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सोशल मीडिया के 'आयुर्वेदिक हैक्स' से सावधान! बिना सोचे-समझे घरेलू नुस्खे अपनाने से बढ़ सकती है आपकी परेशानी

By Seema JhaEdited By: Shweta Chauhan
Published: Tue, 22 Sep 2026 04:45 PM (IST)

सोशल मीडिया पर वायरल आयुर्वेदिक हैक्स और घरेलू नुस्खों को बिना चिकित्सकीय सलाह के अपनाना खतरनाक हो सकता है।

सोशल मीडिया पर वायरल आयुर्वेदिक हैक्स अपनाते समय बरतें सावधानी (Image Source: AI Generated)

सोशल मीडिया पर वायरल आयुर्वेदिक हैक्स अपनाते समय बरतें सावधानी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गले में खराश है, सिर भारी लग रहा है या कब्ज आदि की शिकायत है तो खुद से ही घरेलू उपचार कर लेते हैं। ऐसा करने से पहले कुछ बातें आपको जाननी जरूरी हैं। यह तब तक सही अभ्यास है, जब आप इन्हें किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करके खरीदते हैं। बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के इनका सेवन करते हैं तो जोखिम भरा हो सकता है। 

आइए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, दिल्ली में निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति से जानें कि आयुर्वेदिक हैक्स को अपनाते या दवाएं लेते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 

सोशल मीडिया पर आयुर्वेदिक हैक्स की बाढ़ 

इन दिनों ऑनलाइन रील्स या वीडियो में आयुर्वेदिक हैक्स या हेल्थ बेनिफिट के नाम ऐसी दवाइयां लोग धड़ल्ले से खरीद रहे हैं और सामान्य सर्दी-खांसी से लेकर मधुमेह, रक्तचाप जैसी बीमारियों का भी उपचार स्वयं कर रहे हैं। बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के स्वयं उपचार करने की यह प्रवृत्ति गंभीर नुकसान कर सकती है। 

आयुर्वेद को हानिरहित चिकित्सा पद्धति समझना भी इस चलन का बड़ा कारण है जबकि ऐसी मान्यता सही नहीं है। किसी भी तरह की दवा की खुराक के बारे में पूरी जानकारी न होने से वह लाभ के बजाय नुकसान ही करेगी। 

इसी तरह आपको पता नहीं है कि आपकी बीमारी के लिए कौन सी दवा अधिक उपयुक्त है, वह बीमारी को कम करने के बजाय बढ़ाएगी। ऐसे में हमेशा बेहतर यही होगा कि आप किसी भी दवा के बारे में बताए गए लुभावने विज्ञापनों या वीडियो से प्रभावित हुए बिना किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श लेकर ही आयुर्वेदिक दवाएं खरीदें। यह भी ध्यान रहे कि आप किसी प्रामाणित ब्रांड या डीलर्स से ही दवाईयां लेनी चाहिए।

इन बातों का रहे ध्यान

  1. ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बिकने वाली दवाइयां जरूरी नहीं कि आवश्यक मानकों पर खरी उतरती हों। ये कुछ ऐसे पदार्थ या धातुओं से मिली दवाइयां हो सकती हैं जो सेहत पर घातक प्रभाव डाल सकती हैं।

  • कुछ लोग जड़ी-बूटियों को पूरी तरह हानिरहित समझकर अन्य अंग्रेजी दवाइयों के साथ इनका सेवन कर लेते हैं, जबकि दूसरी दवाइयों के साथ मिलकर ये जड़ी-बूटियां खतरनाक प्रतिक्रिया दे सकती हैं।

  • कई बार अधिक बिक्री के नाम पर लोग ऐसे उत्पाद भी बेचते हैं जो जड़ी-बूटियों के नाम पर जहरीले प्रभाव डालते हैं। इनके सेवन से फूड प्वाइजनिंग या एलर्जी की स्थिति हो सकती है।

  • मनमाना प्रयोग करने से दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अधिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उनका मधुमेह या रक्तचाप और बिगड़ या गंभीर हो सकता है।

  • आरोग्य के नियमों को समझना जरूरी

    आयुर्वेद को संपूर्ण जीवन जीने का विज्ञान कहा जाता है। इसमें तन-मन के सामंजस्य पर जोर दिया गया है। यदि आप कामकाज पूरा करने और आगे निकलने की होड़ में समय पर सोने और भोजन करने का ध्यान नहीं रखते हैं तो सेहत आपके खिलाफ जा सकती है। अपनी व्यस्त जीवनशैली को सुधारने का प्रयास कीजिए। इसमें आयुर्वेद के कुछ नियम आपकी मदद कर सकते हैं-

    • सोने-जागने का समय निर्धारित करें ताकि शरीर का प्राकृतिक लय बना रहे। इसी लय के बिगड़ने पर ही बीमारियां पैदा होती हैं।

    • नींद पूरी न हो तो पित्तदोष का प्रकोप होता है। इससे हार्मोन संतुलन बिगड़ सकता है। माइग्रेन या ज्यादा भूख व प्यास लगने, बाल झड़ने, अधिक तनाव, क्रोध बढ़ने जैसी परेशानी हो सकती है।

    • मौसम के अनुकूल अपनी दिनचर्या में बदलाव करें। इसे ऋतुचर्या कहा गया है।

    • रोजाना के आहार में मौसम के साथ स्थानीयता यानी जिस भौगोलिक क्षेत्र में आप रह रहे हैं, वहां का ध्यान रखें।

    • आंतों की सेहत का ध्यान रखें। तनाव से इसे बड़ा नुकसान पहुंचता है इसलिए तनाव प्रबंधन सीखें।

    • निष्क्रियता या आलस्य से बचाव करें। कसरत, योग प्राणायाम रोजाना करें।