विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'बिस्तर से काम' और दिनभर AC की हवा… कहीं ये आदतें ही तो नहीं कर रहीं आपके फेफड़े कमजोर?

By Dr. Sunny KalraEdited By: Swati Sharma
Published: Thu, 24 Sep 2026 09:21 AM (IST)

घंटों बैठकर काम करना और एसी में रहना सीधे फेफड़ों को कमजोर नहीं करता, बल्कि फिजिकल इनएक्टिविटी से फिटनेस घटती है, जिससे सांस फूलने लगती है।

क्या घंटों बैठे रहने से कमजोर हो रहे हैं फेफड़े? (Picture Courtesy: Freepik)

क्या घंटों बैठे रहने से कमजोर हो रहे हैं फेफड़े? (Picture Courtesy: Freepik)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल की लाइफस्टाइल में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, बिस्तर से लैपटॉप चलाना और दिनभर एसी के बंद कमरों में रहना बेहद आम हो गया है। ये आदतें लोगों की जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुकी हैं, जिनकी तरफ आमतौर पर ध्यान भी नहीं जाता। 

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि इन आदतों की वजह से फेफड़े कमजोर हो रहे हैं, लेकिन क्या सच में ऐसा है? आइए जानें हमारी लाइफस्टाइल हमारे फेफड़ों और सांस लेने की क्षमता को कैसे प्रभावित करते हैं। 

क्या फेफड़े सच में कमजोर हो जाते हैं?

सच ये है कि खराब लाइफस्टाइल सीधेतौर पर फेफड़ों को कमजोर नहीं बनाती। फेफड़े अपना काम लगातार करते रहते हैं। हालांकि, सही तरीके से सांस लेने के लिए डायाफ्राम, सीने की मांसपेशियों और दिल का मजबूत होना जरूरी है।  

जब आप लंबे समय तक फिजिकली इनएक्टिव रहते हैं, तो शरीर का फिटनेस लेवल कम होने लगता है। इसके कारण सीढ़ियां चढ़ना, तेज चलना या राशन का सामान उठाने जैसे छोटे-छोटे कामों में भी सांस फूलने लगती है और जल्दी थकान महसूस होने लगती है। 

ये समस्या ज्यादा वजन वाले लोगों, बुजुर्गों और दिल या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है। 

एसी की हवा का फेफड़ों पर असर

एसी की हवा भी सीधेतौर पर फेफड़ों को कमजोर नहीं करती। असली दिक्कत है कि एसी में रहने से लोग बाहर निकलकर फिजिकल एक्टिविटीज कम करते हैं। इसके अलावा, अगर एसी की ठीक से सफाई न हो, फिल्टर गंदे हों या कमरे में धूल, फफूंद और प्रदूषण हो, तो सांस की नली में जलन हो सकती है। 

जो लोग पहले से ही अस्थमा या एलर्जी के मरीज हैं, उन्हें खांसी, गले में खराश और नाक बंद होने जैसी दिक्कतें झेलनी पड़ सकती हैं। एसी की हवा भी बहुत ड्राई होती है, जिसके कारण भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।  

इनएक्टिव लाइफस्टाइल का असर

जब आप ज्यादातर समय लेटकर या बैठकर बिताते हैं, तो मांसपेशियों की ताकत और स्टैमिना कम होने लगता है। जब थोड़ा काम करने पर सांस फूलती है, तो लोग डरकर हिलना-डुलना और कम कर देते हैं, जिसे फिटनेस और कम हो जाती है और सांस फूलने की समस्या बढ़ने लगती है। 

बेहतर स्वास्थ्य के लिए आसान उपाय

जो लोग बिस्तर से काम करते हैं या घंटों बैठते हैं, वे लगातार एक ही स्थिति में न रहें और बीच-बीच में ब्रेक लें। इसके अलावा, उम्र और सेहत के हिसाब से वॉक करना, साइकिल चलाना, स्विमिंग, डांसिंग जैसी एक्टिविटीज भी स्टैमिना बढ़ाती हैं। साथ ही, एसी के फिल्टर समय-समय पर साफ करें, कमरें में ताजी हवा आने दें और धूल व धुएं से बचें।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

सांस फूलने की वजह सिर्फ आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी हो, ऐसा जरूरी नहीं। अगर आपको लगातार खांसी, सीने में जकड़न, सांस में सीटी जैसी आवाज या बहुत कम काम करने पर भी सांस फूलने लगे, तो डॉक्टर से तुरंत जांच करवाना जरूरी है। ये अस्थमा, सीओपीडी, दिल की बीमारी और एनीमिया का संकेत भी हो सकते हैं। 

(डॉ. सनी कालरा, डायरेक्टर एंड यूनिट हेड- प्लमोनोलॉजी, मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम)