया, अब सुनिए छठ पूजा के पारंपरिक लोकगीत; हर शब्द में छिपी है बिहार की संस्कृति

Published: Thu, 10 Sep 2026 04:00 PM (IST)Updated: Sun, 13 Sep 2026 03:44 PM (IST)

छठ पूजा में बिहार की असली संस्कृति बसती है। छठी मैया और सूर्य देव के लिए गाए जाने वाले इस महापर्व के लोकगीत सुनने में काफी मजेदार होते हैं।

छठ पूजा के गीतों में छलकती है छठी मैया के लिए भक्ति (AI Generated Image)

छठ पूजा के गीतों में छलकती है छठी मैया के लिए भक्ति (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार की आत्मा छठ पूजा में बसती है। ये महापर्व बिहार की संस्कृति का अटूट हिस्सा है। हाल ही में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म द वन का छठी मैया गाना रिलीज हुआ है। छठ पूजा का ये गाना लोगों को काफी पसंद आया, लेकिन क्या आपने छठ पूजा के पारंपरिक गीत सुने हैं?

छठ पूजा के ये लोकगीत पीढ़ियों से गाए जा रहे हैं और छठ पूजा की असली झलक इन्हीं गीतों में देखने को मिलती है। छठी मैया और सूर्य देव को समर्पित इन गीतों की बोली और धुन ऐसे होते हैं कि एक बार सुनकर आपका दिल ही नहीं भरेगा। आपका मन बार-बार इन गीतों को सुनने का करेगा। आइए जानें छठ पूजा के पारंपरिक लोकगीत कैसे होते हैं।  
 

पहिले पहिल छठी मैया

छठ पूजा के गीतों की बात करें, तो शारदा सिन्हा के गाए गीत सबसे पहले दिमाग में आते हैं। ये गीत व्रत करने वाली महिला के दिल की आशा, 48 घंटों की भूख-प्यास, सर्दी में ठंडे पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने के इंतजार और छठी मैया के लिए असीम श्रद्धा को बयां करते हैं। शारदा सिन्हा का गीत ‘पहिले पहिले हम कईनी छठी मैया बरत तोहार’ इस भावना को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। इस गीत में व्रती कहती है कि छठी मैया मैं पहली बार आपका व्रत कर रही हूं, आप मेरी मदद करना। 

केलवा के पात पर 

शारदा सिन्हा का ही गाया ये गीत छठ पूजा के सबसे मशहूर गीतों में से एक है। ‘केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके झूंके’ इस गीत के बोल हैं, जिसमें अर्घ्य देने के लिए खड़ी व्रती के इंतजार को बयां किया गया है और साथ ही, ये भी बताया गया है कि वो इतना कठिन व्रत किसके लिए कर रही है। इस गीत के जरिए व्रती बताती है कि वो अपने पति, बच्चों, भाई और घर के सदस्यों के लिए छठ पूजा करती है। 

कांच ही बांस के बंहगिया

छठ पूजा में घाट पर बांस की टोकरी और सूप में फल और प्रसाद का बाकी सामान लेकर जाया जाता है। इसे बहंगी कहते हैं, जिसे घर के पुरुष अपने सिर पर रखकर लेकर जाते हैं। ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ गीत में इसी परंपरा को बयां किया गया है। इसमें व्रती अपने पति से बहंगी घाट लेकर चलने के लिए कह रही है और रास्ते में मिलने वाले बटोही को बताती है कि ये बहंगी वो छठी मैया के लिए लेकर जा रही है। 

मारबो रे सुगवा धनुख से

इस गीत में छठ पूजा के प्रसाद के महत्व के बारे में बताया गया है। इस गीत में व्रती कहती है कि जो फल उसने सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए रखे थे, उसे एक तोते ने झूठा कर दिया है। इसी पर गुस्सा होकर वो तोते को तीर से मारती है और वो घायल होकर गिर जाता है। इस पर सुगनी यानी मादा तोता वियोग में रोने लगती है, तो व्रती छठी मैया से उस सुगनी की मदद करने का आग्रह करती है। 

चाननी ताने चलले गौरा देई

देवी का गाया ये गाना छठ पूजा के दौरान घाटों पर खूब बजता है। इस गाने में छठ पूजा के दौरान चननी बांधने और अर्घ्य देने की परंपरा के बारे में बताया गया है। छठ पूजा में गन्नों को जोड़कर खड़ा किया जाता है और उसके नीचे छठ मैया के लिए मिट्टी के हाथियों पर प्रसाद रखा जाता है और दीया जलाया जाता है। इसे कोसी भरना कहा जाता है। इस गीत में इस परंपरा को भी बयां किया गया है। साथ ही, अर्घ्य देने के बारे में भी बताया गया है। इसके बोल हैं ‘चननी ताने चलले महादेव, घूँटी भर धोती भींजे’।

उगी हे दीनानाथ

इस गीत में सूर्य देव के उगने का इंतजार करती व्रती की पीड़ा को दिखाया गया है। कार्तिक महीने की सुबह ठंडे पानी में खड़ी व्रत अर्घ्य लेकर सूरज देव के उगने का इंतजार कर रही है, लेकिन सूर्य देवता उग नहीं रहे हैं। इसी भावना को ये गीत बयां करता है। इसके बोल हैं ‘कल्पेली भीजल तिवईया हो, उगी हे दीनानाथ’। 

इन गीतों के अलावा छठ पूजा के और भी कई गीत हैं, जिन्हें सुनकर आपका दिल उमंग और भक्ति से भर जाएगा। 


देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।