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दिल्ली वाले ध्यान दें! सुबह-सुबह वर्कआउट का शौक पड़ न जाए भारी, नसों में सूजन बढ़ा रहा हवा में घुला PM 2.5

Published: Thu, 01 Oct 2026 08:31 AM (IST)

दिल्ली की प्रदूषित हवा, विशेषकर PM 2.5, युवाओं के दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन रही है।

धमनियों में सूजन बढ़ा रहा है दिल्ली का PM 2.5 (Image Source: AI-Generated)

धमनियों में सूजन बढ़ा रहा है दिल्ली का PM 2.5 (Image Source: AI-Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। दिल्ली की प्रदूषित हवा युवाओं के दिल की सेहत के लिए खतरा बन सकती है। डाक्टरों का कहना है कि पीएम 2.5 के लंबे समय तक संपर्क में रहने के साथ-साथ खराब नींद, तनाव और शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने से दिल की सेहत से जुड़े मौजूदा खतरे और बढ़ सकते हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कालेज और जाकिर हुसैन कालेज के शोधकर्ताओं की एक हाल के अध्ययन में पाया गया कि राजधानी में सर्दियों के दौरान पीएम 2.5 का औसत स्तर 269.35 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। यह राष्ट्रीय मानक से लगभग सात गुना और अध्ययन में बताए गए डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश से लगभग 18 गुना ज्यादा है।

पीएम 2.5 की ज्यादातर रीडिंग राष्ट्रीय मानक से ज्यादा

अध्ययन के दौरान रिकार्ड की गई पीएम 2.5 की लगभग 98 प्रतिशत रीडिंग राष्ट्रीय मानक से ज्यादा थीं, जबकि दिसंबर के आखिर में यह लेवल 700 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से ऊपर चला गया था। मार्च 2026 में "फ्रंटियर्स इन सस्टेनेबल सिटीज" जर्नल में छपे अध्ययन के नतीजों के मुताबिक, सर्दियों का औसत लेवल गर्मियों और मानसून के दौरान रिकार्ड किए गए स्तर से पांच गुना से भी ज्यादा था।

गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी के प्रमुख निदेशक डॉ. उद्गीथ धीर ने कहा, कम उम्र के लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा हमेशा किसी एक वजह से नहीं होता। लंबे समय तक हवा के प्रदूषण के संपर्क में रहना, ठीक से या सही समय पर न सोना, लगातार तनाव और शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना ये सब मिलकर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्राल जैसे आम जोखिम कारकों को और बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि बारीक कण नसों में सूजन, आक्सीडेटिव स्ट्रेस और एंडोथेलियल डिसफंक्शन (रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत का ठीक से काम न करना) को बढ़ावा दे सकते हैं, जबकि खराब नींद ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने व मेटाबालिक कामकाज में बाधा डाल सकते हैं, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

किशोरों और युवाओं में ज्यादा जोखिम

डॉ. धीर ने कहा कि युवाओं को व्यायाम या शारीरिक थकान को लेकर सावधान रहना चाहिए, खासकर जब प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो। अचानक बिना प्रशिक्षण के लंबे समय तक दौड़ना या उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट करना हृदय प्रणाली पर अनावश्यक तनाव डाल सकता है। 60.7 प्रतिशत सर्वेक्षण किए गए युवाओं ने प्रदूषित सर्दियों के महीनों में खांसी, छींक, सांस लेने में कठिनाई या आंखों में जलन जैसे लक्षणों की वृद्धि की रिपोर्ट की। डॉ. धीर ने कहा कि अच्छी नींद हृदय संबंधी जोखिम से बचाव के लिए महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से युवाओं में।

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