बच्चा हाइपरएक्टिव होगा या शांत? जन्म से पहले ही गर्भ में मिल जाता है ये बड़ा इशारा, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट
एक नई अमेरिकी स्टडी के अनुसार, गर्भावस्था के अंतिम चरण में प्लेसेंटल ग्रोथ फैक्टर का कम स्तर बच्चे में एडीएचडी का खतरा बढ़ा सकता है।

क्या गर्भ में ही तय हो जाते हैं दिमागी विकास के जोखिम? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। गर्भावस्था के दौरान मां की सेहत का सीधा असर उसके बच्चे पर पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्भावस्था के अंतिम चरण में 'प्लेसेंटा' की स्थिति आपके बच्चे में एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर) के खतरे को बढ़ा सकती है? जी हां, अमेरिका में हुई एक नई स्टडी ने इस बात का चौंकाने वाला खुलासा किया है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
अमेरिका के आयोवा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में पाया है कि प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर में अगर प्लेसेंटल ग्रोथ फैक्टर का स्तर कम हो जाता है, तो जन्म लेने वाले बच्चे में एडीएचडी का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है। पीएलजीएफ गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा की अच्छी सेहत को मापने का एक बेहद महत्वपूर्ण बायोमार्कर है।
गर्भ में ही शुरू हो जाता है दिमागी विकास
आयोवा विश्वविद्यालय में प्रसूति एवं स्त्री रोग और मनोचिकित्सा की सहायक प्रोफेसर और शोधकर्ता सेरेना गुमुस्लोग्लू ने इस शोध के बारे में अहम जानकारी दी है। उनका कहना है, “यह अध्ययन इस प्रमाण को और मजबूत करता है कि मस्तिष्क के विकास से जुड़े जोखिम गर्भ में ही शुरू हो जाते हैं।”
इस स्टडी से यह भी संकेत मिलता है कि बच्चे के मस्तिष्क के विकास को सही आकार देने में प्लेसेंटा एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। प्रोफेसर सेरेना के अनुसार, मां की सेहत और पीएलजीएफ जैसे कारक हमें यह समझने में काफी मदद कर सकते हैं कि गर्भ में पल रहे बच्चे का दिमाग किस तरह से विकसित हो रहा है।
आखिर प्लेसेंटा और पीएलजीएफ क्या करते हैं?
प्लेसेंटा एक ऐसा अस्थायी अंग है जो बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है। इसके मुख्य काम इस प्रकार हैं:
- गर्भ में पल रहे बच्चे तक खून और जरूरी पोषक तत्व पहुंचाना।
- शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना।
- बच्चे को किसी भी तरह के विषैले तत्वों, वायरस या हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षित रखना।
- वहीं, प्लेसेंटल ग्रोथ फैक्टर प्लेसेंटा में बनने वाला एक प्रमुख प्रोटीन है, जो इस बात का संकेत देता है कि यह अस्थायी अंग कितना स्वस्थ है।
खतरे की घंटी है पीएलजीएफ का गिरता स्तर
पीएलजीएफ का स्तर कम होना सिर्फ एडीएचडी का ही नहीं, बल्कि 'प्रीक्लेम्पसिया' जैसी गर्भावस्था से जुड़ी अन्य जटिलताओं का भी एक जाना-माना चेतावनी संकेत है। इस नई रिसर्च से विशेषज्ञों को गर्भ में पल रहे बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में कई नई और महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
