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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बच्चों ही नहीं बड़ों में भी नजर आ सकती है सोशल विड्रॉअल की समस्या, विस्तार से जानें इसकी वजहें, लक्षण, बचाव एवं उपचार के बारे में

By Priyanka SinghEdited By:
Published: Fri, 18 Feb 2022 07:00 AM (IST)

अकसर उदासी महसूस करना अपने बारे में नकारात्मक बातें सोचना और बोलना अनियमित दिनचर्या ये सारी चीज़ें एक समस्या की ...और पढ़ें

पार्क में अकेली बैठी हुई छोटी बच्ची
पार्क में अकेली बैठी हुई छोटी बच्ची

कुछ लोग अकसर दूसरों से मिलने-जुलने से कतराते हैं और अकेले रहना पसंद करते हैं। क्या यह किसी मनोवैज्ञानिक समस्या का लक्षण है?

सोशल विड्रॉअल समस्या

सोशल विड्रॉअल नामक मनोवैज्ञानिक समस्या का लक्षण हो सकता है। कई बार स्कूल जाने वाले बच्चों भी लोगों से मिलने-जुलने और बातचीत करने से कतराते हैं। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए तो इसकी वजह से बाद में व्यक्ति को डिप्रेशन भी हो सकता है।

प्रमुख लक्षण

- अकसर उदासी महसूस करना

- अपने बारे में नकारात्मक बातें सोचना और बोलना

- अनियमित दिनचर्या

- एक्सरसाइज और वॉक से बचने की कोशिश करना

- सेहत के प्रति लापरवाही

- एल्कोहॉल और सिगरेट की लत आदि।

प्रमुख वजह

अति संरक्षण भरे माहौल में परवरिश, अतिशय शर्मिला व्यक्तित्व, सही ढंग से सामाजिक विकास न होना, सोशल रिजेक्शन का भय या कोई बुरा अनुभव आदि।

बचाव एवं उपचार

- बच्चों की परवरिश के दौरान पेरेंट्स शुरू से ही इस बात पर ध्यान दें कि वे सही सामाजिक व्यवहार अपनाएं। नए लोगों से मिलने-जुलने और बातचीत करने में उन्हें कोई झिझक महसूस न हो।

- अगर किसी वयस्क व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व में ऐसी समस्या से जुड़े लक्षण नजर आएं तो सचेत तरीकों से उन्हें दूर करने के लिए वह कुछ नए दोस्त बनाएं। सोशल गैदरिंग में शामिल हों इससे जो माहौल मिलता है वो उनके अंदर कॉन्फिडेंस जगाने का काम करता है।

- अपनी रूचि से जुड़े कार्यों में अकेले व्यस्त रहने के बजाय आसपास के लोगों को भी शामिल करें। नए आइडियाज़ के साथ ही बातचीत करने के अवसर भी मिलते हैं।

- परिवार के सदस्यों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसे लोगों से बातचीत करके उनका अकेलापन दूर करें। बच्चों के साथ ऐसी प्रॉब्लम दिख रही है तो उन्हें फोन में बिजी रखने की जगह खुद उनसे बातचीत करें।

- अगर इन प्रयासों के बाद पीड़ित व्यक्ति की मनोदशा में सुधार न आए तो एक्सपर्ट से सलाह देनी चाहिए।

(डॉ. ज्योति कपूर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, पारस हॉस्पिटल, गुरुग्राम से बातचीत पर आधारित)