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क्या आपका ब्लड प्रेशर दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा रहा है? जानें स्ट्रोक से इसका संबंध

Published: Wed, 28 Oct 2026 02:19 PM (IST)

उच्च रक्तचाप यानी हाइपरटेंशन स्ट्रोक का एक बड़ा कारण है, क्योंकि यह रक्त वहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और आर्टरी ...और पढ़ें

उच्च रक्तचाप से स्ट्रोक का खतरा: दिमाग की नसों को कैसे बचाएं (Picture Credit- AI Generated)

उच्च रक्तचाप से स्ट्रोक का खतरा: दिमाग की नसों को कैसे बचाएं (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम कारक है

  2. स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने के लिए B.E. F.A.S.T. तरीका अपनाएं

  3. स्वस्थ जीवनशैली से स्ट्रोक के खतरे को काफी कम करें

ब्रह्मानंद मिश्र, नई दिल्ली। सामान्य अर्थों में स्ट्रोक को समझें, तो यह स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब दिमाग के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति ब्लॉक ब्लड वेसल (इस्केमिक स्ट्रोक) या ब्लड वेसल के फटने (हेमोरेजिक स्ट्रोक) की वजह से रुक जाती है। जीवनशैली जनित समस्याओं के चलते यह समस्या इतनी गंभीर होती जा रही है कि आज स्ट्रोक दुनियाभर में मौतों और लंबे समय तक रहने वाली विकलांगता का एक बड़ा कारण बन चुका है।

डॉ. के.बी. शंकर (डायरेक्टर प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष (HOD), न्यूरोसर्जरी, वीएमएमसी सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली) बताते हैं कि हाई ब्लडप्रेशर या हाईपरटेंशन, स्ट्रोक के लिए सबसे जरूरी मॉडिफाइड रिस्क फैक्टर में से एक है। अगर आप रक्तचाप को नियंत्रित रखने की आदत डाल लें, तो इस समस्या के जोखिम को कम कर सकते हैं।

हाईपरटेंशन कैसे बढ़ाता है स्ट्रोक का रिस्क

हाईपरटेंशन ब्लड वेसल की दीवारों पर बहुत अधिक दबाव डालता है, जिससे वे धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैं और कई तरीकों से स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है।

  • ब्लड वेसल को नुकसान : लगातार हाई ब्लडप्रेशर आर्टरीज की अंदरूनी परत को डैमेज करता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस होता है, जिसमें फैटी प्लाक जमा हो जाते हैं और ब्लड वेसल को पतला कर देते हैं।
  • इस्केमिक स्ट्रोक: सिकुड़ी हुई आर्टरीज और प्लाक के फटने से रक्त का थक्का बन सकता है, जिससे दिमाग में रक्त आपूर्ति रुक जाती है।
  • हेमोरेजिक स्ट्रोक: क्रोनिक हाईपरटेंशन छोटी ब्लड वेसल को कमजोर कर देता है, जिससे उनके फटने और ब्रेन में ब्लीडिंग होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • स्मॉल-वेसल डिजीज: हाईपरटेंशन ब्रेन के गहरे स्ट्रक्चर को आपूर्ति करने वाली छोटी आर्टरी को डैमेज करता है, जिससे लैकुनर इन्फार्क्ट हो सकता है और चेतना में कमी हो सकती है।


हाईपरटेंशन के अक्सर कोई खास लक्षण नहीं दिखते, जिससे रेगुलर ब्लडप्रेशर मानिटरिंग जरूरी हो जाती है। जीवनशैली में बदलाव और डाक्टर की बताई गई दवा से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने से स्ट्रोक का रिस्क काफी कम हो जाता है।

स्ट्रोक से जुड़े दूसरे रिस्क फैक्टर

स्ट्रोक के रिस्क फैक्टर को सुधार किए जाने वाले और नहीं किए जाने वाले श्रेणी में बांटा जा सकता है।

