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स्क्रीन टाइम और खराब पोस्चर बन रहा बच्चों की रीढ़ का दुश्मन, सिखाएं डिजिटल डिटॉक्स से जुड़ी ये आदतें

Published: Mon, 28 Sep 2026 07:27 AM (IST)

स्क्रीन टाइम और खराब बैठने की मुद्रा बच्चों व किशोरों में रीढ़, गर्दन और पीठ की समस्याओं का कारण बन रही है।

डिवाइस के ज्यादा प्रयोग का बच्चों पर पड़ रहा असर (Image Source: AI Generated)

डिवाइस के ज्यादा प्रयोग का बच्चों पर पड़ रहा असर (Image Source: AI Generated)

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संक्षेप में पढ़ें

प्रेट्र,नई दिल्ली। आजकल बच्चों का काफी समय स्क्रीनटाइम में व्यतीत होता है। ऐसे में फिजियोथेरेपी विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक स्क्रीन उपयोग, लंबे समय तक बैठना और बैठने की खराब मुद्रा बच्चों और किशोरों में पीठ, गर्दन और अन्य रीढ़ की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। उन्होंने नियमित रूप से ब्रेक लेने, हिलने-ढुलने, एर्गोनोमिक के बारे में जानकारी और निवारक फिजियोथेरेपी की आवश्यकता पर जोर दिया। 

डब्ल्यूपीएपी सम्मेलन में उभरती चुनौतियों पर चर्चा

भारतीय फिजियोथेरेपिस्ट्स संघ (आईएपी) के विशेषज्ञों ने यह चिंता विश्व फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक (डब्ल्यूपीएपी) क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 में व्यक्त की, जो दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में भारत और 32 देशों के 10,000 से अधिक फिजियोथेरेपी पेशेवर और प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और निवारक देखभाल में उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। 

सम्मेलन में जताई गई चिंता

आईएपी के अध्यक्ष और डब्ल्यूपीएपी क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 के आयोजन के अध्यक्ष डा. संजीव के झा ने कहा कि चिंता केवल इस बात की नहीं है कि एक बच्चा स्क्रीन पर कितने घंटे बिताता है, बल्कि उस दौरान शरीर के साथ क्या होता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बैठना, स्थिर मुद्राएं, कम गतिविधि और मोबाइल उपकरणों की ओर बार-बार झुकना गर्दन और पीठ पर तनाव डाल सकता है। 

बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि स्क्रीन का इस्तेमाल करते समय हिलना-डुलना, सही पोस्चर का ध्यान रखना और नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करना भी जरूरी है। हाल के वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी बच्चों और किशोरों में गतिहीन व्यवहार और रीढ़ के दर्द के बीच संबंध को इंगित किया है। 

हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि स्क्रीन टाइम को पीठ के दर्द का एकमात्र या सिद्ध कारण नहीं माना जाना चाहिए। गर्दन के दर्द के लिए भी यह चिंता बढ़ सकती है। एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा विश्लेषण ने बच्चों और किशोरों में गतिहीन व्यवहार व गर्दन के दर्द के बीच हल्के संबंध को पाया। 

बच्चों को सिखानी होगी स्वस्थ स्क्रीन आदतें

उन्होंने कहा, हमें स्वस्थ स्क्रीन आदतें सिखाने की आवश्यकता है। ऐसे में स्थिति बदलना, नियमित गतिविधि ब्रेक लेना, उचित बैठने की व्यवस्था करना और बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय रखना आश्यक है। निवारक फिजियोथेरेपी और गतिविधि शिक्षा इस दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।" 

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्कूल और माता-पिता बच्चों को पढ़ाई और स्क्रीन सत्रों के दौरान ब्रेक लेने, उम्र के अनुसार शारीरिक गतिविधि, एर्गोनोमिक सीटिंग और बैठने की मुद्रा के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करें। साथ ही गर्दन झुकाकर लंबे समय तक स्मार्टफोन के उपयोग से बचें। उन्होंने सलाह दी कि बार-बार दर्द होने या बने रहने पर शीघ्र मूल्यांकन किया जाए।

डिवाइस के ज्यादा प्रयोग का बच्चों पर पड़ रहा असर 

विशेषज्ञों ने कहा कि डिवाइस का इस्तेमाल करते समय शरीर की मुद्रा (पोस्चर) भी अहम हो सकती है। पांच से 12 साल के बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि स्मार्टफोन के इस्तेमाल से सिर और गर्दन के झुकाव और सिर-गर्दन की मुद्रा (क्रैनियोसर्विकल पोस्चर) में बदलाव आता है, खासकर बैठकर इस्तेमाल करते समय। 

डब्ल्यूपीएपी 2026 की आयोजन सचिव डॉ. रुचि वार्ष्णेय ने कहा, हम बच्चों की एक ऐसी पीढ़ी देख रहे हैं जो स्क्रीन में मानसिक रूप से व्यस्त रहते हुए लंबे समय तक शारीरिक रूप से स्थिर रह सकती है। इसका समाधान सिर्फ बच्चों से टेक्नोलॉजी छीनना नहीं है।

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