प्रेग्नेंसी में कमर दर्द को न करें नजरअंदाज, जानें कब फिजियोथेरेपी सबसे ज्यादा आती है काम
गर्भावस्था में कमर दर्द होना आम बात है, जिससे बिना दवा के फिजियोथेरेपी की मदद से छुटकारा पाया जा सकता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द में फिजियोथेरेपी की भूमिका (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं, इनमें कमर दर्द सबसे आम समस्या है। जैसे-जैसे भ्रूण आकार लेने लगता है, कमर के निचले हिस्से में वजन और दबाव दोनों बढ़ जाता है। इससे पोश्चर खराब होने के साथ ही मांसपेशियों, जोड़ों और लीगामेंट्स में तनाव भी बढ़ जाता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि हॉर्मोनल बदलाव लीगामेंट्स को और लचीला बना देते हैं, जिससे पेल्विस और स्पाइन की स्थिरता कम हो जाती है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द के लिए कौन से कारण जिम्मेदार होते हैं और फिजियोथेरेपी की मदद से इसे कैसे कम किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी में कमर दर्द के कारण
जैसा कि हमने बताया कि प्रेग्नेंसी में कमर दर्द का एक कारण तो कमर के निचले हिस्से में वजन और दबाव का बढ़ना है। वहीं, इसके लिए कई और कारक भी जिम्मेदार हैं। इनमें किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी न करना, लंबे समय तक एक जगह बैठे रहना, सोने की खराब पोजिशन और मांसपेशियों में कमजोरी भी कमर दर्द का कारण बनती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द में फिजियोथेरेपी की भूमिका
ऐसे में फिजियोथेरेपी अहम भूमिका निभा सकती है और प्रेग्नेंसी से जुड़े कमर दर्द को कम कर सकती है। इसके लिए सबसे पहले एक फिजियोथेरेपिस्ट महिला के पोश्चर, मूवमेंट, मांसपेशियों की मजबूती और दर्द की प्रकृति की जांच करता है।
इसके बाद वह महिला की जरूरत और प्रेग्नेंसी की स्टेज के हिसाब से एक्सरसाइज प्रोग्राम की सलाह देता है। इसका लक्ष्य सिर्फ दर्द कम करना नहीं होता, बल्कि पोश्चर ठीक करना, मजबूती देना, स्थिरता बढ़ाना और प्रेग्नेंसी में सहजता देना भी होता है। इनमें कई एक्सरसाइज शामिल हैं जिनसे कमर पर दबाव कम करने में मदद मिलती है:
पेल्विक एक्सरसाइज
स्ट्रेचिंग
मोबिलिटी एक्सरसाइज
पेट के निचले हिस्से से जुड़ी एक्सरसाइज
हिप और पेल्विक फ्लोर मसल्स की मजबूती से जुड़ी एक्सरसाइज
उठने-बैठने की सही सलाह अहम
फिजियोथेरेपिस्ट महिलाओं को इस दौरान ठीक से बैठने, खड़े होने, झुकने, समान उठाने और बिस्तर से उठने के तरीके भी सिखा सकते हैं। ये छोटे-मोटे बदलाव कमर के निचले हिस्से पर दबाव कम करने में मदद करते हैं।
कई मामलों में मैनुअल थेरेपी भी इस्तेमाल की जाती है। प्रेग्नेंसी से जुड़ी ये तकनीक मांसपेशियों में अकड़न को कम करने के साथ जोड़ों की मूवमेंट में भी सुधार करते हैं। हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि ट्रीटमेंट हमेशा एक प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट से लिया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन एक्सरसाइज या तकनीक से सख्त परहेज किया जाना चाहिए, जिससे प्रेग्नेंसी में जोखिम हो सकता है।
समय के साथ ट्रीटमेंट में होता रहता है बदलाव
बता दें कि फिजियोथेरेपी से महिलाओं को खुद को एक्टिव रखने में मदद भी मदद मिलती है। प्रेग्नेंसी के महीने जैसे-जैसे बढ़ते रहते हैं, उसी हिसाब से ट्रीटमेंट में भी बदलाव होता रहता है। फिजियोथेरेपिस्ट महिलाओं को इन 9 महीनों के दौरान सोने और आराम करने की सही सलाह देने के साथ ही कंप्यूटर पर काम करने के तरीके के बारे में भी बता सकते हैं।
कब कमर दर्द एक खतरा?
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रेग्नेंसी में होने वाले हर टाइप के कमर दर्द को एक रूटीन दर्द की तरह नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर या अचानक होने वाला दर्द, इसके साथ ही वजाइनल ब्लीडिंग, बुखार, यूरिन के दौरान दर्द, पैरों और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
दवा की तुलना में फिजियोथेरेपी प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द से राहत पाने का एक बहतरीन और असरदार विकल्प हो सकता है। इस तरह सही जांच और डॉक्टरों की देखरेख के साथ, प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द को कम किया जा सकता है।
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(डॉ. इंद्रमणि उपाध्याय, सेंटर फॉर हिप एंड नी केयर गाजियाबाद में फिजियोथेरेपी एचओडी हैं)
