विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

गरबा से बिल्कुल अलग है गुजरात का लोक नृत्य 'डाकला', जनजातीय समूहों से जुड़ा है इस डांस का दिलचस्प इतिहास

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:38 PM (GMT+05:30)

डाकला गुजरात का एक लोक नृत्य है, जिसे नवरात्र के खास अवसर पर किया जाता है।

क्यों किया जाता है डाकला? (AI Generated Image)

क्यों किया जाता है डाकला? (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात में नवरात्र में सिर्फ गरबा और डांडिया ही नहीं, डाकला भी किया जाता है। डाकला गुजरात का लोक नृत्य है, जिसे नवरात्र के खास मौके पर किया जाता है। ये डांस काफी एनर्जी के साथ किया जाता है। 

डाकला सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता। इस नृत्य की जड़े काफी पुरानी हैं और गुजरात के जनजातीय समुदायों से जुड़ा है। आइए जानें डाकला का इतिहास क्या है और ये नृत्य क्यों किया जाता है। 

क्या है डाकला का इतिहास? 

डाकला शब्द डाक से निकला है, जो एक पारंपरिक वाद्य यंत्र है। डाक दिखने में डमरू जैसा होता है, लेकिन इसका आकारा थोड़ा बड़ा होता है और आवाज ज्यादा गूंजने वाली होती है। इस नृत्य का इतिहास गुजरात के गांव और जनजातीय इलाकों से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि पुराने समय में महामारी या प्राकृतिक आपदा को बुरी शक्तियों का प्रभाव माना जाता था। 

तब जनजातीय समुदाय अपनी और अपने गांव की रक्षा के लिए ग्रामीण देवी को प्रसन्न करने के लिए एक खास नृत्य करते थे। ये नृत्य डाक की तेज गूंज पर किया जात था और शारदीय नवरात्र के समय किया जाता था। धीरे-धीरे इसी नृत्य ने आगे चलकर डाकला का रूप लिया और गुजरात की लोक संस्कृति का अहम हिस्सा बन गया।

क्यों किया जाता है डाकला? 

डाकला नृत्य मनोरंजन के लिए नहीं किया जाता। इस नृत्य के जरिए मां अंबे के रौद्र रूप मां चंडी, मां काली और मां मेलड़ी जैसे स्वरूपों का आह्वान किया जाता है। इन नृत्य के जरिए मां से प्रार्थना की जाती है कि वे धरती पर उतरें और बुरी शक्तियों से उनकी रक्षा करें। 

इसलिए डाकला के गीत भी काफी ऊर्जा से भरे होते हैं और उनमें मां चंडी, मां मेलड़ी और मां काली का जिक्र सुनने को मिलता है। 

कैसे किया जाता है डाकला नृत्य? 

डाकला गरबा से काफी अलग तरीके से किया जाता है। गरबा को धीमी ताल पर किया जाता है, लेकिन डाकला हमेशा तेज ताल पर खेला जाता है। डाक की तेज गूंज और डाकला गीतों पर बहुत तेज गति से गोल घेरे में घूमते हुए नृत्य किया जाता है। 

इस नृत्य में तेज मूवमेंट्स के साथ स्टेप्स किए जाते हैं, जो डाकला गीतों की एनर्जी से मैच करने के लिए किए जाते हैं। नृत्य करते समय महिलाएं पारंपरिक चनिया-चोली पहनती हैं और पुरुष केडियू और चूड़ीदार पहनते हैं। डाक की तेज थाप पर पूरी एनर्जी के साथ डाकला किया जाता है।