भारतीय पुरुषों में देरी से क्यों चलता है प्रोस्टेट कैंसर का पता? 4 प्वाइंट्स में डॉक्टर ने बताई सच्चाई
भारत में पुरुषों के बीच प्रोस्टेट कैंसर एक ऐसा 'साइलेंट किलर' बनता जा रहा है, जो शुरुआत में बिना किसी बड़े लक्षण के शरीर के भीतर पनपता रहता है।

भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के देरी से पता चलने के ये हैं 4 बड़े कारण (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे एक 'साइलेंट किलर' का रूप लेता जा रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारतीय पुरुषों में इस बीमारी का पता अक्सर बहुत देरी से चलता है, जब तक कि यह गंभीर रूप न ले ले।
नई दिल्ली स्थित H.O.P.E ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) डॉ. अमीश वोरा ने समझाया है कि आखिर हमारे देश में इस जानलेवा बीमारी की पहचान में इतनी देरी क्यों होती है। आइए जानते हैं इसके मुख्य कारणों के बारे में।

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जागरूकता की कमी और लक्षणों की अनदेखी
प्रोस्टेट कैंसर के देरी से पकड़े जाने का सबसे बड़ा कारण जागरूकता का अभाव है। अक्सर पुरुष शुरुआती लक्षणों को महज 'बढ़ती उम्र का असर' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉ. वोरा के अनुसार, लोग इन शुरुआती संकेतों को गंभीरता से नहीं लेते:
- बार-बार पेशाब आना
- पेशाब करते समय जलन महसूस होना
- रात के समय टॉयलेट के लिए कई बार उठना
- पेशाब का रुक-रुक कर आना
शर्म और हिचकिचाहट
हमारे समाज में आज भी पुरुष स्वास्थ्य से जुड़ी निजी समस्याओं पर खुलकर बात करने से बचते हैं। प्रोस्टेट जैसी बीमारी के बारे में डॉक्टर से बात करने में उन्हें संकोच और शर्म महसूस होती है। इसी हिचकिचाहट के कारण वे अपनी तकलीफ छुपाते रहते हैं और सही समय पर जांच नहीं हो पाती।
दूर-दराज के इलाकों में सुविधाओं का अभाव
ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बहुत बड़ी चुनौती है। कई जगहों पर कैंसर की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं। इसके अलावा, आर्थिक परेशानियां और बड़े अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी के कारण लोग अपनी जांच को लंबे समय तक टालते रहते हैं।
रूटीन हेल्थ चेकअप की आदत न होना
भारत में रूटीन हेल्थ चेकअप कराने का चलन काफी कम है। डॉक्टरों की सलाह है कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर अपनी प्रोस्टेट की जांच जरूर करवानी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं, जब उनकी तकलीफ बर्दाश्त से बाहर हो जाती है।
समय पर स्क्रीनिंग है सबसे बड़ा बचाव
डॉ. वोरा बताते हैं कि कई मामलों में प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में बिना किसी बड़े या स्पष्ट लक्षण के शरीर में खामोशी से पनपता रहता है। यही वजह है कि समय पर स्क्रीनिंग करवाना बेहद जरूरी है। यदि इस बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ लिया जाए, तो इलाज के सफल होने की संभावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
क्या है समाधान?
आज इस बात की सख्त जरूरत है कि समाज में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाए। पुरुषों को यह समझना होगा कि वे बिना किसी शर्म या संकोच के डॉक्टर से अपनी परेशानियां साझा करें। नियमित जांच की आदत, सही जानकारी और समय पर उठाया गया कदम ही इस 'साइलेंट किलर' के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
