रोज सुबह थकान और आलस से होती है शुरुआत? नींद पूरी होने के बाद भी हो सकती हैं ये वजहें
मौसम में हो रहे बदलाव और सामान्य संक्रमण के चलते इन दिनों थोड़ी-बहुत सुस्ती या ऊर्जा की कमी महसूस होना ...और पढ़ें

पर्याप्त नींद के बाद भी सुबह क्यों रहती है थकान और आलस? (Picture Credit- AI Generated)
HighLights
खराब नींद की गुणवत्ता और अनियमित दिनचर्या थकान का कारण
पोषण की कमी, पानी की कमी और शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख वजहें
तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है आवश्यक
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह नींद से जागने के बाद बिस्तर छोड़ने का मन नहीं करता। बार-बार अलार्म घड़ी बंद कर थोड़ा और सो लेना चाहते हैं। पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सिर भारी रहता है या उनींदापन व आलस्य घेरे रहता है, तो सामान्य नहीं है।
सात-आठ घंटे की नींद के बाद भी ताजगी महसूस नहीं होती है तो आपको कुछ आदतों को लेकर सतर्क होना होगा, जैसे लंबे समय तक बैठे रहना, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, शारीरिक गतिविधि से बचना, तनाव से निपटने के लिए धूमपान, अल्कोहल का सेवन आदि। ये कुछ ऐसी आदतें हैं जो आज की जीवनशैली का ऐसा हिस्सा बन गयी हैं कि आपको इनसे दूर रहना कठिन लग सकता है, पर यही वे कारण हैं जो थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन व तनाव में बढ़ोत्तरी या उचित ध्यान न देने पर अक्सर जीवनशैली से जुड़ी गंभीर बीमारियों के रूप में सामने आ रही हैं।
कैसी है आपकी नींद
आठ घंटे की नींद पूरी करने के बाद भी जरूरी नहीं कि आप सुबह उठकर अच्छा, तरोताजा महसूस करें। ऐसे में शोरगुल वाले माहौल, असुविधाजनक बिस्तर, सोने का समय अनियमित रहना, सोने से पहले कैफीन व स्क्रीन टाइम और कसरत करने जैसी आदतें आपकी नींद में बाधक बन सकती हैं। इनसे दूरी बनाएं ताकि नींद पूरी हो और गुणवत्तापूर्ण भी हो।
शरीर में पानी की कमी तो नहीं
यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आप जितना तरल पदार्थ ग्रहण करते हैं उससे अधिक खो देते हैं। रात के समय शरीर में पानी की कमी हो सकती है। पसीना आना, यूरिन आना, गर्मी या बीमारी शरीर के जल स्तर को तेजी से कम कर सकती है। बहुत हल्का पीला या साफ यूरिन है तो यह संकेत है कि आप पर्याप्त पानी का सेवन कर रहे हैं।
पोषण की कमी
अगर आप अक्सर अपना पसंदीदा खाना ही खाना चाहते हैं तो इसमें एक जोखिम हो सकता है। यह है संतुलित आहार की कमी। शरीर को पूरा पोषण न मिलने से भी दिन भर उबासी या ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है। यह अक्सर बिटामिन बी 12, विटामिन डी की कमी भी हो सकती है, जिससे आपको थकान या कमजोरी लग सकती है।
सीमित शारीरिक सक्रियता
शारीरिक निष्क्रियता व नींद का गहरा रिश्ता है। यदि आप कसरत से दूरी बरतते हैं या कम शारीरिक गतिविधि करते हैं तो रात की नींद की गुणवत्ता भी कम होगी और दिन भर सुस्ती बनी रह सकती है। प्रयास करें कि रोजाना 150 मिनट व्यायाम करें। योग व ध्यान को भी इसमें शामिल करें।
तनाव का स्वस्थ प्रबंधन
तनाव से नींद भी कम आती है या नहीं के बराबर होती है। ऐसे में आपका प्रयास होना चाहिए कि तनाव का स्वस्थ प्रबंधन करें। जैसे, सुंबह उइकर वाक करें, संगीत सुनें, पसंदीदा कार्यों में भाग लें। यदि तनाव कम न हो तो विशेषज्ञ से मिलकर उनके बताए हुए दिशानिर्देशों का पालन करें।
थकान को न करें अनदेखा
डॉ. हर्षल साल्वे, (जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ, एम्स, नई दिल्ली), कहती हैं कि थकान या ऊर्जा में कमी ऐसी चीज है जो अक्सर अनदेखा हो जाती हैं। जीवनशैली ऐसी हो गयी है कि जब तक कोई विशेष समस्या या बीमारी नहीं होती लोग गंभीर नहीं होते। जबकि यह बीमार होने का सबसे बड़ा कारण है। देर रात भोजन करना, भोजन में पोषण का अभाव, नींद पूरी न होना, शारीरिक सक्रियता का अभाव ये ऐसी चीजें हैं, जो एकदूसरे से जुड़ी हुई हैं।
इनमें से किसी की भी अनदेखी आपकी ऊर्जा कम करती है, तनाव बढ़ाता है और जब ध्यान न दें तो आपको बीमारियों से ग्रस्त कर सकता है। थकान कोई बीमारी नहीं एक संकेत है जो बताता है कि आपकी दिनचर्या खराब हो गयी है और उसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।
इन सलाह पर अमल आवश्यक
- रात को बिस्तर पर जाने के एक घंटा पूर्व व जागने के एक घंटे बाद मोबाइल या स्क्रीन का प्रयोग।
- तनाव दूर करने के लिए पसंदीदा कार्य करें या हाबी अपनाएं।
- शारीरिक सक्रियता के साथ कसरत व योग से नींद अच्छी होगी।
- सिर भारी रहना या थकान इंडोक्राइन बीमारियों जैसे थायरायड, मधुमेह के कारण भी संभव। जोखिम है तो जांच कराएं।
इन बातों का भी रहे ध्यान
- एनिमिया, इससे शरीर सभी अंगों तक आक्सीजन पहुंचाने की रक्त की क्षमता कम हो सकती है।
- आटोइम्यून रोग, जो मेटाबोलिज्म व नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है।
- गुर्दे ठीक से काम न करने पर रक्त में विषाक्त पदार्थों के जमाव के कारण थकान हो सकती है।
- महिलाओं को रजोनिवृत्ति के दौरान भी कमजोरी या थकान का अनुभव हो सकता है।
