Bhakhra Sindoor: क्या है बिहार की भखरा सिन्दूर की रस्म? जानिए इसका महत्व
बिहार के मिथिलांचल में विवाह संस्कार के दौरान 'भखरा सिन्दूर' (Bhakhra Sindoor) की रस्म निभाई जाती है, जो नवविवाहित जोड़े के लिए सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक है। यह एक अनोखा विधान है जिसमें नारंगी और गुलाबी सिन्दूर का उपयोग होता है। यह बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

Bhakhra Sindoor: भखरा सिन्दूर की रस्म का महत्व।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के मिथिलांचल और कई अन्य क्षेत्रों में विवाह संस्कार के दौरान निभाई जाने वाली 'भखरा सिन्दूर' की रस्म न केवल एक पारंपरिक विधान है, बल्कि यह नवविवाहित जोड़े के जीवन में सौभाग्य, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक भी है। यह रस्म बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दिखाती है, जिसे सदियों से निभाया जा रहा है। आइए इस आर्टिकल में भखरा सिन्दूर (Bhakhra Sindoor) की रस्म के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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क्या है भखरा सिन्दूर?
भखरा सिन्दूर बिहार (Bhakhra Sindoor Tradition) खासकर मिथिलांचल में विवाह की एक महत्वपूर्ण रस्म है। यह सिर्फ सिन्दूर का एक प्रकार नहीं है, बल्कि एक अनोखा विधान है, जो सिन्दूरदान की प्रक्रिया को और भी खास बना देता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सिंदूरदान के लिए नारंगी और गुलाबी रंग के सिंदूर का उपयोग किया जाता है। इसे भखरा सिन्दूर कहा जाता है। यहां महिलाएं सभी शुभ अवसरों पर भखरा सिंदूर का इस्तेमाल करती हैं।
- नारंगी/पीला सिन्दूर - इस सिन्दूर का उपयोग लंबे से किया जा रहा है। इसे सौभाग्य, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- गुलाबी सिन्दूर - यह सिन्दूर प्यार और उत्सव का प्रतीक है, जो वैवाहिक जीवन की मिठास को दिखाता है। दोनों रंगों का उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि वधू के जीवन में शुभता, सौभाग्य और प्रेम की कभी कमी न हो।
भखरा का मतलब
सिन्दूर के रंग के साथ-साथ, भखरा शब्द का मतलब इस रस्म के पात्र से भी जुड़ा हुआ है। इस रस्म में वर एक ऐसे पात्र से सिन्दूर लेता है, जिसमें बीच में एक छिद्र होता है। वर, इस पात्र के जरिए सिन्दूर को वधू की मांग में भरता है।
भखरा सिन्दूर रस्म का धार्मिक (Bhakhra Sindoor Significance In Bihar)
भखरा सिन्दूर की रस्म को बेहद पवित्र माना जाता है, जिसके पीछे कई धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं हैं आइए जानते हैं -
- सौभाग्य और स्थिरता - यह रस्म अखंड सौभाग्य और स्थिर दाम्पत्य जीवन का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि छिद्र के माध्यम से सिन्दूर लगाने पर यह तय होता है कि वर-वधू का रिश्ता किसी भी बाहरी नकारात्मकता या बुरी नजर से प्रभावित न हो।
- आशीर्वाद - सिन्दूर को मां लक्ष्मी और देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। इस खास विधि से सिन्दूर लगाने से ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे घर में धन-धान्य और खुशियों की कमी नहीं होती है।
- पवित्रता - यह भी माना जाता है कि सिन्दूर को इस तरह से भरने पर यह वर-वधू के वैवाहिक बंधन की पवित्रता और गोपनीयता को बनाए रखता है।
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