सुधार योग्य रिस्क फैक्टर

  • डायबिटीज मेलिटस: उच्च रक्त ग्लूकोज ब्लड वेसल को डैमेज करता है और एथेरोस्क्लेरोसिस को तेज करता है।
  • हाई कोलेस्ट्राल: बढ़ा हुआ एलडीएल कोलेस्ट्राल प्लाक बनने और आर्टरी को पतला करता है।
  • स्मोकिंग और तंबाकू का इस्तेमाल: तंबाकू ब्लड वेसल को डैमेज करता है, ब्लडप्रेशर बढ़ाता है और ब्लड क्लाट बनने को बढ़ाता है।
  • मोटापा: शरीर का अधिक वजन हाईपरटेंशन, डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता : निष्क्रियता के चलते मोटापा, हाईपरटेंशन और मेटाबोलिक हेल्थ खराब होती है।
  • खराब खानपान: अधिक नमक, सैचुरेटेड फैट और बहुत अधिक प्रोसेस्ड खाना दिल का खतरा बढ़ाता है।
  • दिल की बीमारी: एट्रियल फिब्रिलेशन से दिल में खून के थक्के बन सकते हैं और दिमाग तक जा सकते हैं।
  • अल्कोहाल : अधिक अल्कोहल की आदत से ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

न बदलने वाले रिस्क फैक्टर में बढ़ती उम्र, फैमिली हिस्ट्री, जेनेटिक कारण और पहले हुआ स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआइए) शामिल हैं। हालांकि इन्हें बदला नहीं जा सकता, फिर भी दूसरे रिस्क फैक्टर को मैनेज करके ओवरआल रिस्क को काफी कम किया जा सकता है।

स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेत

स्ट्रोक के लक्षणों को जल्दी पहचानना जरूरी है क्योंकि तुरंत इलाज से दिमाग के टिशू बच सकते हैं और रिकवरी बेहतर हो सकती है।

B.E. F.A.S.T. यह तरीका आम चेतावनी के संकेतों को पहचानने में मदद करता है:

  • B – बैलेंस: अचानक चक्कर आना, तालमेल में कमी या चलने में मुश्किल।
  • E – आंखें: अचानक धुंधला दिखना, डबल दिखना या नजर जाना।
  • F – चेहरा: चेहरे के एक तरफ लटकना या सुन्न होना।
  • A – हाथ: अचानक कमजोरी या सुन्न होना, खासकर एक हाथ या शरीर के एक तरफ।
  • S – स्पीच: ठीक से न बोलना, बोलने में मुश्किल या बात समझ न आना।
  • T – समय: कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल करें।


दूसरे चेतावनी के संकेतों में अचानक कन्फ्यूजन, निगलने में मुश्किल और बिना किसी साफ़ वजह के अचानक, तेज सिरदर्द शामिल हैं।

अगर स्ट्रोक का शक हो, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। लक्षणों के शुरू होने का समय नोट करें, खाना या पानी न दें और मेडिकल प्रोफेशनल्स की सलाह के बिना एस्पिरिन देने से बचें, क्योंकि स्ट्रोक में ब्लीडिंग हो सकती है। जो लक्षण कुछ ही मिनटों में गायब हो जाते हैं, वे टीआइए का संकेत हो सकते हैं और उन्हें तुरंत जांच की भी जरूरत होती है।

जीवनशैली में करें सुधार

इससे स्ट्रोक के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।

  • ब्लड प्रेशर कंट्रोल करें: इसकी नियमित निगरानी करें और बताई गई दवा लगातार लेते रहें।
  • संतुलित आहार लें : फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फलियां और नट्स खाएं। नमक, फ्राइड फूड और सैचुरेटेड फैट कम करें।
  • नियमित व्यायाम करें: हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम करने का लक्ष्य रखें, जैसे तेज चलना या साइकिल चलाना।
  • धूमपान बंद करें: तंबाकू प्रोडक्ट और सेकंड हैंड स्मोक से बचें।
  • वजन सही रखें : धीरे-धीरे वजन कम करने से ब्लडप्रेशर, कोलेस्ट्राल और ग्लूकोज कंट्रोल में सुधार हो सकता है।
  • डायबिटीज और कोलेस्ट्राल को मैनेज करें: रेगुलर चेक-अप करवाएं और सही इलाज करवाएं।
  • नींद बेहतर करें: अधिक अल्कोहल लेने से बचें, सही नींद की आदतें बनाए रखें और जब संकेत मिले तो स्लीप एप्निया की जांच करवाएं।

चेतावनी के संकेतों को पहचानना, इमरजेंसी इलाज करवाना और बदलने लायक रिस्क फैक्टर को कंट्रोल करना जरूरी है। एक स्वस्थ जीवनशैली, नियमित मेडिकल जांच और सही दवाएं स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं और लंबे समय के लिए स्वास्थ्य में सुधार ला सकती हैं।

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