देवर-भाभी के बीच छेड़छाड़ पर बना है ये गुजराती गीत, गरबा नाइट्स में आज भी खूब बजता है 'देर मारी अंगूठरी नो चोर'
ये गुजराती गीत देवर-भाभी के रिश्ते की नोंक-झोंक पर बना है। गरबा नाइट्स में इस गीत को खूब बजाया जाता है।
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गरबा नाइट्स में खूब बजता है ये गीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र का त्योहार आने वाला है और इसी के साथ गरबा नाइट्स की धूम भी लौटने वाली है। गुजरात में गरबा की अनोखी धूम देखने को मिलती है। गरबा नाइट्स में एक से बढ़कर एक गरबा गीत बजते हैं, जिनमें देर मारी अंगूठरी नो चोर भी शामिल है।
ये सबसे हिट और मशहूर गरबा सॉन्ग्स में से एक है, जिस पर लोग जमकर गरबा करते हैं। ये गीत असल में देवर-भाभी के बीच की मस्ती पर बना है और इसकी धुन इतनी मजेदार है कि सुनकर आपका दिल खुश हो जाएगा। आइए जानें इस गरबा गीत में क्या कहा जा रहा है।
क्या कहता है ये गीत?
ये गरबा गीत देवर-भाभी के बीच की नोंक-झोंक और मजाक पर बना है। इस गीत की शुरुआत होती है देर मारी अंगूठडी नो चोर, देर मारी अंगूठडी खोवानी.. से। यानी एक भाभी शिकायत और मजाक के अंदाज में अपने देवर से कहती है कि मेरी अंगूठी खो गई है और उसे लगता है कि चोर उनका देवर ही है। इस पर अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए देवर भाभी को कीमती गहने बनवाकर देने की पेशकश करता है, जिसे भाभी मस्ती भरे अंदाज में नकार देती है।
देवर का प्रस्ताव
इस गीत में देवर सबसे पहले रत्न जड़े कंगन बनवाकर देने का प्रस्ताव देता है। इसके बाद वह नथनी उपहार में देने की बात करता है, जिस पर वो रत्न जड़वाकर देगा। नथनी के बाद वह पायल और कड़े बनवाने का वादा भी करता है।
भाभी का इनकार
देवर के सभी प्रस्तावों को भाभी मुस्कुराकर मना कर देती है और कहती है कि नहीं नहीं, उसे ये सब नहीं चाहिए। जबकि परिवार की दूसरी महिलाएं देवर की तरफ से कहती हैं कि हां, हां! भाभी आप इन गहनों के लिए हां कहो। हालांकि, भाभी मना करके अपनी पहली शिकायत पर ही वापस लौट आती है कि उसकी अंगूठी खो गई है और उसका पूरा शक उसके देवर पर है।
देवर-भाभी का चुलबुला अंदाज
ये गीत देवर-भाभी के रिश्ते को बहुत ही चुलबुले अंदाज में पेश करता है। देवर और भाभी का रिश्ता हमारे समाज में बहुत प्यार और सम्मान से भरा माना जाता है। उसी को ये गीत भी बयां करता है। अपने छोटे देवर को भाभी चोरी का इलजाम लगाकर छेड़ती है। जिसके जवाब में देवर भी अपने अंदाज में अपनी बेगुनाही साबित करने में लग जाता है।
इस गीत की धुन भी काफी मजेदार है और गरबा की ताल से मेल खाती है। इसलिए हर गरबा आयोजन पर ये गीत जरूर बजाया जाता है।
