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कौन है जहाज बाई जिससे जुड़ी है राजस्थान की नई-नवेली दुल्हनों की खुशी? मारवाड़ के इस गीत की कहानी है दिलचस्प

Published: Mon, 26 Oct 2026 08:00 PM (IST)

यह गीत नई-नवेली दुल्हनों की पीहर जाने की तड़प और रेगिस्तानी इलाकों में पानी की किल्लत से ऊंट के जुड़ाव को दर्शाता है।

राजस्थान की मारवाड़ी परंपरा में लोकप्रिय लोकगीत ‘जहाज बाई’ (Image Source: AI Generated)

राजस्थान की मारवाड़ी परंपरा में लोकप्रिय लोकगीत ‘जहाज बाई’ (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर बीते कुछ समय से कई पीढ़ियों पुराने लोकगीत अचानक से वायरल होने लगे हैं। अब इसकी वजह कुछ भी हो सकती है, फ्यूजन म्यूजिक भी और लोगों का अपनी जड़ों की ओर झुकाव भी। इससे पहले हमने राजस्थान के मशहूर लोकगीत ‘कांच केरी चिमनी की’ बात की थी और आज हम बात करेंगे एक और लोकप्रिय लोकगीत ‘जहाज बाई’ की। 

क्या है लोकगीत में ‘जहाज बाई’ का मतलब? 

राजस्थान की मारवाड़ी परंपरा में जहाज बाई गीत शादी-ब्याह के मौकों पर गाया जाता है। जिसे सुनकर आपको जरूर लगा होगा कि इसमें जहाज बाई किसी महिला को कहा जा रहा है, जबकि इसके बोल गहरा अर्थ लिए हुए हैं। 

यहां जहाज बाई का मतलब किसी महिला या पानी में चलने वाले जहाज से नहीं है, बल्कि ‘रेगिस्तान के जहाज’ ऊंट से है। पहले के समय में जब रेत के टीलों की बीच पक्की सड़कें नहीं हुआ करती थीं, तब लोग इसी ऊंट पर बैठकर लंबा-लंबा सफर तय किया करते थे। 

नई नवेली दुल्हन की पीहर जाने की तड़प 

इस गीत में जब नायिका कहती है कि ‘मरुधर धरती रो उचड़ो या भली,आ तो अलिया में उड़े गरी जहाज…ओ जी म्हाने जहाज बाई ने जोवण दे…। तो वह ऊंट की तुलना उड़ने वाले जहाज से करती है। वह कहती है कि रेत के टीलों के बीच जहाज उड़ रहा है, मुझे उसे जी भरकर देखने दो। 

उस दौर में क्योंकि यही ऊंट महिलाओं के पीहर आने-जाने का साधन था, तब नई नवेली दुल्हनें इसी रेगिस्तान के जहाज को देखकर यह गीत गाया करती थीं। 

पानी की किल्लत से भी जुड़ी है कहानी 

जहां एक तरफ यह गीत राजस्थान में दुल्हनों के पीहर की याद से जुड़ा हुआ था, तो वहीं इसकी दूसरी कहानी में पानी की किल्लत का भी जिक्र है। कहा जाता है कि पुराने जमाने में रेगीस्तानी इलाकों में रहने वाले लोगों को मीठे पानी के लिए मीलों दूर जाना पड़ता था, ऐसे में लोग पनिहारियों और ऊंट को बड़ी उत्सुकता से निहारा करते थे। यहीं से जहाज बाई गीत की उत्पत्ति भी मानी जाती है।  

खुशियों का प्रतीक है ऊंट 

राजस्थान में ऊंट का रुतबा बहुत ऊंचा है, क्योंकि यह सिर्फ आवागमन का साधन न होकर लोगों की खुशियों से भी उतनी ही गहराई से जुड़ा हुआ है। लोगों की आजीविका की खुशी, पीहर जाने या वहां से संदेश आने की खुशी, मीठे पानी की खुशी और न जाने क्या-क्या। यही सब भावनाएं ऊंट को पशु से ऊपर उनके घर का सदस्य बनाती हैं।  

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