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गरबा से बिल्कुल अलग है ‘टिप्पणी’, मजदूरों की थकान मिटाने से शुरू हुआ था ये लोक नृत्य, कोली महिलाओं से है नाता

Published: Tue, 06 Oct 2026 04:31 PM (GMT+05:30)

गुजरात के लोक नृत्यों में सिर्फ गरबा नहीं, टिप्पणी भी शामिल है। ये नृत्य कोली समुदाय की महिलाओं से जुड़ा हुआ है।

क्यों खास है गुजरात का टिप्पणी डांस? (AI Generated Image)

क्यों खास है गुजरात का टिप्पणी डांस? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात के लोक नृत्य का नाम लेते ही दिमाग में सिर्फ गरबा का नाम आता है, लेकिन यहां के लोक नृत्य में टिप्पणी भी शामिल है। ये नृत्य गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में खासतौर से किया जाता है। गुजरात के कोली समुदाय की महिलाओं का इस नृत्य से गहरा नाता है। 

टिप्पणी नृत्य बहुत ही खास लय और ताल के साथ किया जाता है, जो इस नृत्य को बहुत ही दिलचस्प और खूबसूरत बनाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इस नृत्य की शुरुआत कैसे हुई? आइए जानें टिप्पणी नृत्य का इतिहास और इसकी खासियत। 

कैसे हुई टिप्पणी नृत्य की शुरुआत?

टिप्पणी नृत्य का इतिहास किसी राजदरबार से नहीं जुड़ा है। ये नृत्य श्रमिक महिलाओं की मेहनत से जुड़ा है। पुराने समय में गुजरात के तटीय इलाकों में मकानों की छतों और फर्श को मजबूत बनाने के लिए चूने और पत्थर के मिश्रण को कूटा जाता था। पोरबंदर के कोली समुदाय की महिलाएं इसमें काम किया करती थीं। 

फर्श को समतल बनाने के लिए वो लकड़ी के एक भारी औजार का इस्तेमाल करती थीं, जिसे टिप्पणी कहा जाता है। कड़ी धूप में अपनी ऊर्जा बनाए रखने के लिए महिलाएं एक लय में काम करने लगीं और थकान मिटाने के लिए बीच-बीच में लोकगीत गाने लगीं। धीरे-धीरे लोकगीतों की धुनों पर टिप्पणी को पटकने की लय ने नृत्य का रूप ले लिया और टिप्पणी नृत्य की शुरुआत हुई। 

कैसे खास है टिप्पणी नृत्य?

ये नृत्य महिलाओं के श्रम और मेहनत से जुड़ा है। इस नृत्य को खास इसमें इस्तेमाल होने वाली लकड़ी के डंडे की आवाज है। नर्तकियां पारंपरिक रंग-बिरंगी चनिया, चोली और ओढ़नी पहनती हैं और चांदी के पारंपरिक गहने पहनती हैं। ये नृत्य समूह में किया जाता है, जिसमें टिप्पणी के जमीन पर टकराने की आवाज इसे आकर्षक बनाती है।

टिप्पणी सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता, बल्कि ये गुजरात के ग्रामीण जीवन से काफी जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत भले ही श्रम के दौरान ऊर्जा बनाए रखने के लिए हुई थी, लेकिन आज महिलाएं इस नृत्य को शादी जैसे शुभ अवसरों पर भी काफी उत्साह के साथ करती हैं। 

कैसे किया जाता है टिप्पणी नृत्य?

इस नृत्य को महिलाएं घेरे में खड़ी होकर करती हैं। नृत्य में महिलाएं धीमी गति की ताल पर टिप्पणी को जमीन पर ठोकते हुए नृत्य शुरू करती हैं और साथ में लोकगीत गाती हैं। इस नृत्य को ढोल, मंजीरे जैसे वाद्य यंत्रों की धुन दी जाती है, जो टिप्पणी की आवाज के साथ मिलकर इसे और भी मजेदार बना देते हैं।