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पापा बनने की खुशी या अंदर छिपा तनाव? नई रिसर्च ने खोला पिताओं का वो सच जिस पर कोई बात नहीं करता

Published: Fri, 27 Mar 2026 06:44 PM (IST)

कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की एक स्टडी के अनुसार, नए पिताओं में बच्चे के जन्म के लगभग एक साल बाद डिप्रेशन और ...और पढ़ें

पिता बनने के बाद पुरुषों में छिपा तनाव (Picture Credit- AI Generated)

पिता बनने के बाद पुरुषों में छिपा तनाव (Picture Credit- AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। घर में किसी नन्हे मेहमान का आना खुशियों से भरा पल होता है। इस दौरान अक्सर लोगों का पूरा ध्यान बच्चे और मां की सेहत पर होता है। आमतौर लोग मां की मानसिक स्थिति का ज्यादा ध्यान रखते हैं, लेकिन शायद ही कभी किसी ने यह सोचा होगा कि इस दौरान पुरुषों पर कैसा असर होता है।

हाल ही में एक स्टडी में यह पता चला है कि पिता बनने का तनाव और डिप्रेशन पुरुषों में भी होता है, लेकिन यह तुरंत नहीं दिखता, बल्कि महीनों बाद छिपकर वार करता है। आइए जानते हैं इस स्टडी के बारे में विस्तार से- 

शुरुआती महीनों में सब लगता है परफेक्ट

JAMA नेटवर्क ओपन में पब्लिश कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की एक स्टडी में इस बारे में पता चला। इसके लिए स्वीडन के करीब 10 लाख पिताओं पर नजर रखी गई, जिसमें एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई। पत्नी की प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के शुरुआती कुछ महीनों तक पुरुष काफी खुश और शांत नजर आए। उन्हें देखकर लगता है कि वे नई जिम्मेदारी बहुत आसानी से संभाल रहे हैं।

एक साल बाद सामने आती है असली तस्वीर

हालांकि, असली बदलाव एक साल बाद शुरू होता है। स्टडी में पाया गया कि लगभग एक साल बाद, पिताओं में डिप्रेशन और स्ट्रेस का स्तर प्रेग्नेंसी से पहले के समय की तुलना में 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों के लिए भी ये नतीजे हैरान करने वाले थे, क्योंकि आम धारणा यही है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद तनाव सबसे ज्यादा होता है।

पिताओं में धीरे-धीरे क्यों बढ़ता है तनाव?

  • उत्साह कम होना: बच्चे के आने की पहली एक्साइटमेंट रोजमर्रा की भागदौड़ में बदल जाती है।
  • नींद की कमी: महीनों तक नींद खराब होना दिमागी तौर पर थका देता है।
  • रिश्तों का नया रूप: पति-पत्नी का रोमांटिक रिश्ता अचानक फुल-टाइम पेरेंटिंग ड्यूटी में बदल जाता है, जिससे तालमेल में कमी आ सकती है।
  • बढ़ती जिम्मेदारियां: बच्चे के भविष्य और खर्चों को लेकर चिंताएं हावी होने लगती हैं।

पुरुषों की सेहत पर बात करना भी जरूरी

स्टडी की मुख्य रिसर्चर जिंग झोउ कहती हैं कि पिता भले ही एक तरफ खुश रहते हैं, लेकिन वह कहीं न कहीं थकान के बीच बैलेंस बनाने की जद्दोजहद में लगे रहते हैं। यही वजह है कि शुरुआती महीनों में उनकी खुशी अक्सर अंदर पनप रहे तनाव को छिपा देती है।

इसलिए महिलाओं की ही तरह पुरुषों की मेंटल हेल्थ को भी उतना भी महत्व दिया जाना चाहिए। क्योंकि सिर्फ मां ही नहीं, पेरेंटिंग के इस सफर में पिता भी थक सकते हैं और उनका मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही मायने रखता है।

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Source:

Jama Network