विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पवन सिंह-खेसारी के गानों से परे है बिहार का ये लोकगीत, जट-जटिन डांस से है नाता; पति-पत्नी की तकरार करता है बयां

Published: Wed, 21 Oct 2026 12:29 PM (IST)

बिहार के लोकगीतों में जट-जटिन में गाया जाने वाला गीत भी शामिल है। ये गीत पति-पत्नी के बीच की नोकझोंक को सुनाता है।

जट-जटिन नृत्य के साथ गाया जाता है ये गीत (AI Generated Image)

जट-जटिन नृत्य के साथ गाया जाता है ये गीत (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के गाने सिर्फ पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के गानों तक सीमित नहीं हैं। यहां पर कई लोकगीत भी गाए जाते हैं, जो यहां की संस्कृति को दिखाते हैं। ऐसा ही एक लोकगीत है टिकवा जब जब मंगइली रे जटवा। 

ये लोकगीत बिहार के मशहूर लोक नृत्य जट-जटिन से जुड़ा है। इस नृत्य के जरिए पति-पत्नी के बीच के रिश्ते, उनकी नोक-झोंक और गरीबी के संघर्ष को दिखाया जाता है। इसी नृत्य के साथ ये खास गीत गाया जाता है। ये गीत इस नृत्य की जान माना जाता है। आइए जानें इस गीत में क्या कहा गया है और इस जट-जटिन गीत की खासियत क्या है। 

क्या कहता है ये गीत? 

ये गीत जट-जटिन नृत्य में पति-पत्नी के बीच की बातचीत को दिखाने के लिए गाया जाता है। इस गीत में पत्नी अपने पति से शिकायत करती है और पति उन शिकायतों का जवाब देता है। इस गीत में जटवा पति को कहा जा रहा है और जटिन पत्नी को।

जटिन की गहनों की मांग 

जटिन शिकायत करती है कि उसने बार-बार मांग टीके लाने के लिए कहा, लेकिन जट उसके लिए टीका नहीं लाया। उसकी बाली उम्र बिना मांग टीके के ली निकल गई, लेकिन जट ने उसकी ख्वाहिश पूरी नहीं की। 

इस शिकायत के जवाब में जट कहता है कि उसने टीका लाकर दिया तो था, फिर जटिन ने उसे पहना क्यों नहीं। उसने क्यों अपनी बाली उम्र के मायके की याद में बिता दिया और उसके दिए गए मांग टीके के पहना तक नहीं।   

इसके बाद जटिन इसी तरह बाकी दूसरे गहने, जैसे- नथिया, कंगन और पायल न लाने की शिकायत करती है। वह कहती है कि उसके बार-बार मांग करने के बाद भी जट उसके लिए ये गहने लेकर नहीं आया। जट इन शिकायतों के जवाब में हर बार यही कहता कि मैंने तो गहने लाकर दिए हैं, लेकिन जटिन ने कभी उन गहनों को पहना नहीं। 

पति-पत्नी का उलाहना

इस गीत में पति-पत्नी के बीच की मीठी नोक-झोंक को बयां किया जाता है, जिसमें प्रेम के साथ-साथ उलाहना भी सुनने को मिलता है। पत्नी अपने पति से शिकायत करती है और पति उसकी शिकायतों का जवाब बहुत ही मीठे अंदाज में देता है। 

जट-जटिन गीत की खासियत

जट-जटिन गीत हमेशा सवाल-जवाब की शैली में गाए जाते हैं, जो नृत्य के दौरान पति-पत्नी के बीच की बातचीत को दिखाते हैं। जट-जटिन बारी-बारी से अपनी बात रखते हैं और गीतों पर नृत्य करते हुए इसे दर्शकों के सामने पेश करते हैं। 

इन गीतों में सिर्फ प्रेम की बातों के साथ-साथ गरीबी, घर की परेशानियां और पति के परदेस जाने जैसे मुद्दों को भी पेश किया जाता है। इन गीतों की एक खासियत ये भी होती है कि इन्हें बिल्कुल ठेठ देसी भाषा में गाया जाता है, जिससे लोगों को इससे और जुड़ाव महसूस होता है।