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पुरानी हवेलियों और मंदिरों में कदम रखते ही मन क्यों हो जाता है शांत? साइकोलॉजिस्ट ने खोला राज

Published: Sat, 18 Apr 2026 06:00 AM (IST)

आज 18 अप्रैल को मनाए जा रहे World Heritage Day 2026 के मौके पर आइए अपनी ऐतिहासिक धरोहरों को इतिहास की बजाय सेहत के नजरिए से देखते हैं।

हेरिटेज आर्किटेक्चर का साइकोलॉजिकल प्रभाव (Image Source: AI-Generated)

हेरिटेज आर्किटेक्चर का साइकोलॉजिकल प्रभाव (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब आप किसी प्राचीन हवेली या पुराने मंदिर में कदम रखते हैं, तो आपकी सारी थकान और तनाव अचानक से गायब क्यों हो जाता है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि वहां मिलने वाला यह अनोखा सुकून सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ठोस विज्ञान छिपा है। एशियन हॉस्पिटल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका शर्मा के अनुसार, इन ऐतिहासिक इमारतों का आर्किटेक्चर हमारे दिमाग और मन पर सीधा असर डालता है।

Mental health benefits of heritage

(Image Source: AI-Generated)

बनावट जो नर्वस सिस्टम को करती है रिलैक्स

इन पुरानी जगहों की बनावट आज की इमारतों से बिल्कुल अलग और खास होती है। पुरानी हवेलियों और मंदिरों की चौड़ी और मोटी दीवारें, बड़े-बड़े खुले आंगन, प्राकृतिक रोशनी और हवा के आने-जाने की बेहतरीन वेंटिलेशन हमारे दिमाग को शांत करने का काम करती है। ऐसे वातावरण में बाहर का शोर-शराबा काफी कम हो जाता है और अंदर का तापमान भी एकदम संतुलित रहता है। इसी शांत और आरामदायक माहौल के कारण हमारे शरीर का 'नर्वस सिस्टम' रिलैक्स हो जाता है।

संस्कृति से जुड़ाव और भावनात्मक स्थिरता

Architecture Psychology

(Image Source: AI-Generated)

शारीरिक आराम के अलावा, इन इमारतों का हमारे मनोविज्ञान पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐतिहासिक ढांचे और इमारतें हमें हमारी पुरानी जड़ों और समृद्ध संस्कृति से जोड़ते हैं। जब हम ऐसी जगह पर होते हैं, तो हमारे अंदर 'सेंस ऑफ बिलॉन्गिंग' यानी एक अपनेपन और जुड़ाव का अहसास पैदा होता है। यह भावना हमें भावनात्मक रूप से अधिक मजबूत और स्थिर बनाती है।

ध्यान की अवस्था में ले जाता है मंदिरों का माहौल

अगर हम विशेष रूप से मंदिरों की बात करें, तो उनका डिजाइन बेहद वैज्ञानिक तरीके से किया गया होता है। मंदिर की बनावट, खाली जगह और वहां गूंजने वाली ध्वनि का तालमेल कुछ इस तरह का होता है कि इंसान वहां पहुंचते ही खुद-ब-खुद ध्यान की अवस्था में चला जाता है। इस माहौल से हमारी चिंता, तनाव और दिन भर की मानसिक थकावट तुरंत छूमंतर हो जाती है।

Psychology of Heritage

(Image Source: AI-Generated)

मेंटल हेल्थ के लिए 'नेचुरल हीलिंग स्पेस'

आज के समय में, जहां जिंदगी बहुत तेजी से भाग रही है और हर कोई तनाव भरे रूटीन से गुजर रहा है, ये शांत और ऐतिहासिक स्थान हमारे लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैं। डॉ. शर्मा के मुताबिक, पुरानी हवेलियां और मंदिर हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक 'नेचुरल हीलिंग स्पेस' की तरह काम करते हैं, जहां जाकर हम खुद को फिर से तरोताजा कर सकते हैं।

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