बिहार की शादियों में जरूर गाया जाता है ये लोकगीत, हल्दी चुमावन की रस्म से है नाता; सुनकर झूम उठती हैं महिलाएं
बिहार की शादियों में हल्दी की रस्म में आगे माई हरदी हरदिया... जरूर गाया जाता है। ये गीत मायके के प्यार और आशीर्वाद को बयां करता है।

इस गीत के बिना अधूरी हैं बिहार की शादियां (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार में शादी के लिए कई खूबसूरत लोकगीत गाए जाते हैं, जो विवाह की अलग-अलह रस्मों को बयां करते हैं। इन्हीं में हल्दी चुमावन की रस्म भी होती है, जिसमें दुल्हन को आशीर्वाद दिया जाता है और हल्दी लगाई जाती है। इस रस्म में शारदा सिन्हा की आवाज में गूंजता आगे माई हरदी हरदिया… जरूर बजता है।
ये लोकगीत सालों से गाया जा रहा है और हल्दी की रस्म को बहुत ही मजेदार धुन और भावुक कर देने वाले बोलों से यादगार बना देता है। आइए जानें क्या कहा गया है इस लोकगीत में।
हल्दी लगाकर मंगल कामना
इस गीत के बोल शुरू हैं आगे माई हरदी हरदिया दुहु पातर ना…। इसका मतलब है कि हल्दी को पीसकर उसका पतला उबटन बनाना, जिसे दुल्हन के हाथ-पैर और चेहरे पर लगाया जाएगा। हल्दी को शुभ माना जाता है। इसलिए इसे दुल्हन के शरीर पर लगाया जाता है, ताकि उसका वैवाहिक जीवन मंगलमय हो और हल्दी उसका रूप-रंग निखारे।
परिवार के पुरुषों को किया जाता है याद
इस गीत में महिलाएं दुल्हन के परिवार के पुरुषों को याद करती हैं और कहती हैं कि वो आएं और दुल्हन को हल्दी लगाएं। गीत की शुरुआत बाबा यानी दादा से होती है। महिला पूछती है आगे माई कौने बाबा हरदी चढ़ावेला ना… यानी बेटी को कौन से बाबा हल्दी चढ़ा रहे हैं। इसके जवाब में आगे गाया जाता है आगे माई बाबा से बाबा अपन बाबा ने, आगे माई ऊहे बाबा हरदी चढ़ावेला ना…। दुल्हन कहती है कि मेरे अपने बाबा हल्दी लगा रहे हैं।
पिता और चाचा का स्नेह
इस गीत की आगे की पंक्तियों में पापा और चाचा को याद किया जाता है। महिलाएं कहती हैं कि कौन पापा हल्दी लगा रहे हैं, तो दुल्हन बताती है कि उसके खुद के पापा उसे हल्दी लगाकर आशीर्वाद दे रहे हैं। इसके बाद महिलाएं पूछती हैं कि कौन-से चाचा हल्दी लगा रहे हैं, तो महिलाएं कहती हैं कि मेरे अपने चाचा हल्दी लगा रहे हैं।
मामा का प्यार और भाई का दुलार
बिहार की शादियों में ननिहाल वाले भी खास भूमिका निभाते हैं। इसमें महिलाएं आगे पूछती हैं कि आगे माई कौने मामा हरदी चढ़ावेला ना यानी कौन से मामा हल्दी लगा रहे हैं, तो दुल्हन कहती है आगे माई मामा से मामा अपन मामा ना, आगे माई ऊहे मामा हरदी चढ़ावेला ना…। यानी मेरे अपने सगे मामा हल्दी लगा रहे हैं।
मामा के बाद भाई की बात आती है। महिलाएं पूछती हैं ये कौन-सा भाई हल्दी लगा रहा है, तो दुल्हन कहती है कि मेरा अपना भाई हल्दी लगा रहा है।
बिहार की संस्कृति की झलक
इस गीत में बिहार की संस्कृति की बहुत खूबसूरत झलक देखने को मिलती है। शादी-ब्याह के मौके पर पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है और बेटी को आशीर्वाद देता है। साथ ही, इसमें मायके के रिश्तों की मिठास को दिखाया गया है, जो शादी के मौके पर बहुत भावुक करने वाला होता है।
