कभी सोचा है भगवान को किसने दिया चेहरा और आकार? पढ़ें घर-घर इनकी तस्वीर पहुंचने की 150 साल पुरानी कहानी
भगवान को इंसानी चेहरा देकर हम सभी के बीच लोकप्रिय करने का श्रेय राजा रवि वर्मा को जाता है।

राजा रवि वर्मा : मशहूर पेंटर और आर्टिस्ट (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कभी सोचा है कि जब देवी-देवताओं की मूर्तियां या छवि नहीं होती तो हम ईश्वर की कल्पना कैसे करते? कैसे उनकी तस्वीर के बगैर यह पता लगा पाते कि हम कौन से देवी-देवताओं की बात कर रहे हैं?
जब चित्रकला नहीं थी तब यह सोच पाना बेहद मुश्किल था लेकिन एक शख्स ने इस काम को बेहद आसान बना दिया। आज हम ऐसे ही एक शख्स की बात करेंगे जिसने भगवान को इंसानी चेहरा दिया और वो नाम है राजा रवि वर्मा।
राजा रवि वर्मा : मशहूर पेंटर और आर्टिस्ट
यह बात बहुत कम लोगों को पता है कि राजा रवि वर्मा वो पहले चित्रकार हैं जिन्होंने हिन्दू भगवान और देवी-देवताओं की पेंटिंग बनाई। भारत में चित्रकला को ऊंचाइयों तक ले जाने का श्रेय राजा रवि वर्मा को ही दिया जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने महज 5 साल की उम्र में पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया था। सबसे पहले उन्होंने घर की दीवारों पर चॉक की मदद से पेंटिंग करना शुरू किया था।
यूरोपियन तकनीक से सीखी पेंटिंग
रवि वर्मा का हुनर देखते हुए उनके चाचा तिरुवनंतपुरम महल ले गए थे। यहां से उन्होंने न सिर्फ चित्रकला की तकनीक सीखी, बल्कि रंगों की बारीकियों को भी बेहतर ढंग से जाना। इसके बाद उन्होंने वॉटर कलर पेटिंग रामा की ट्रेनिंग स्वामी नायडू से और ऑयल पेंटिंग डच आर्टिस्ट थिओडोर जेंसन से ली। फिर सबसे पहले यूरोपियन स्टाइल में ऑयल पेंट का इस्तेमाल कर पौराणिक पात्रों को इंसानी चेहरा दिया।
कैसे शुरू किया भगवान की पेंटिंग बनाना?
राजा रवि वर्मा ने यूरोपियन शैली में विक्टोरियन पेंटिंग्स की थीम पर पौराणिक कथाओं के पात्रों, भगवान और देवी-देवताओं की पेंटिंग बनाना शुरू किया था। इस बात में कोई शक नहीं कि राजा रवि वर्मा की कल्पना शक्ति इतनी तीव्र थी कि यही हुनर उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बना।
दीवान के सुझाव के बाद ऐसे बनाई थी अपनी प्रेस
रवि वर्मा के बनाए चित्रों की लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी, इसे देखते हुए त्रावणकोर के दीवान सर माधव राव ने उन्हें चित्रों को प्रिन्ट करवाने का सुझाव दिया। पहले पहल तो इन चित्रों की लिथोग्राफी कराने के लिए यूरोप में खासतौर से जर्मनी भेजा जाता था, लेकिन बाद में रवि वर्मा ने साल 1894 में अपनी खुद की राजा रवि वर्मा नाम की प्रिंटिंग प्रेस बनाई।
इस प्रेस में उन्होंने सबसे पहले पौराणिक कथाओं में शकुंतला के जन्म को दर्शाते हुए क्रोमोलिथोग्राफ जारी किया। इसके बाद साल 1894 में माता लक्ष्मी और माता सरस्वती के चित्र क्रोमोलिथोग्राफ के जरिए जारी किए गए। फिर भगवान विष्णु, यशोदा मां के साथ श्री कृष्ण की पेंटिंग्स भी बनाई गईं।
आज बाजारों में मिलने वाली मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, यशोदा मैया के साथ कृष्ण जैसी ज्यादातर पेंटिंग राजा रवि वर्मा की चित्रकला की ही देन है या यूं कहें कि उन्हीं की कल्पना के कॉपी कर आज तस्वीरें बनाई जा रही हैं।
