भोजपुरी का वो गीत जिसमें बसता है पूरा भारत, बिहार से सात समंदर पार तक पहुंचे ‘बटोहिया’ की कहानी है दिलचस्प
यह गीत भारत की सुंदरता और गिरमिटिया मजदूरों के संघर्ष को दर्शाता है, जिसकी ख्याति सात देशों तक फैली है।

‘बटोहिया’ गीत जिसमें बसता है पूरा भारत (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में अलग-अलग भाषाओं के लोकगीत किसी क्षेत्र विशेष की संस्कृति के साथ ही लोगों की जिंदगी और उनके रिश्तों के बारे में बताते हैं। इन सब में बिहार का एक ऐसा गीत है जिसमें सिर्फ राज्य की नहीं, बल्कि पूरे भारत की तारीफ सुनने को मिलती है। इस गीत का मातृभूमि से जुड़ाव ही वो खासियत थी कि जिसने यह साबित कर दिया कि लोकगीत केवल मनोरंजन का नाम नहीं।
‘बटोहिया’ गीत जिसमें बसता है पूरा भारत
बिहार का मशहूर ‘बटोहिया’ जिसे ‘सुंदर सुभूमि भैया’ के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा भोजपुरी देशभक्ति गीत है जिसे सुनने पर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। इसकी रचना साल 1911 में बिहार के सारण जिले के रहने वाले बाबू रघुबीर नारायण ने की थी।
कहते हैं कि रघुबीर नारायण अंग्रेजी में लिखा करते थे, लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें एक मुलाकात के दौरान भोजपुरी में लिखने की प्रेरणा दी थी। इसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कहने पर ही इस ऐतिहासिक भोजपुरी गीत को लिखा गया।
‘बटोहिया’ गीत किसके लिए लिखा गया?
भोजपुरी शब्द ‘बटोहिया’ का मतलब यात्री होता है। यह भी बताते चलें कि भोजपुरी में गाए जाने वाले इस गीत का नाता भारत की आजादी के साथ ही गिरमिटिया मजदूरों से भी है। यहीं से यात्री की कड़ी इस गीत से जुड़ती है क्योंकि इस गीत में ब्रिटिश शासन के दौरान एक गिरमिटिया मजदूर एक यात्री को भारत के बारे में बता रहा है। वह अपने देश की तुलना धरती पर स्वर्ग के रूप में कर रहा है।
तभी तो इस गीत को बिहार में इतनी लोकप्रियता मिली कि वह इस राज्य में राष्ट्रगीत तक कहलाने लगा था, पर समय के साथ इस गीत की ख्याति कहीं खोती चली गई।
भारत की खूबसूरती से बयां करता है यह गीत
‘सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से... तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया’ पंक्ति में भारत को स्वर्ग के समान दर्जा दिया गया है। यह गीत कहता है भारत एक सुंदर और पवित्र भूमि है, जिसमें मेरे प्राण बसते हैं। इसके उत्तर में हिमालय एक कोतवाल की तरह रक्षा कर रहा है, तो तीनों ओर से समंदर ने इसे घेर रखा है।
‘जाऊ-जाऊ भैया रे बटोही हिंद देखी आउ... कामिनी बिरह-राग गावे रे बटोहिया’ इसके बाद की पंक्तियों में चारों वेदों को ऋषि मुनियों द्वारा गाए जाने के साथ ही प्रभु श्री राम, माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण की गाथाओं का भी जिक्र मिलता है।
भोजपुरी से आगे बटोहिया की पहचान
आपको जानकार हैरानी होगी कि यह पहला ऐसा भोजपुरी गीत है जिसे 7 अलग-अलग देशों के 11 गायकों ने एक साथ मिलकर गाया है। इनमें भारत, सूरीनाम, हॉलैंड, मॉरीशस, त्रिनिदाद, गुयाना और फिजी शामिल है।
