गरबा-डांडिया ही नहीं, गुजरात का ये लोक नृत्य भी है खास; मेहर समुदाय से जुड़ी इस डांस की सदियों पुरानी कहानी
गुजरात के लोक नृत्यों में मानियारो रास भी शामिल है। ये लोक नृत्य गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र से जुड़ा है।

गुजरात का मशहूर लोक नृत्य है मानियारो रास (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात का लोक नृत्य सिर्फ गरबा या डांडिया तक सीमित नहीं है। यहां मानियारो रास भी किया जाता है। ये लोक नृत्य गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मुख्य रूप से किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं ये नृत्य क्यों किया जाता है?
मानियारो रास सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं है। इस लोक नृत्य की जड़ें काफी पुरानी मानी जाती हैं। आइए जानें मानियारो रास क्यों किया जाता है।
क्यों किया जाता है मानियारो रास?
गुजरात का ये लोक नृत्य युद्ध कला से निकला एक नृत्य है, जिसमें पुरुष अपनी वीरता और साहस का प्रदर्शन करते हैं। यह नृत्य मूल रूप से सौराष्ट्र के मेहर समुदाय के लोगों से निकला है। हालांकि, इसे और भी कई समुदाय करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से इसे मानियार समुदाय से जोड़कर ही देखा जाता है।
वीरता दिखाने के लिए नृत्य
मेहर समुदाय के पुरुष अपनी वीरता और युद्ध कला के प्रतीक के रूप में इस नृत्य को करते हैं। पुराने समय में योद्धाओं की संस्कृति उनके अस्त्र-शस्त्र चलाने की कला को सुरक्षित रखने के लिए इस नृत्य को किया जाता था।
क्यों खास है मानियारो रास?
मानियारो रास अपनी खास शैली की वजह से दूसरे लोक नृत्यों से काफी अलग माना जाता है। यहां सिर्फ डांजिया का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि अपनी बहादुरी दिखाने के लिए तलवार और ढाल का भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, पारंपरिक रूप से इसमें डांडिया और नगाड़ों की थाप का भी इस्तेमाल होता है।
इस नृत्य को बहुत ही तेज गति से साथ किया जाता है, जो इस डांस को बहुत ही खूबसूरत बना देता है। शुरुआत में शहनाई की गूंज सुनाई देती है, फिर छंद और दोहे के पारंपरिक बोल गाए जाते हैं। इस डांस को बहुत ही तेज बीट्स पर किया जाता है, जिससे दर्शकों में भी जोश भर जाता है।
कैसे किया जाता है मानियारो रास?
इस नृत्य में पारंपरिक रूप से सिर्फ पुरुष ही हिस्सा लेते हैं, जिसमें वो पारंपरिक गुजराती पोशाक पहनकर डांस करते हैं। नर्तक तेज ताल के साथ गोल घेरे में घूमते हैं और तलवारबाजी और डांडिया के दांव-पेंच दिखाते हैं। इसे देखकर ऐसा लगता है, जैसे सचमुच ही युद्ध के मैदान में पहुंच गए हो।
इस नृत्य की शुरुआत शहनाई की धुन से की जाती है। नृतक संगीत की तेज धुन पर डांस शुरू करते हैं, जिससे देखने वालों में भी जोश भर जाता है।
