ब्रेन स्ट्रोक आने पर हर एक मिनट है कीमती! इलाज में देरी बन सकती है विकलांगता या मौत की वजह
स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें इलाज में देरी विकलांगता या मौत का कारण बन सकती है।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर न करें ये गलती (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर एक मिनट बेहद कीमती होता है। इलाज में एक मिनट की देरी भी विकलांगता या मौत की वजह बन सकती है। इसलिए जब भी किसी व्यक्ति में स्ट्रोर के लक्षण दिखाई देते हैं, तो सबसे बड़ी गलती लोग ये करते हैं कि वे मेडिकल हेल्प लेने में देरी कर देते हैं। वो लक्षणों को मामूली परेशानी समझकर खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतजार करने लगते हैं।
इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी परमानेंट ब्रेन डैमेज, विकलांगता या मौत का खतरा काफी बढ़ा देती है। ऐसे में स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना और तुरंत एक्शन लेना किसी की जान बचा सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक होता क्या है?
स्ट्रोक तब होता है जब खून की नली में रुकावट आने या उसके फटने की वजह से दिमाग के किसी हिस्से में ब्लड सप्लाई रुक जाता है। ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी के कारण ब्रेन सेल्स तेजी से मरने लगते हैं।
स्ट्रोक के लक्षण कुछ ऐसे हो सकते हैं-
- चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन
- बोलने में या बात समझने में परेशानी होना
- अचानक नजर से जुड़ी समस्याएं होना
- बैलेंस न बना पाना
- बिना किसी कारण के तेज सिरदर्द होना
इन लक्षणों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। भले ही वे कुछ मिनटों बाद खुद ही गायब क्यों न हो जाएं, लेकिन फिर भी डॉक्टर के पास तुरंत जाना जरूरी है।
30 मिनट की भूल भी हो सकती है घातक
ये भूल अक्सर तब होती है, जब परिवार के सदस्य या मरीज खुद ये मान लेता है कि लक्षण थकान, लो ब्लड प्रेशर, कमजोरी या नींद की कमी के कारण हैं। कुछ लोग किसी रिश्तेदार के आने का इंतजार करते हैं, घरेलू नुस्खे आजमाते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां ले लेते हैं।
कुछ लोग अस्पताल जाने में इसलिए भी देरी करते हैं, क्योंकि मरीज में कुछ मिनटों बाद लक्षण गायब हो जाते हैं। हालांकि, जो लक्षण जल्दी गायब हो जाते हैं, वे भी ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक का संकेत हो सकते हैं, जिसके लिए तुरंत मेडिकल जांच करवाना जरूरी है।
शुरुआती इलाज क्यों है जरूरी?
स्ट्रोक के मामले में शुरुआती इलाज सबसे जरूरी है। कुछ मरीजों को क्लॉट-डिसॉल्विंग दवा की जरूरत होती है, जो आमतौर पर लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के अंदर दी जाती है। वहीं, कुछ मरीजों को लंबे ट्रीटमेंट और निगरानी की जरूरत होती है। ऐसे में मरीजों को जितनी जल्दी उनकी कंडीशन के हिसाब से इलाज मिलेगा, उनके बचने की संभावना उतनी बेहतर होगी।
स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें और क्या नहीं?
अगर स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को कॉल करें और समय नोट कर लें जब लक्षण शुरू हुए थे या जब मरीज को आखिरी बार बिल्कुल ठीक देखा गया था।
साथ ही, इस दौरान डॉक्टर के निर्देश के बिना मरीज को खाना, पानी या एस्पिरिन वाली कोई भी दवा न दें। लक्षणों के खुद ठीक होने का इंतजार बिल्कुल न करें।
(डॉ. विपुल गुप्ता, डायरेक्टर, न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी, सर एच.एन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई)
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