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त्योहारों की आहट से ही क्यों खुश हो जाता है मन, इसके पीछे सिर्फ रौनक नहीं दिमाग का भी है बड़ा रोल

By Dr.Vinit BangaEdited By: Shweta Chauhan
Published: Sun, 11 Oct 2026 01:40 PM (IST)

त्योहारों का मौसम मन में खुशी और उत्साह भर जाता है, जिसका कारण डोपामिन, सामाजिक मेलजोल, भावनात्मक यादें है।

फेस्टिव सीजन आते ही हमारा मन खुश होने लगता है (Image Source: AI Generated)

फेस्टिव सीजन आते ही हमारा मन खुश होने लगता है (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। त्योहारों का सीजन आते ही सबका मन खुशी और उत्साह से भर जाता है, पर कभी आपने सोचा है कि हमारा दिमाग फेस्टिवल के समय में इतना खुश क्यों रहता है? दरअसल, हमारे दिमाग, भावनाओं और सामाजिक संपर्कों के बीच बहुत गहरा रिश्ता होता है, लेकिन हम इस बात पर गौर ही नहीं करते। आइए इसके बारे में विस्तार से बात करते हैं कि क्यों हम फेस्टिव सीजन आते ही हमारा मन खुश होने लगता है। 

डोपमिन 

त्योहारों के समय शॉपिंग करने, घर सजाने, गिफ्ट का लेन-देन और मौज-मस्ती हमारे दिमाग को खुशी का सिग्नल देती है। ये सारी ही एक्टिविटी दिमाग में एक रिवॉर्ड मैकेनिज्म को एक्टिव कर देती हैं, जिससे डोपमिन का लेवल बढ़ने लगता है। फिर हम जानते ही हैं कि ये हैप्पी हॉर्मोन है जो हमें अंदर से खुशी महसूर कराता है। 

सामाजिक संपर्क 

यह वो समय होता है जब हम परिवार, दोस्तों और खास लोगों से मिलते हैं, जिनसे हमें प्यार, सपोर्ट और सराहना की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि हमारा स्ट्रेस लेवल कम होने के साथ ही इमोशनल हेल्थ भी सुधरने लगती है। लोगों के साथ यही अपनेपन की भावना हमें उत्साह और खुशी से भर देती है।  

इमोशनल मेमोरी 

फेस्टिव गाने, आसपास की महक, सजावट, पारंपरिक खानपान और बाकी चीजें जो हमारे बचपन से जुड़ी हुई हैं, एकदम से ताजा हो जाती हैं। हमें अपने पुराने मौज-मस्ती वाले दिन याद आने लगते हैं। 

रूटीन से ब्रेक 

एक वजह यह भी है कि त्योहारों का सीजन हमें रोजाना के वही एक जैसे रूटीन से ब्रेक देता है, जिससे हम शारीरिक और मानसिक रूप से आराम कर पाते हैं। यह बदलाव भले ही थोड़े समय का हो, लेकिन स्ट्रेस को कम कर हमें खुश रखने में मदद करता है। 

सभी को नहीं होता खुशी का एहसास 

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि त्योहारों के समय में इस खुशी का एहसास सभी को नहीं होता और न ही सबका लेवल सेम होता है। आर्थिक तंगी, अकेलापन और बड़ी उम्मीदें हमें कई बार इन खूबसूरत पलों को जीने नहीं देती। इसे हम हैप्पीनेस फील करने के बजाय उल्टा तनाव और दु:ख से घिर जाते हैं।  

ऐसे में हमें समझने की जरूरत है कि हमारी खुशी केवल इन त्योहारों तक सीमित नहीं है, हर समय खुश रहना अपनी इमोशनल स्टेट का ख्याल रखना भी है। 

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(डॉ. विनीत बंगा, फोर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में डायरेक्टर हैं।)