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मध्य प्रदेश की शादियों की जान है हल्दी-तेल का ये लोकगीत, ढोलक की थाप पर जमा देता है महफिल में रंग

Published: Sat, 03 Oct 2026 02:48 PM (IST)

शादी की रस्मों में हल्दी-तेल चढ़ाने की खास परंपरा है। इस रस्म के दौरान कई लोकगीत भी गाए जाते हैं।

हल्दी की रस्म से जुड़ा है ये लोकगीत (AI Generated Image)

हल्दी की रस्म से जुड़ा है ये लोकगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शादी-ब्याह के मौके पर गाए जाने वाले लोकगीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं गाए जाते, बल्कि इनके पीछे सदियों पुरानी परंपराएं भी छिपी होती हैं। ऐसा ही एक गीत है हल्दी लगाओ रे, तेल चढ़ाओ रे…। ये गीत मध्य प्रदेश की शादियों में हल्दी की रस्म में बड़े उल्लास के साथ गाया जाता है। 

ये गीत लड़की की शादी में खासतौर से गाया जाता है, जिसमें इस रस्म को बहुत ही खूबसूरती के साथ बयां किया जाता है। आइए जानें क्या कहता है ये लोकगीत।

हल्दी-तेल की रस्म 

शादी में हल्दी और तेल चढ़ाने की रस्म का खास महत्व होता है। हल्दी को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, हल्दी और तेल से बना उबटन त्वचा के निखारने के लिए भी इस्तेमाल होता है। शादी में दुल्हन को हल्दी और तेल लगाया जाता है, ताकि उसका वैवाहिक जीवन खुशियों और समृद्धि से भरा रहे। साथ ही, दुल्हन का रूप भी निखरकर आए।  

दुल्हन की सुंदरता को बयां

इस लोकगीत में दुल्हन की खूबसूरती को कई तरीकों से बयां किया गया है। दुल्हन के चेहरे की चमक को बयां करने के लिए उसे चांद का टुकड़ा कहा गया है। उसके चेहरे की कोमलता को बयां करने के लिए उसकी तुलना फूलों से की गई है। वहीं इस गाने में आगे कहा जाता है मुखड़ा सजाओ रे, कंचन बनाओ रे… यानी दुल्हन को हल्दी-तेल लगाओ, ताकि वह सोने की तरह चमकने लगे।  

लाड़-प्यार का भाव

इस गीत में बेटी के लिए प्रेम को भी बहुत खूबसूरती से बयां किया गया है। गाने में कहा गया है नाजुक-नाजुक बन्नी हमारी, यानी बेटी को बहुत नाजों से पाला है। इसलिए वह काफी नाजुक है। उसके कोमल शरीर पर हल्दी-तेल का उबटन लगाओ और उसके बदन को दमकाओ। घर की महिलाएं इस रस्म में शामिल होती हैं और दुल्हन के आगे के जीवन के लिए मंगल कामना करती हैं और उसे आशीर्वाद देती हैं। 

माहौल में ऊर्जा भरने वाला गीत

ये गीत बहुत ही भावुक करने वाला है, लेकिन वहीं पूरे माहौल को ऊर्जा से भी भर देता है। इसकी धुन इतनी प्यारी है कि हल्दी की रस्म का पूरा माहौल एनर्जी से भर जाता है। इतना ही नहीं, इस गीत को शुभता के प्रतीक के रूप में भी गाया जाता है। ढोलक की थाप पर ये गाना काफी मजेदार लगता है।