सिर्फ हिंदी नहीं, मध्य प्रदेश में बोली जाती हैं ये मीठी बोलियां; इनमें बसती हैं MP की असली संस्कृति
मध्य प्रदेश में सिर्फ हिंदी नहीं बोली जाती। यहां कई क्षेत्रीय बोलियां भी बोली जाती हैं।

मध्य प्रदेश में सिर्फ हिंदी नहीं बोली जाती (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत का दिल कहलाने वाला मध्य प्रदेश अपनी संस्कृति और विविधतता के लिए जाना जाता है। इसकी झलक यहां की भाषाओं में भी देखने को मिलती है। आमतौर पर लोग मध्य प्रदेश को हिंदी भाषी राज्य मान लेते हैं, लेकिन यहां सिर्फ हिंदी नहीं बोली जाती।
मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, जिनमें वहां की लोक संस्कृति, परंपराएं और इतिहास जिंदा रहता है। आइए जानें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कौन-कौन सी भाषाएं बोली जाती हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र
मध्य प्रदेश के उत्तरी और मध्य भाग में फैला बुंदेलखंड अपनी वीरता और लोकगीतों के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में बुंदेली बोली जाती है, जिसमें यहां का आल्हा गायन होता है। इसके अलावा, बुंदेलखंड के अलग-अलग हिस्सों में बनफरी और पवारी बोलियां भी बोली जाती हैं।
मालवा क्षेत्र
इंदौर, उज्जैन, धार और आसपास का मालवा क्षेत्र अपनी मीठी बोली के लिए जाना जाता है। यहां मुख्य रूप से मालवी बोली जाती है, जिसमें राजस्थानी बोली का गहरा असर दिखता है। मालवा के अलग-अलग हिस्सों में सोंधवाड़ी और उमठवाड़ी जैसे बोलियां भी बोली जाती हैं।
बघेलखंड क्षेत्र
मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से रीवा, सतना और सिंगरौली जैसे क्षेत्र बघेलखंड में आते हैं। यहां मुख्य रूप से बघेली बोली जाती है। बघेली के अलावा, बघेलखंड में तिरहई और गहोरा जैसी बोलियां भी काफी इस्तेमाल की जाती हैं।
निमाड़ क्षेत्र
पश्चिम मध्य प्रदेश का खरगोन, खंडवा, बड़वानी और बुरहानपुर क्षेत्र निमाड़ कहलाता है। इस क्षेत्र में निमाड़ी बोली का इस्तेमाल होता है। ये बोली हिंदी और राजस्थानी भाषा का मिश्रण है। निमाड़ क्षेत्र महाराष्ट्र के पास आता है, जिसके कारण यहां मराठी और मालवी भी बोली जाती है। हालांकि, इनमें यहां की स्थानीय बोलियों की झलक मिलती है।
चंबल क्षेत्र
मध्य प्रदेश के चंबल क्षेत्र में भदवाड़ी बोली का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा, पवारी और खटोला जैसी बोलियां भी यहां बोली जाती हैं।
महाकोशल और जनजातीय अंचल
जबलपुर, छिंदवाड़ा और मंडला के महाकोशल क्षेत्र में हिंदी और बघेली का इस्तेमाल होता है। वहीं, मध्य प्रदेश के जनजातीय इलाकों में गोंडी भाषा बोली जाती है। भाषाओं और बोलियों की ये विविधतता ही मध्य प्रदेश की संस्कृति है, जो इस राज्य को खूबसूरत बनाती है।
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