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देर रात तक जागने के बाद भूलने लगे हैं चीजें? नींद पूरी न होने के बाद भी याददाश्त तेज रखेंगी ये खास ट्रिक्स

Published: Wed, 21 Oct 2026 09:02 AM (IST)

एक नई रिसर्च के अनुसार, नींद पूरी न होने पर भी थोड़ी देर की हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या छोटी झपकी याददाश्त को तेज रखने में मदद कर सकती है।

नींद की कमी से कमजोर हो सकती है याददाश्त (Picture Courtesy: Freepik)

नींद की कमी से कमजोर हो सकती है याददाश्त (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि देर रात तक जागने के बाद अगले दिन छोटी-छोटी बातें याद रखना भी मुश्किल हो रहा हो? नींद पूरी न होने पर नई जानकारी को दिमाग में स्टोर करना काफी मुश्किल हो जाता है, लेकिन एक नई रिसर्च में इससे जुड़ी हैरान करने वाली बात सामने आई है। 

दरअसल, इस रिसर्च के मुताबिक थोड़ी देर की हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी नींद की से याददाश्त पर पड़ने वाले बुरे असर को कम कर सकती है। आइए जानें इस बारे में।

नींद की कमी और याददाश्त पर असर

इस रिसर्च में पाया गया कि लगातार 30 घंटे तक जागे रहने के बावजूद सिर्फ 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज नई यादें स्टोर करने की क्षमता को सुधारने में मददगार है। हैरानी की बात ये है कि 90 मिनट की नैप लेने से भी बिल्कुल ऐसा ही फायदा देखा गया है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में पब्लिश इस स्टडी में 18 से 35 साल के 53 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। 

इन लोगों को 30 घंटे तक जगाए रखा गया इसके बाद इन्हें तीन ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप ने 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज की, दूसरे ग्रुप ने 90 मिनट की नैप ली और तीसरा ग्रुप एक्सरसाइज बाइक पर बैठा, लेकिन कोई एक्सरसाइज नहीं की। 

इसके बाद तस्वीरें पहचानने वाले टेस्ट में एक्सरसाइज करने वाले ग्रुप ने 56% और नैप लेने वाले ग्रुप ने 57% सही पहचान की। वहीं, बिना एक्सरसाइज वाले ग्रुप का स्कोर सिर्फ 46% रहा। 

दिमाग पर कैसे होता है असर? 

दिमाग की EEG जांच से पता चला कि एक्सरसाइज और नैप, दोनों अलग-अलग तरीकों से याददाश्त को बेहतर बनाते हैं। नैप लेने से मानसिक थकान कम हुई, जिससे परमॉर्मेंस में सुधार आया। वहीं एक्सरसाइज करने से दिमाग में नई जानकारी को बेहतर तरीके से प्रोसेस करने की क्षमता में सुधार हुआ। हालांकि, ये रिसर्च अभी असर जिंदगी से जुड़ी कंडिशन पर नहीं आजमाया गया है।  

अधूरी नींद के खतरे

डीप Non-REM नींद मेमोरी को स्टोर करने में मदद करती है, जबकि REM नींद भावनात्मक यादों को स्टोर करती है। लगातार नींद पूरी न होने से ब्रेन फॉग, थकान, कमजोर याददाश्त, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। नाइट शिफ्ट में काम करने वालों के लिए 15 मिनट की छोटी नैप भी मददगार साबित हो सकती है, लेकिन ये रोज की 7-8 घंटे की नींद की कमी पूरी नहीं कर सकती।