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"ये तो बस खांसी है, अपने आप ठीक हो जाएगी..." बिल्कुल न करें ऐसा सोचने की भूल, जानिए कब बन सकती है गंभीर

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:30 AM (IST)

हर साल 25 सितंबर को World Lung Day मनाया जाता है। ऐसे में, आइए जान लीजिए कि आपकी नॉर्मल लगने ...और पढ़ें

कब सामान्य खांसी बन सकती है गंभीर बीमारी का संकेत (Image Source: AI-Generated)

 कब सामान्य खांसी बन सकती है गंभीर बीमारी का संकेत (Image Source: AI-Generated)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। "अरे, यह तो बस खांसी है। कुछ दिन में अपने आप चली जाएगी।" हम में से ज्यादातर लोग खांसी होने पर यही सोचते हैं। कई बार ऐसा होता भी है। असल में, खांसी हमारे शरीर का एक नेचुरल डिफेंस सिस्टम है, जो सांस की नली से बलगम और कीटाणुओं को बाहर निकालने में मदद करता है। सर्दी-जुकाम के बाद भी खांसी कुछ समय तक रह सकती है, भले ही आप पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहे हों।

हालांकि, मैक्स अस्पताल, शालीमार बाग के चेस्ट डिजीज और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल के अनुसार, हर खांसी को नजरअंदाज करना सही नहीं है। असली सवाल यह नहीं है कि "मुझे कितने दिनों से खांसी आ रही है?", बल्कि यह है कि "क्या मेरी खांसी में कोई सुधार हो रहा है, या इसके साथ कोई और लक्षण भी दिख रहे हैं?"

आइए जानते हैं वे 5 बड़े संकेत, जो बताते हैं कि आपकी सामान्य सी लगने वाली खांसी को तुरंत डॉक्टर को दिखाने की जरूरत है।

खांसी का आपकी उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंचना

आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन से होने वाली खांसी समय के साथ धीरे-धीरे ठीक हो जाती है। हालांकि, अगर आपकी खांसी 3 हफ्ते से ज्यादा समय से बनी हुई है और उसमें कोई सुधार नहीं आ रहा है, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉक्टरों के अनुसार, 3 से 8 हफ्ते तक चलने वाली खांसी को 'सबएक्यूट' और वयस्कों में 8 हफ्ते से ज्यादा चलने वाली खांसी को 'क्रोनिक' खांसी माना जाता है। यह अस्थमा, एसिड रिफ्लक्स, पोस्ट-नेजल ड्रिप, स्मोकिंग, सीओपीडी या ब्रोंकिएक्टेसिस जैसी सांस की बीमारियों का संकेत हो सकता है। इसलिए, सिर्फ कफ सिरप न बदलते रहें, बल्कि खांसी की असली वजह का पता लगाएं।

खांसते समय खून आना

खांसते हुए थूक या बलगम में खून आना डरावना हो सकता है, और इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कई बार बहुत जोर से खांसने के कारण सांस की नली छिल जाती है, जिससे खून की हल्की लकीर आ सकती है। हालांकि, यह इन्फेक्शन, ट्यूबरकुलोसिस, फेफड़ों में खून के थक्के जमने या अन्य गंभीर फेफड़ों की बीमारियों का भी लक्षण हो सकता है।

अगर खून बार-बार आ रहा है, उसकी मात्रा बढ़ रही है या इसके साथ सांस लेने में भी तकलीफ है, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। एटीएस की गाइडलाइंस के अनुसार भी खांसते समय खून आना एक गंभीर चेतावनी है, जिसके लिए तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

सांस फूलना या सीने में दर्द होना

अगर खांसी के साथ आपकी सांस फूल रही है, सीने में जकड़न है, सीटी जैसी आवाज आ रही है या सीने में दर्द हो रहा है, तो सतर्क हो जाएं।

यह अस्थमा या किसी रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के कारण हो सकता है। हालांकि, अचानक सांस लेने में भारी तकलीफ या सीने में तेज दर्द, फेफड़ों या दिल से जुड़ी किसी आपातकालीन समस्या का भी इशारा हो सकता है। अगर आपको अचानक चक्कर आए या आप बहुत अस्वस्थ महसूस करें, तो खांसी के खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतजार न करें; तुरंत अस्पताल जाएं।

बार-बार बुखार आना या बुखार का न उतरना

रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन के दौरान खांसी के साथ बुखार आना आम बात है। लेकिन अगर इन्फेक्शन ठीक होने के बाद भी बुखार न उतरे, वापस आ जाए, या इसके साथ कंपकंपी, भारी कमजोरी और सांस फूलने जैसी दिक्कतें हों, तो यह चिंता का विषय है।

यह निमोनिया का संकेत हो सकता है। भारत में, अगर खांसी लंबे समय तक रहे और उसके साथ लगातार बुखार, वजन कम होना और रात में पसीना आने जैसे लक्षण दिखें, तो डॉक्टर आमतौर पर ट्यूबरकुलोसिस की जांच की सलाह देते हैं। इसलिए, बार-बार खुद से एंटीबायोटिक खाने के बजाय डॉक्टर से अपनी सही जांच करवाएं।

खांसी का ठीक होने के बजाय बिगड़ते जाना

यह सबसे आसानी से पहचाने जाने वाला खतरे का संकेत है। जी हां, अगर आपकी खांसी लगातार बढ़ती जा रही है, आपकी नींद खराब कर रही है, आपके रोजमर्रा के कामों में रुकावट बन रही है, या एक बार ठीक होने के बाद फिर से वापस आ गई है, तो यह न सोचें कि आपको एक नए कफ सिरप की जरूरत है।

खासकर अगर इसके साथ ये लक्षण दिखें, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं:

  • बिना किसी वजह के वजन कम होना
  • रात को सोते समय पसीना आना
  • लगातार थकान या भारी कमजोरी महसूस होना
  • बलगम का बढ़ना
  • सांस फूलना या सीने में दर्द

एटीएस भी सलाह देता है कि अगर खांसी सुधरने के बाद फिर से बिगड़ने लगे या इसके साथ वजन घटने और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण जुड़ जाएं, तो तुरंत मेडिकल चेकअप कराएं।

सबसे जरूरी बात कि हर खांसी का इलाज एंटीबायोटिक नहीं है। खांसी होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको कोई बैक्टीरियल इन्फेक्शन ही है। कई मामलों में खांसी वायरल इन्फेक्शन, अस्थमा, एलर्जी, एसिड रिफ्लक्स या स्मोकिंग के कारण भी होती है।

इन स्थितियों में एंटीबायोटिक दवाएं बिल्कुल काम नहीं करतीं। बिना जरूरत एंटीबायोटिक खाने से साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं और शरीर में 'एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस' का खतरा बढ़ता है।

इसी तरह, बार-बार कफ सिरप पीने से खांसी कुछ समय के लिए दब जरूर जाती है, लेकिन उसकी मूल बीमारी खत्म नहीं होती। याद रखें, खांसी का सही इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि असल में आपको खांसी आ क्यों रही है।

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