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बिना लक्षण दिखाए युवाओं को शिकार बना रहा हाई बीपी, बचना है तो आज ही बदलें अपनी ये आदतें

Published: Mon, 13 Jul 2026 08:26 AM (IST)

देश में 15 वर्ष से अधिक आयु की 19.4 प्रतिशत महिलाएं और 22.1 प्रतिशत पुरुष हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं।

सुस्त जीवनशैली से युवाओं में बढ़ रहा हाई ब्लड प्रेशर (Image Source: AI-Generated)

सुस्त जीवनशैली से युवाओं में बढ़ रहा हाई ब्लड प्रेशर (Image Source: AI-Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। भारत में युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो पहले अधेड़ावस्था और वृद्धावस्था में अधिक सामान्य मानी जाती थी। कार्डियोलाजिस्ट इस प्रवृत्ति का श्रेय सुस्त जीवनशैली, मोटापे, दीर्घकालिक तनाव और अस्वास्थ्यकर आहार को देते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि कई लोग इस समस्या के बारे में तब तक अनजान रहते हैं जब तक गंभीर जटिलताएं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी रोग नहीं हो जाते। एनएफएचएस-6 (2023-24) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 15 वर्ष से अधिक आयु की 19.4 प्रतिशत महिलाएं और 22.1 प्रतिशत पुरुष हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं या इसके लिए दवा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक दरें रिपोर्ट की गई हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि हाई ब्लड प्रेशर अक्सर तब तक लक्षण नहीं दिखाता, जब तक जटिलताएं विकसित नहीं हो जातीं।

यंग प्रोफेशनल्स में आम हो गया है हाई ब्लड प्रेशर

इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट लंग्स डिजीजेज रिसर्च सेंटर के चेयरमैन डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि ज्यादातर युवाओं को अक्सर रूटीन चेकअप, सर्जरी से पहले या दिल से जुड़ी किसी इमरजेंसी के दौरान पता चलता है कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। अस्पताल में एक बार की रीडिंग केवल एक झलक होती है। महत्वपूर्ण यह है कि ब्लड प्रेशर दैनिक जीवन में हफ्तों और महीनों में कैसे व्यवहार करता है। डॉ. चंदोला ने कहा कि घर पर इस्तेमाल होने वाले ऐसे मानिटरिंग डिवाइस जो सीधे डॉक्टर की टीम को रीडिंग भेजते हैं, उनकी मदद से हम मास्क्ड हाइपरटेंशन का पता लगा सकते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर)-इडियाबी अध्ययन ने दिखाया है कि हाई ब्लड प्रेशर एक चौथाई से अधिक भारतीयों को प्रभावित करता है, जिसमें बड़ी संख्या में मामलों का निदान नहीं होता है। अध्ययन ने मोटापा, डायबिटीज, शहरी जीवन, शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक नमक सेवन को प्रमुख जोखिम कारकों के रूप में पहचाना है।

दिल्ली एम्स के कार्डियोलाजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग ने कहा कि 10 साल पहले 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर सामान्य कार्डियोलाजी प्रैक्टिस में अपेक्षाकृत असामान्य था। आज, यह कुछ ऐसा है जिसका सामना हम लगभग हर दिन करते हैं। कई युवा पेशेवरों के पास लंबे समय तक बैठने के घंटे होते हैं। वे अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, अच्छी नींद नहीं लेते और लगातार तनाव में रहते हैं।

जीवनशैली में बदलाव है कारण

डॉ. चंडोला ने बताया कि बिना उपचारित हाई ब्लड प्रेशर चुपचाप हृदय, मस्तिष्क और किडनी को रक्त प्रदान करने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे समय से पहले हृदय रोग का जोखिम काफी बढ़ जाता है।

नमक की मात्रा करनी होगी कम

डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया ने कहा कि हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट का लगातार शारीरिक व्यायाम, शरीर का वजन सही रखना, खाने में नमक कम करना, फल और सब्जियों का ज्यादा सेवन, तंबाकू से परहेज, शराब का सेवन कम करना, तनाव को मैनेज करना और भरपूर नींद लेने से ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. झाझरिया ने कहा कि एक चल रही आइसीएमआर के नेतृत्व वाली पहल ने पाया कि औसत नमक का सेवन विश्व स्वास्थ्य संगठन की अनुशंसित सीमा पांच ग्राम प्रतिदिन से अधिक है। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि हाई ब्लड प्रेशर का जल्दी पता लगाना और नियंत्रण करना हर साल हजारों हार्ट अटैक, स्ट्रोक और क्रानिक किडनी रोग के मामलों को रोक सकता है।

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