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क्या आप या आपके पार्टनर भी लेते हैं तेज खर्राटे? समझें कैसे नींद की ये आदत बढ़ा रही है 'स्ट्रोक' का रिस्क

By Dr. Deepak YadavEdited By: Swati Sharma
Published: Thu, 29 Oct 2026 11:19 AM (IST)

खर्राटे लेना सामान्य लग सकता है, लेकिन तेज खर्राटे और सांस रुकने की समस्या स्लीप एपनिया का संकेत हो सकती है, जिससे दिमाग में स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

खर्राटे लेने से भी बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

खर्राटे लेने से भी बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई लोग सोते वक्त खर्राटे लेते हैं और इसे बड़ी ही सामान्य सी आदत मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं खर्राटे आपके दिमाग को भी प्रभावित कर सकते हैं? 

लगातार तेज खर्राटे लेना, खासकर तब जब साथ में सांस रुकने की भी समस्या हो, तो ये एक स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है और इससे दिमाग में स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। 

ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा

स्लीप एपनिया में सोते समय सांस लेने वाली नली बार-बार बंद हो जाती है, जिससे ऑक्सीजन सप्लाई थोड़ी देर के लिए रुक जाती है। इस तरह की रुकावटें एक घंटे में दर्जनों बार हो सकती है, जिससे दिमाग और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर दबाव पड़ता है। 

स्लीप डिसऑर्डर स्ट्रोक का कारण कैसे बनते हैं?

जब भी हमारी सांस रुकती है, तो ये हमारे खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है। इससे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। बार-बार ये होने की वजह से नसों में सूनज, एंडोटेलियल डिस्फंक्शन और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने की प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो जाता है।

समय के साथ, इस वजह से ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचने, दिल की धड़कनें अनियमित होने और ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे इस्केमिक स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। 

अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, स्लीप एपनिया से पीड़ित पुरुषों में इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा, बिना स्लीप एपनिया वाले पुरुषों की तुलना में तीन गुना ज्यादा था। 

खर्राटों को समस्या कब समझना चाहिए?

अगर खर्राटों के साथ गला घुटने या सांस लेने में हांफने जैसी आवाजें आएं, सांस रुकने के संकेत दिखें, सुबह सिरदर्द या दिन में बहुत ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है। हालांकि, हर व्यक्ति जिसे खर्राटे आते हैं, उसे स्लीप एपनिया भी हो ये जरूरी नहीं है। 

स्लीप एपनिया का इलाज स्ट्रोक के खतरे को कम करता है? 

सांस लेने में तकलीफ या स्लीप एपनिया क समय पर पहचान, सही मेडिकल जांच और रिस्क फैक्टर्स को कंट्रोल करना दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद है। लंबे समय तक स्लीप एपनिया की समस्या को अनदेखा करने से स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए इस समस्या के इलाज के लिए डॉक्टर से मिलना जरूरी है। 

(डॉ. दीपक यादव, कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी एंड स्ट्रोक मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद)