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डिजिटल गुलामी से बचें युवा; सीएम योगी की दो टूक- स्मार्टफोन का अनियंत्रित इस्तेमाल छीन रहा है आपका भविष्य

Published: Wed, 18 Mar 2026 05:30 PM (IST)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युवाओं को डिजिटल और पारंपरिक नशे दोनों के खतरों के प्रति आगाह कर रहे हैं। वे स्मार्टफोन ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की युवाओं को चेतावनी डिजिटल एडिक्शन और नशे से बचें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की युवाओं को चेतावनी डिजिटल एडिक्शन और नशे से बचें

HighLights

  1. युवाओं को डिजिटल व पारंपरिक नशे से बचने की सलाह।

  2. स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

  3. योगी जी ने संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।

भावेष पांडेय। आज का समय तकनीक और डिजिटल कनेक्टिविटी का समय है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया टूल्स ने जीवन को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी उभरकर सामने आई है-डिजिटल एडिक्शन। स्पष्ट है कि युवा पीढ़ी के सामने अब दो तरह के खतरे समानांतर दिखाई देते हैं: पारंपरिक नशे का जाल और दूसरा मोबाइल, सोशल मीडिया तथा ऑनलाइन गेम्स का बढ़ता आकर्षण। खास बात ये है कि इन दोनों ही खतरों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ न केवल सजग हैं बल्कि मुखर शैली में वह इन मुद्दों को सार्वजनिक मंचों से उठा रहे हैं। यह युवाओं के हित में उनकी संवेदनशील सोच को प्रतिबिंबित करता है।

परीक्षाओं के दौर में जागरुकता के प्रसार पर जोर

वर्तमान समय में जब देश ज्यादातर हिस्सों में स्टूडेंट्स विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में हिस्सा लेकर भविष्य की नींव रखने जा रहे हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक राज्य के सीएम की छवि से ऊपर उठकर अभिभावक के रूप में लगातार इन विषयों पर युवाओं, छात्रों और माता-पिता को जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान के जालौर में दिया गया उनका हालिया संदेश इसी व्यापक सोच की कड़ी है, जहां उन्होंने युवाओं को नशे और स्मार्टफोन-दोनों के खतरे के प्रति सावधान किया।

डिजिटल दुनिया के दौर में बढ़ रही एडिक्शन की समस्या

जालौर में अपने संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि स्मार्टफोन का अनियंत्रित उपयोग युवाओं के समय, श्रम और मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक स्क्रीन पर रहने से आंखों की सेहत और सोचने की क्षमता दोनों प्रभावित होती हैं। दरअसल, स्मार्टफोन केवल संचार का माध्यम नहीं रह गया है।

सोशल मीडिया, ऑनलाइन वीडियो और खास तौर पर मोबाइल गेम्स ने इसे युवाओं की दिनचर्या का केंद्र बना दिया है। कई बार एक गेम या एक वीडियो देखने के लिए उठाया गया मोबाइल घंटों तक हाथ में बना रहता है। यही स्थिति धीरे-धीरे डिजिटल एडिक्शन का रूप ले लेती है। मुख्यमंत्री योगी ने इसी संदर्भ में यह चेतावनी दी कि मोबाइल गेम्स और अनियंत्रित डिजिटल कंटेंट युवाओं को सकारात्मक दिशा से भटकाकर नकारात्मक मानसिकता की ओर ले जा सकते हैं और लंबे समय में अवसाद जैसी समस्याओं को भी जन्म दे सकते हैं।

बचपन से ही बढ़ती डिजिटल निर्भरता

योगी आदित्यनाथ की चिंता केवल युवाओं तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने कई अवसरों पर यह मुद्दा भी उठाया कि बच्चों को चुप कराने या व्यस्त रखने के लिए उन्हें स्मार्टफोन थमा देना अब एक सामान्य आदत बनती जा रही है। गोरखपुर महोत्सव में उन्होंने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा था कि दुधमुंहे बच्चों को स्मार्टफोन देना अपराध सरीखा है। इस टिप्पणी का आशय केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं था, बल्कि उस सामाजिक बदलाव की ओर संकेत था जिसमें बचपन के अनुभव धीरे-धीरे स्क्रीन के दायरे में सिमटते जा रहे हैं।

कम उम्र में मोबाइल गेम्स और वीडियो की आदत बच्चों की एकाग्रता, कल्पनाशक्ति और व्यवहारिक विकास को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति से आग्रह किया कि छोटे बच्चों को रोने या जिद करने पर भी मोबाइल देने से बचें।

‘योगी की पाती’: एक अभिभावक की तरह संवाद

युवाओं से संवाद का एक अलग माध्यम ‘योगी की पाती’ भी रहा है। फरवरी में परीक्षाओं से पहले लिखी अपनी चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने छात्रों को बहुत सरल भाषा में समझाया था कि मोबाइल किस तरह उनका कीमती समय चुरा लेता है। उन्होंने लिखा था कि एक वीडियो देखने या एक मोबाइल गेम खेलने के लिए उठाया गया फोन कब कई घंटों का समय ले लेता है, यह अक्सर पता ही नहीं चलता। इसका सीधा असर पढ़ाई और एकाग्रता पर पड़ता है।

इसके साथ ही उन्होंने छात्रों को पुस्तकों से मित्रता करने, खेलकूद में भाग लेने, योग और व्यायाम अपनाने तथा परिवार के साथ समय बिताने की प्रेरणा दी थी। यह संदेश किसी प्रशासनिक निर्देश की तरह नहीं, बल्कि एक अभिभावक के मार्गदर्शन जैसा दिखाई देता है, जिसमें समस्या और समाधान दोनों की विस्तार में चर्चा की गई।

नशा और डिजिटल एडिक्शन-दोनों के प्रति किया आगाह

योगी आदित्यनाथ का दृष्टिकोण केवल डिजिटल एडिक्शन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कई बार युवाओं को पारंपरिक नशे के खतरे से भी सावधान किया है।जालौर में भी उन्होंने कहा था कि नशे के सौदागर युवा पीढ़ी को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं और समाज को इसके प्रति सजग रहना होगा।

उनका मानना है कि यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ते हैं तो वही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। इसलिए उनका संदेश केवल समस्या बताने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि युवाओं को सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

तकनीक और जीवन के बीच संतुलन की बात

योगी आदित्यनाथ के इन सभी वक्तव्यों और संवादों को एक साथ देखने पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण सामने आता है। एक ओर वे ऐसे मुख्यमंत्री की छवि प्रस्तुत करते हैं जो तकनीक को भविष्य, सुशासन और परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं। डिजिटल गवर्नेंस, तकनीकी नवाचार और आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था उसी सोच का हिस्सा हैं।

लेकिन दूसरी ओर वे एक नेता या मुख्यमंत्री की औपचारिक भूमिका से आगे बढ़कर एक अभिभावक की तरह भी संवाद करते हैं। वे यह समझाने की कोशिश करते हैं कि तकनीक जीवन को आसान बनाने का माध्यम है, लेकिन यदि उसका उपयोग असंतुलित हो जाए तो वही तकनीक जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

इसलिए उनका संदेश दो स्तरों पर काम करता है-एक तरफ युवाओं को पारंपरिक नशे से बचाने की चेतावनी के रूप में, और दूसरी तरफ मोबाइल, सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल और मोबाइल गेम्स की लत से दूर रहने की सलाह के रूप में यह प्रभावी होता दिखता है ।

संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली का मूलमंत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्ष पीठाधीश्वर होने के नाते बेहद संतुलित और सकारात्मक जीवनशैली का दशकों से पालन करते रहे हैं। उनके सुझावों में वर्षों के इस सीख की झलक भी दिखती है। वे युवाओं को पुस्तकों, योग, व्यायाम, खेलकूद और परिवार के साथ समय बिताने जैसी गतिविधियों की ओर लौटने की प्रेरणा देते हैं। यह केवल व्यक्तिगत सलाह नहीं है, बल्कि एक संतुलित और स्वस्थ समाज की कल्पना भी है।

आज जब डिजिटल दुनिया तेजी से हमारे जीवन को प्रभावित कर रही है, तब इस तरह के संवाद यह याद दिलाते हैं कि तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन उससे संतुलन बनाए रखना उससे भी अधिक आवश्यक है।

और शायद यही वह मूल संदेश है जिसे योगी आदित्यनाथ लगातार युवाओं तक पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं- तकनीक का उपयोग कीजिए, लेकिन उसके गुलाम मत बनिए।

(लेखक इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता हैं)

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