विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ब्रेस्ट कैंसर की जांच में झिझक है जानलेवा, भारत में सिर्फ 65% सर्वाइवल रेट; WHO की रिपोर्ट में खुलासा

Published: Sat, 11 Jul 2026 12:51 PM (IST)

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट 65.7% है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

भारत में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट इतनी कम क्यों? (Picture Courtesy: Freepik)

भारत में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट इतनी कम क्यों? (Picture Courtesy: Freepik)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है और इससे जुड़ी एक बेहद अहम रिपोर्ट सामने आई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत में ब्रेस्ट कैंसर से ठीक होने वाले मरीजों की दर में लगातार सुधार हुआ है। 

हालांकि, इसके बावजूद विकसित और अमीर देशों की तुलना में भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का सर्वाइवल रेट काफी कम है। इसके मुताबिक भारत में ब्रेस्ट कैंसर के डायग्नोसिस के बाद तीन में से सिर्फ दो महिलाएं ही कम से कम पांच साल तक जीवित रह पाती हैं। 

क्या कहते हैं आंकड़े?

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने सभी 194 सदस्य देशों के लिए पांच साल के ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट का अनुमान लगाया, जिसे नेचर मेडिसिन जर्नल में पब्लिश किया गया। इन अनुमानों के मुताबिक, साल 2017-21 के बीच भारत में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट 65.7% है, लेकिन ग्लोबल मीडियन 77.8% है। दुनियाभर के औसत के सामने भारत में ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल रेट काफी कम है, जो गंभीर चिंता का विषय है। 

वहीं दूसरी ओर अमीर देशों में यह आंकड़ा 87.3% तक रहा है। अमेरिका में 88.5% और यूरोपीय देशों में 84% सर्वाइवल रेट रहा। ये आंकड़े भारत की तुलना में कहीं ज्यादा हैं। इस स्टडी का मकसद हर साल समय से पहले होने वाली मौतों को 2.5% कम करना और साल 2040 तक 25 लाख जिंदगियां बचाने का है। 

सुधार के बाद भी चुनौतियां बरकरार

ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवल में भारत ने काफी सुधार किया है। साल 2024 के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की एक भारतीय स्टडी के मुताबिक, 1990 के दशक में जहां सर्वाइवल रेट 31% से 54% के बीच था, वहीं 2012-2015 के दौरान यह बढ़कर 66.4% हो गया। 

हालांकि, इसमें अभी और सुधार की जरूरत है। शुरुआती जांच और बेहतर इलाज की पहुंच को बढ़ाकर सर्वाइवल रेट में और सुधार लाया जा सकता है। आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई जैसी सरकारी योजनाओं और कम्युनिटी लेवल पर टेस्टिंग से ब्रेस्ट कैंसर समय पर पता लगाने में काफी मदद मिली है, लेकिन जागरूकता की कमी, झिझक, जांच में देरी और आर्थिक तंगी के कारण आज भी महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की जांच करवाने में कतराती हैं और जब तक डॉक्टर के पास जाती हैं, कैंसर लास्ट स्टेज तक पहुंच चुका होता है।  

अमीर देशों में सर्वाइवल रेट ज्यादा

अलग-अलग इनकम वाले देशों में इलाज और सर्वाइवल रेट में काफी अंतर देखने को मिला- 

  • ज्यादा आय वाले देश- 87.3%
  • उच्च-मध्यम आय वाले देश- 78.7%
  • निम्न-मध्यम आय वाले देश- 60.1%
  • कम आय वाले देश- 41.9%

साल 2024 में इस बीमारी की वजह से दुनियाभर में 6.9 लाख लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से करीब 70% मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुईं। इससे साफ पता चलता है कि बीमारी के बेहतर इलाज और सर्वाइवल रेट बढ़ाने के लिए समय पर बीमारी की पहचान करना जरूरी है। साथ ही, समय पर इलाज और दवाएं मिलना भी कैंसर के मरीज के लिए उतनी ही जरूरी है, जिसमें आर्थिक तंगी एक बड़ी बाधा है।