क्या बॉस के पिता बनने से आपकी सैलरी पर पड़ता है असर? इस सवाल का जवाब कर देगा आपको हैरान
एक शोध के अनुसार, जब किसी पुरुष बॉस की पहली संतान बेटी होती है, तो उसकी कंपनी में महिलाओं के रोजगार और वेतन में बढ़ोतरी होती है।

बेटी का जन्म कैसे बदल देता है एक पुरुष बॉस की सोच? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बॉस की पहली संतान का लिंग क्या है, क्या इससे उसके ऑफिस की महिलाओं की सैलरी और प्रमोशन पर फर्क पड़ सकता है? ये सवाल ही थोड़ा अटपटा सा लगता है, लेकिन इसका जवाब आपको हैरान कर देगा। दरअसल, एक रिसर्च में पता चला है कि जब किसी पुरुष बॉस की पहली संतान बेटी होती है, तो उसकी कंपनी में महिलाओं के रोजगार और वेतन में बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
जी हां, नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की मैडालेना रोन्ची और आरहस यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नीना स्मिथ के रिसर्च पेपर डैडीज गर्ल- डॉटर्स, मैनेजरियल डिसीजन्स, एंड जेंडर इनक्वालिटी में ये बात सामने आई है। आइए जानें इस दिलचस्प रिसर्च के बारे में।
कैसे हुई ये रिसर्च?
ये रिसर्च डेनमार्क के लेबर मार्केट के 1993 से 2017 तक के डेटा पर आधारित है। रिसर्चर ने ऐसी छोटी कंपनियों के बॉस पर फोकस किया, जहां हायरिंग और सैलरी तय करने की जिम्मेदारी मैनेजर के पास होती है। पहली संतान के जन्म से पहले और बाद में कंपनियों के कामकाज का विश्लेषण करने पर ये हैरान करने वाला नतीजा सामने निकला।
आंकड़ों में दिखा बड़ा बदलाव
इस रिसर्च के मुताबिक, किसी मैनेजर के घर पहली बेटी के जन्म के बाद महिलाओं की कमाई में 4.4% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, कंपनी में महिलाओं की हायरिंग में 2.9% की बढ़ोतरी देखी गई।
ये असर बेटी के जन्म के तुरंत बाद दिखने लगता है और कई सालों तक बना रहता है। ऐसे मैनेजर हाइयर एजुकेशन और फुल टाइम रोल्स वाली महिलाओं को हायर करने के लिए ज्यादा इच्छुक नजर आए। साथ ही, मैनेजर का नजरिया भी जेंडर इक्वॉलिटी के लिए ज्यादा पॉजीटिव हुआ।
इस रिसर्च में ये भी पाया गया कि महिला कर्मचारियों की संख्या और वेतन बढ़ाने से कंपनी की परफॉर्मेंस पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ा।
तुरंत क्यों बदलती है बॉस की सोच?
रिसर्चर का मानना है कि ये बदलाव बॉस की तरफ से अपनी बेटी के भविष्य के लिए की गई प्लानिंग का नतीजा नहीं है, क्योंकि ये बदलाव बेटी के जन्म के तुरंत बाद ही आ जाता है। दरअसल, बेटी का जन्म पुरुष मैनेजर को वर्कप्लेस इक्वॉलिटी के लिए ज्यादा सेंसिटिव बनाता है और महिलाओं की क्षमता को लेकर उनके नजरिए में पॉजिटिव बदलाव लाता है।
