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उम्र के साथ कमजोर नहीं, बल्कि और 'स्मार्ट' होता है आपका दिमाग! इस तरीके से बनाता है खुद को तेज

Published: Thu, 30 Apr 2026 08:04 AM (IST)

एक रिसर्च में दावा किया गया है कि उम्र बढ़ने के साथ हमारा दिमाग कमजोर नहीं, बल्कि ज्यादा व्यवस्थित और कुशल होता है।

उम्र के साथ कैसे और तेज होती है मेमोरी? (Picture Courtesy: Freepik)

उम्र के साथ कैसे और तेज होती है मेमोरी? (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

प्रेट्र, नई दिल्ली। अक्सर यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर और दिमाग दोनों थकने लगते हैं, लेकिन विज्ञान की दुनिया से एक बेहद दिलचस्प और सकारात्मक खबर आई है। हाल ही में हुए एक शोध ने इस धारणा को चुनौती दी है कि समय के साथ दिमाग केवल कमजोर होता है। 

शोध के अनुसार, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे दिमाग का 'याददाश्त केंद्र' यानी हिप्पोकैंपस पहले से कहीं ज्यादा ऑर्गेनाइज्ड और एफिशिएंट हो जाता है।

क्या है हिप्पोकैंपस और इसका काम?

हिप्पोकैंपस दिमाग का वह अहम हिस्सा है जिसे यादों का केंद्र कहा जाता है। इसका मुख्य फंक्शन शॉर्ट टर्म मेमोरी को लॉन्ग टर्म मेमोरी में बदलना है। यही वह हिस्सा है जो हमें नई जगह पहचानने, अनुभवों को सहेजने और उनसे सीखने में मदद करता है। इसके बिना हमारे लिए किसी भी अनुभव को याद रखना नामुमकिन होगा।

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(Picture Courtesy: Freepik)

शोध में क्या आया सामने?

नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में पब्लिश इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने चूहों के दिमाग के विकास का तीन चरणों में अध्ययन किया- जन्म के तुरंत बाद, किशोरावस्था और वयस्क होने पर। शोधकर्ताओं ने पाया कि हिप्पोकैंपस में मौजूद न्यूरॉन नेटवर्क, जिन्हें 'सीए 3' पिरामिडल न्यूरॉन्स कहा जाता है, समय के साथ एक खास बदलाव से गुजरते हैं।

शुरुआत में, ये नेटवर्क न्यूरॉन कनेक्शन से पूरी तरह भरे होते हैं और देखने में काफी उलझे हुए या रैंडम लगते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ये नेटवर्क कम घने होते जाते हैं।

प्रूनिंग मॉडल- कम न्यूरॉन्स में ज्यादा कुशलता

मुख्य शोधकर्ता पीटर जोनास के अनुसार, आमतौर पर लोग उम्मीद करते हैं कि विकास के साथ नेटवर्क ज्यादा घना और बड़ा होगा। लेकिन यहां बिल्कुल उल्टा देखने को मिला। इसे प्रूनिंग मॉडल कहा जाता है।

जिस तरह एक माली किसी पौधे को सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए उसकी फालतू टहनियों की काट-छांट करता है, ठीक उसी तरह हमारा दिमाग भी बढ़ती उम्र के साथ अपने न्यूरल कनेक्शन की काट-छांट करता है। यह प्रक्रिया नेटवर्क को कम घना लेकिन ज्यादा व्यवस्थित बनाती है। इसका नतीजा यह होता है कि दिमाग सूचनाओं को ज्यादा बेहतर तरीके से प्रोसेस करने लगता है।

प्लास्टिसिटी से यादें होती हैं मजबूत

यह पूरा नेटवर्क प्लास्टिसिटी नाम की एक खास प्रक्रिया के जरिए काम करता है। इसी प्रक्रिया के कारण हमारा दिमाग यादों को सहेजने और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस याद करने में सक्षम हो पाता है। कुल मिलाकर बात यह है कि वयस्क दिमाग का नेटवर्क भले ही जन्म के समय जितना घना न हो, लेकिन वह सूचनाओं को व्यवस्थित करने में कहीं ज्यादा स्मार्ट और तेज होता है।