माता-पिता के चलने-बोलने के तरीके में दिखें बदलाव, तो हो जाएं सर्तक; हो सकते हैं अल्जाइमर के शुरुआती संकेत
बूढ़े हो रहे माता-पिता की आदतों पर गौर करके अल्जाइमर की पहचान की जा सकती है।

भूलने की बीमारी की हो सकती है पहचान (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब कभी बुजुर्ग माता-पिता चीजों को भूलने लगते हैं, तो परिवार का ध्यान हमेशा उन बातों पर जाता है जिन्हें सामने से देखा या गौर किया जा सकता है। इनमें अपॉइंटमेंट भूल जाना, एक ही सवाल को बार-बार पूछना और घर में किसी सदस्य का नाम याद न रहना जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।
पर हमें यह जानने की जरूरत है कि हमारा दिमाग केवल चीजों को याद ही नहीं रखता, इसके और भी कई काम हैं। ऐसे में आइए वर्ल्ड अल्जाइमर डे पर जानें कि कैसे हम भूलने की बीमारी की पहचान पहले कर सकते हैं।
भूलने की बीमारी की हो सकती है पहचान
मान लीजिए कि आप कमरे में चल रहे हैं, किसी से बात कर रहे हैं या किचन में नाश्ता बना रहे हैं; ये सभी गतिविधियां भी दिमाग का ही काम है। ऐसे में जब उम्र बढ़ने के साथ भूलने की बीमारी की समस्या होती है, तो उसे इन रोजमर्रा के कामों में होने वाले इन छोटे-मोटे बदलावों पर नजर रखकर पहले ही पहचाना जा सकता है।
हम में से ज्यादातर लोग चलने को दिमाग की एक गतिविधि नहीं मानते, जबकि चलने में शरीर का संतुलन बनाना, देखना, शरीर के साथ तालमेल बिठाना, आसपास की जगहों का अंदाजा लगाना और रास्तों पर ध्यान देना; ये सभी दिमाग के कामों में गिना जाता है। ऐसे में किसी व्यक्ति से चलने से अल्जाइमर के शुरुआती संकेतों का पता लगाया जा सकता है:
अगर कोई व्यक्ति हमेशा ही तेज गति से चलता है और वो अचानक छोटे और धीमे कदमों से चलने लगे।
कहीं मुड़ना पड़े तो वह व्यक्ति झिझकने लग जाए
सीढ़ियां चढ़ते समय पहले की तुलना में कम आत्मविश्वास हो
इन सभी स्थितियों पर गौर कर समय रहते भूलने की बीमारी की पहचान की जा सकती है।
केवल चाल ही सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट का संकेत नहीं
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल चलने में बदलाव को संज्ञानात्मक यानी सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट का संकेत नहीं माना जा सकता है। कई बार उम्र बढ़ने के साथ होने वाली जोड़ों की समस्या, नजर कमजोर होना या न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी किसी व्यक्ति के चलने-फिरने पर प्रभाव डाल सकती है।
लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के चलने के तरीके में बदलाव आए और उसके साथ बाकी बताए गए बदलाव भी दिखें, तो इसे सिर्फ बढ़ती उम्र का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
बातचीत भी खोलती है दिमाग के राज
कभी-कभार कोई शब्द याद न आना एक सामान्य सी बात है, पर चिंता की बात तब है जब किसी के बोलने का तरीका ही बदल जाए। इसे कई संकेतों से पहचाना जा सकता है:
अगर कोई व्यक्ति पहले बहुत ही आसानी से अपनी बात कह पाता था, लेकिन अब उसे बार-बार शब्दों को याद करने में परेशानी होने लगे
अगर वह बात करते-करते बीच में भूल जाए
बात को आधा-अधूरा कहने लगे
एक ही बात को बार-बार दोहराने लगे
तो ये सभी बातें अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, बल्कि डॉक्टर से इस बारे में तुरंत सलाह लेने की जरूरत है।
(डॉ. कुणाल बहरानी, यथार्थ हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी विभाग में चेयरमैन और ग्रुप डायरेक्टर हैं)
