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क्यों हमेशा 99, 199 या 999 रुपये ही रखे जाते हैं प्रोडक्ट्स के दाम? समझिए इसके पीछे की खतरनाक साइकोलॉजी

Published: Fri, 31 Jul 2026 12:30 PM (IST)

बाजार में कम कीमत पर मिलने वाले सामान को हम डिस्काउंट समझकर खरीद लेते हैं, जबकि इसके पीछे पूरी स्ट्रेटजी काम करती है।

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम जब भी बाजार में या ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं तो चीजों के दाम हमेशा 1 रुपये कम होते हैं। आजकल तो इसपर मीम्स तक बनाए जाने लगे हैं, पर कभी सोचा है कि आखिर क्यों सिर्फ 1 रुपया कम करके दाम रखा जाता है? इसके पीछे का लॉजिक क्या है? अगर नहीं तो चलिए इसके बारे में जानते हैं। 

ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट्स की कीमत 99, 199 या 999 रुपये ही क्यों रखते हैं?

हम इसे हंसी में लेते हैं पर आपको जानकार हैरानी होगी कि इसके पीछे गहरी साइकोलॉजी और मार्केटिंग का बहुत बड़ा खेल छिपा हुआ है, जिसे आम उपभोक्ता समझ ही नहीं पाते। खरीदार इसके पीछे ये मुख्य वजहें हैं: 

साइकोलॉजिकल कारण 

बिजनेस करने वाले एक गहरी साइकोलॉजी को फॉलो करते हैं, जिसके मुताबिक भले ही कीमत 1 रुपये कम हो, लेकिन वह देखने में 1000 या 2000 जैसी चार संख्या वाले नंबर से कम ही लगती है। इसे उदाहरण से समझें तो 999 ग्राहक को 900 के करीब और 1000 से दूर लगता है जबकि असलियत इसके एकदम उलट है। ग्राहक को ऐसा लगता है कि वह कोई भी चीज चार डिजिट से कम में ही खरीद रहा है, यह ट्रिक उसे बचत वाली संतुष्टि और मानसिक शांति दोनों देती है। 

सेल या सस्ते होने का भ्रम 

दुकानों पर लगे बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर के साथ वेबसाइट पर भारी डिस्काउंट वाली सेल का फ्लैश ग्राहक को चीज खरीदने पर मजबूर कर देता है। खासकर, अगर उसमें 4 डिजिट को 3 में दिखाया गया हो, जैसे- 1500 की चीज 999 में। इसके अलावा, 20% या 50% भी लोगों को लुभाते हैं। 

लेफ्ट डिजिट इफेक्ट थ्योरी

क्या आपने लेफ्ट डिजिट इफेक्ट थ्योरी का नाम सुना है? अगर नहीं तो यह भी मार्केटिंग का हिस्सा है। दरअसल, इसके पीछे एक थ्योरी भी काम करती है, जो कहती है लोग हमेशा चीजों को दाईं से बाईं तरफ पढ़ते हैं। इसके चलते पहला अंक दिमाग में ज्यादा याद रहता है। 

दुकानदार को फायदा 

कई बार ग्राहक सामान खरीदते समय बाकी बचे 1 या 2 रुपये वापिस नहीं लेता। कई बार तो लोग हिचकिचाहट में चेंज वापिस नहीं मांगते, इस तरह यह ट्रिक दुकानदार को फायदा पहुंचाती है। फिर ये कंपनियां 99, 999 जैसे प्राइस टैग क्यों न रखें? मुनाफा छोटा ही सही पर फायदेमंद तो है।