चाय में डुबोने से पहले कभी सोचा है आखिर बिस्किट में क्यों होते हैं छेद? 90% लोगों को नहीं मालूम होगा जवाब
क्या आपने कभी बिस्किट के ऊपर बने छोटे-छोटे छेदों पर ध्यान दिया है?

क्या सिर्फ सजावट के लिए होते हैं बिस्किट में छेद? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम चाय के साथ कोई क्रैकर या नमकीन बिस्किट खाते हैं, तो हमारा ध्यान उस पर बने छोटे-छोटे छेदों पर जरूर जाता है। अक्सर हमें लगता है कि बिस्किट को सुंदर या अलग दिखाने के लिए यह कोई पैटर्न या डिजाइन है।
हालांकि, सच तो यह है कि यह महज सजावट नहीं, बल्कि इसके पीछे बेकिंग का एक बहुत ही खास विज्ञान काम करता है। इन छेदों के बिना आपका पसंदीदा बिस्किट वैसा नहीं बनेगा जैसा आप उसे खाना पसंद करते हैं।
स्टीम को बाहर निकालने का मिलता है रास्ता
आटे या मैदे को जब ओवन की तेज गर्मी में पकाया जाता है, तो उसके अंदर मौजूद नमी तेजी से भाप में बदलने लगती है। अगर बिस्किट में छेद न हों, तो यह भाप बाहर नहीं निकल पाएगी और बिस्किट किसी गुब्बारे की तरह फूल जाएगा। फूलने के कारण इसका आकार बिगड़ सकता है और यह बीच से खोखला हो सकता है। बेकिंग की दुनिया में इन छेदों को बनाने की प्रक्रिया को 'डॉकिंग' कहा जाता है। ये छेद भाप को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालकर बिस्किट को चपटा और सही आकार में बनाए रखते हैं।
हर कोने से पकता है बिल्कुल एक जैसा
क्रैकर्स बहुत ही पतले होते हैं, लेकिन ओवन में इन्हें हर तरफ से बराबर पकना चाहिए। अगर ये छेद न हों, तो हो सकता है कि बिस्किट किनारों से तो पक जाए, लेकिन बीच में कच्चा या नरम रह जाए। इन छोटे सुराखों की मदद से ओवन की गर्मी और नमी बिस्किट के आर-पार आसानी से जाती है, जिससे यह बीच से लेकर किनारों तक बिल्कुल एक समान रूप से बेक होता है।
मजेदार क्रंच भी है वजह
इन छेदों का सबसे बड़ा फायदा बिस्किट की बनावट में नजर आता है। अगर बिस्किट में छेद नहीं होंगे, तो वह च्युई बन सकता है। सही जगह पर छेद होने से बिस्किट पूरी तरह सूख जाता है और एकदम कुरकुरा बनता है। यही कारण है कि जब आप इसे तोड़ते हैं, तो यह मुड़ने या खिंचने के बजाय आसानी से एक 'स्नैप' की आवाज के साथ साफ तौर पर टूट जाता है।
मशीनों से बहुत पहले का है यह जुगाड़
आपको लग सकता है कि यह तकनीक आधुनिक फैक्ट्रियों और मशीनों की देन है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। पुराने जमाने के बेकर्स भी इस तरकीब का इस्तेमाल सदियों से करते आ रहे हैं। पाई और चपटी ब्रेड बनाने वाले लोग बहुत पहले ही समझ गए थे कि आटे के अंदर से हवा और भाप को बाहर निकालना कितना जरूरी है। आज की फैक्ट्रियों ने बस इस पुरानी और असरदार तरकीब को अपनाया हुआ है।
हर बिस्किट का अपना एक अलग पैटर्न
ध्यान से देखने पर आपको पता चलेगा कि हर तरह के बिस्किट पर छेदों की गिनती और डिजाइन अलग-अलग होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये छेद आटे की मोटाई, उसमें इस्तेमाल किए गए फैट, नमी की मात्रा और ओवन के तापमान को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, अगर बिस्किट का आटा मोटा है, तो उसमें से भाप निकालने के लिए ज्यादा छेदों की जरूरत पड़ेगी। फैक्ट्रियों में इन छेदों को बहुत ही सटीक और सोचे-समझे तरीके से बनाया जाता है, ताकि हर घंटे ओवन से निकलने वाले हजारों बिस्किट बिल्कुल एक जैसे ही हों।
