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क्यों Stress Relief के लिए गेमिंग का सहारा ले रही नई पीढ़ी? पेरेंट्स को जरूर पढ़नी चाहिए ये रिपोर्ट

Published: Fri, 01 May 2026 01:04 PM (IST)

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, जेन अल्फा के बच्चे मोबाइल के आदी नहीं हैं, बल्कि वे अपनी सख्त दिनचर्या से ...और पढ़ें

स्मार्टफोन में अपना 'स्पेस' ढूंढ रही है नई पीढ़ी (Image Source: AI-Generated)

स्मार्टफोन में अपना 'स्पेस' ढूंढ रही है नई पीढ़ी (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम शिकायत करते हैं कि आजकल के बच्चे हर वक्त मोबाइल में ही घुसे रहते हैं। हम बड़ी आसानी से इसे 'स्क्रीन की लत' मान लेते हैं, लेकिन 'रुकम कैपिटल' की एक नई रिपोर्ट, "जेन अल्फा डिकोडेड: द कंज्यूमर-ब्रांड डायनेमिक", ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।

इस स्टडी के मुताबिक, बच्चों का इंटरनेट या फोन से चिपके रहना मनोरंजन या लत का हिस्सा नहीं है। दरअसल, स्कूल, ट्यूशन और माता-पिता की कड़ी निगरानी के बीच उनकी जिंदगी इतनी बंधी हुई है कि डिजिटल दुनिया ही वह इकलौती जगह बचती है, जहां वे खुद को स्वतंत्र महसूस कर पाते हैं।

Gaming for stress relief

(Image Source: AI-Generated) 

गैजेट्स की भरमार, लेकिन आजादी पर सख्त पहरा

यह सच है कि आज के बच्चों के पास डिजिटल टूल्स की कमी नहीं है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 73.5% बच्चों के पास अपना पर्सनल स्मार्टफोन है और 60.3% बच्चे लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उन्हें इंटरनेट पर कुछ भी करने की पूरी छूट मिली हुई है। माता-पिता की नजर हर वक्त उन पर बनी रहती है:

  • 54% माता-पिता हमेशा इस बात पर नजर रखते हैं कि बच्चा ऑनलाइन क्या कर रहा है, जबकि 29.6% अक्सर इसकी जांच करते हैं।
  • फोन के इस्तेमाल का समय भी तय है: 41% घरों में स्क्रीन-टाइम को लेकर कड़े नियम हैं, और अन्य 41% पैरेंट्स बच्चों को तभी फोन देते हैं जब वे कोई अच्छा काम करके उसे 'कमाते' हैं। इसके अलावा, 54% से अधिक परिवारों में टीवी और ओटीटी ऐप्स पर भी 'पेरेंटल कंट्रोल' लगा हुआ है।

बच्चों की असली थकान का कारण क्या है?

इस स्टडी का एक बेहद चौंकाने वाला पहलू यह है कि बच्चों के मानसिक तनाव की सबसे बड़ी वजह स्कूल नहीं, बल्कि 'ट्यूशन' है। स्कूल की पढ़ाई को ही ट्यूशन में बार-बार दोहराया जाता है, जिससे बच्चे खुद को थका हुआ और निराश महसूस करते हैं।

इसी थकान को मिटाने के लिए वे गेमिंग का सहारा लेते हैं। उनके लिए ऑनलाइन गेम खेलना सिर्फ टाइमपास नहीं है; यह एक ऐसी जगह है जहां वे तनाव दूर करते हैं, दोस्तों से मिलते हैं और अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं।

Consumer-brand dynamic

(Image Source: AI-Generated) 

नन्हे उस्ताद ले रहे हैं शॉपिंग के फैसले

आजकल के बच्चे अपनी पसंद-नापसंद को लेकर बहुत स्पष्ट हैं। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइट्स पर ऑनलाइन शॉपिंग करते समय 81% बच्चे अपने माता-पिता के साथ बैठकर चीजें चुनते हैं। कपड़े, खिलौने और स्नैक्स के मामले में 40 से 46 प्रतिशत बच्चों को अपने पसंदीदा ब्रांड्स की अच्छी खासी समझ होती है।

दिलचस्प बात यह है कि किसी चीज को खरीदने का फैसला सोशल मीडिया से ज्यादा उनके दोस्तों पर निर्भर करता है। रिपोर्ट बहुत ही सटीक शब्दों में कहती है कि "सोशल मीडिया रील से किसी चीज को पाने की इच्छा जन्म लेती है, लेकिन दोस्त उस इच्छा को जल्दबाजी में बदल देते हैं।"

छोटी उम्र में ही पैसों की समझ

जेन अल्फा के बच्चे आर्थिक मामलों में भी काफी स्मार्ट हो रहे हैं।

  • हर 10 में से लगभग 7 बच्चे घर के छोटे-मोटे काम करके या डिजिटल तरीकों से अपने लिए पैसे कमाना चाहते हैं।
  • 45% बच्चों में आत्मनिर्भर होकर कमाने की बहुत गहरी इच्छा देखी गई है।

हालांकि, पैसों को बचाने के मामले में वे अभी सीख ही रहे हैं, क्योंकि केवल 14% बच्चे ही अपनी पॉकेट मनी का बड़ा हिस्सा नियमित तौर पर बचा पाते हैं।

कुल मिलाकर, यह रिसर्च हमें यह समझाती है कि आज के 'जेन अल्फा' बच्चे स्क्रीन के गुलाम नहीं हैं। वे बस अपने रूटीन से भरे हुए जीवन में थोड़ी-सी आजादी और खुद का स्पेस ढूंढ रहे हैं। ब्रांड्स, शिक्षकों और माता-पिता को बच्चों के इस इंटरनेट प्रेम को 'लत' समझने की बजाय, उनकी इस छिपी हुई आजादी की चाहत को समझना होगा।

Source: Gen Alpha Decoded: The Consumer-Brand Dynamic

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