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एक-दो नहीं, तीन बार करनी पड़ती है लड़की को शादी, इस समुदाय में दुल्हन बनने की ये रस्म है बड़ी अनोखी

Published: Tue, 27 Oct 2026 01:43 PM (IST)

नेपाल के नेवारी समुदाय में लड़कियों की तीन बार शादी करने की एक अनोखी परंपरा है, जो उनकी संस्कृति का अभिन्न अंग है।

नेवारी समुदाय में लड़की की तीन शादियों की रस्म (Image Source: AI Generated)

नेवारी समुदाय में लड़की की तीन शादियों की रस्म (Image Source: AI Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी भी लड़की के जीवन में शादी एक बड़ा मोड़ होता है, जिसके बाद उसकी पूरी दुनिया ही बदल जाती है। पर क्या हो अगर हम कहें कि एक समाज ऐसा भी है, जहां किसी भी लड़की की एक बार नहीं, तीन बार शादी होती है। बात सुनने में जितनी अटपटी है, उतनी ही दिलचस्प भी; आइए आपको नेपाल में अपनाई जाने वाली इस अनोखी परंपरा के बारे में बताते हैं। 

नेपाल में लड़की की तीन शादियों का रिवाज 

भारत और नेपाल में शादियों की बहुत सी रस्में मिलती-जुलती हो सकती हैं, लेकिन यहां नेवारी नामक समुदाय में लड़की की शादी से जुड़े अलग रीति-रिवाज हैं। दरअसल, इस समुदाय में लड़कियों को एक बार नहीं, तीन बार शादी करने का मौका मिलता है। ये तीन शादियां समाज की खास परंपरा और लड़की की अहमियत को दिखाती हैं। 

पहली शादी बेल विवाह 

बेल विवाह लड़की की किशोरावस्था से पहले किया जाता है, जब उसकी उम्र 5-9 साल के बीच होती है। काठमांडू घाटी में रहने वाले नेवारी समुदाय में यह एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रस्म है, जिसमें लड़की की शादी बेल के फल यानी वुड एप्पल से करा दी जाती है। नेपाल में इस रस्म को ईही कहा जाता है। 

भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाने वाला यह फल कभी खराब नहीं होता, ऐसे में मान्यता है कि लड़की का सुहाग अमर रहेगा। अब क्योंकि लड़की की शादी पहले भगवान से हुई है, उसे कभी भी विधवा नहीं माना जाता; फिर चाहे उसके होने वाले पति की भविष्य में मृत्य हो जाते। 

दूसरी शादी सूर्य विवाह

भगवान विष्णु से शादी के बाद लड़की के दूसरी शादी सूर्य देवता से की जाती है। दूसरी शादी की यह रस्म लड़के के पीरियड्स आने के बाद होती है, जिसे ‘बारे तयेगु’ कहते हैं। उसे 12 दिनों तक किसी अंधेरी गुफा या कमरे में रखा जाता है और इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि सूरज की किरणें या किसी भी पुरुष की नजर उसपर न पड़ने पाए।

इस दौरान उसके साथ घर की कोई महिला रहती है, फिर 12 दिन बाद पवित्र स्नान कराने के बाद लड़की का विवाह सूर्य देव से कर दिया जाता है। 

तीसरी वास्तविक शादी 

इन दोनों रस्मों के बाद जब लड़की की उम्र शादी लायक हो जाती है, तब कोई योग्य वर ढूंढकर उसका असली विवाह कराया जाता है। इस रस्म की सबसे खास बात है कि इसमें किसी भी महिला को शादी के बाद विधवा नहीं माना जाता। 

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