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"पालकी का दरवाजा खोलो बाबू..." थकी दुल्हन और संकोच में पड़ा दूल्हा! दिलचस्प है बिहार का ये ठेठ भोजपुरी लोकगीत

Published: Thu, 15 Oct 2026 03:32 PM (GMT+05:30)

बिहार में नई दुल्हन के स्वागत के समय ये खास लोकगीत गाया है, जिसमें दूल्हे की अम्मा सिंहोरा लेकर दुल्हन का इंतजार करती है।

नई दुल्हन के स्वागत में गाया जाता है ये लोकगीत (AI Generated Image)

नई दुल्हन के स्वागत में गाया जाता है ये लोकगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में शादी की हर रस्म के लिए आपको खास लोकगीत मिल जाएंगे। ऐसे ही जब दुल्हन शादी के बाद पहली बार अपने ससुराल आती है, तो उसके स्वागत में भी महिलाएं गीत गाती हैं। दुल्हन के स्वागत का ही एक लोकगीत है सोने के सिंहोरवा ले ले अम्मा बाड़ी खाड़ हो।

नई बहू के स्वागत के शुभ अवसर पर घर और आस-पड़ोस की महिलाएं ये गीत गाती हैं। ये गीत दुल्हन के स्वागत के लिए ससुरालवालों की उत्सुकता और प्रेम को जाहिर करता है। आइए जानें इस लोकगीत में क्या कहा जा रहा है। 

क्या कहता है ये गीत?

आज भले ही नई दुल्हन गाड़ियों में बैठकर ससुराल आती हैं, लेकिन पुराने जमाने में डोली या पालकी में दुल्हन विदा होती थी और उसी में बैठकर ससुराल आती थी। इस गीत में इसी दृश्य को दिखाया गया है। इस गीत की शुरुआत में दूल्हे से कहा जाता है कि हाथ में सोने का सिंहोरा लेकर अम्मा खड़ी हैं, पालकी का दरवाजा खोलो बाबू, ताकि नई बहू की मांग में सिंदूर भरकर उसे आशीर्वाद दें। 

इसके जवाब में गीत में आगे दूल्हे की तरफ से कहा जाता है कि अम्मा मैं दरवाजा कैसे खोलूं? थकावट के कारण तुम्हारी बहू नींद के कारण अलसाई हुई है। इसके आगे अम्मा कहती हैं कि वो बहू को पानी की छींट मारकर उसे उठाओ, कहीं ये मंगल घड़ी बीत न जाए वरना रस्म अधूरी रह जाएगी।  

अम्मा के बाद भाभी की बारी

गीत में आगे अम्मा के बाद अब भाभी सिंहोरा लेकर खड़ी हैं और दूल्हे से पालकी का दरवाजा खोलने के लिए कहती है, ताकि दुल्हन की मांग में सिंदूर भरकर स्वागत कर सके। इसके जवाब में दूल्हा कहता है कि भाभी मैं दरवाजा कैसे खोलूं? तुम्हारी देवरानी गहरी नींद में सो रही है। तो भाभी कहती है कि मैं प्यार से डुलाकर उसे जगा देती हूं, ताकि रस्म की मंगल घड़ी बीत न जाए। 

संवाद शैली में गाया गया गीत

इस लोकगीत की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे संवाद की शैली में गाया गया है। दूल्हे की मां और भाभी दुल्हन का स्वागत करने की आतुरता को बयां करते हैं और दूल्हा अपनी नई नवेली दुल्हन की नींद से जगाने में अपने संकोच को बताता है। 

ये गीत ठेठ भोजपुरी भाषा में गाया जाता है, जिससे सुनकर बिहार की शादियों की एक बहुत खूबसूरत तस्वीर सामने आती है और लोग इस गीत से काफी कनेक्ट भी कर पाते हैं।