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टीबी ठीक होने के बाद भी फेफड़ों में मंडराता है कैंसर का खतरा! डॉक्टर से समझें 'स्कार कैंसर' और इसके लक्षण

Published: Tue, 28 Jul 2026 03:30 PM (IST)

इस वर्ष की थीम है-फेफड़ों के कैंसर का सामना साथ मिलकर। इसका अर्थ है कि फेफड़ों के कैंसर से लड़ाई ...और पढ़ें

किन लोगों में है लंग कैंसर का ज्यादा खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

किन लोगों में है लंग कैंसर का ज्यादा खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। फेफड़ों का कैंसर तब होता है जब फेफड़ों की कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से तेजी से बढ़ने लगती हैं। धीरे-धीरे ये कोशिकाएं एक गांठ (ट्यूमर) बना देती हैं, जिससे फेफड़ों का सामान्य कार्य प्रभावित होने लगता है।

डॉ. सूर्यकान्त (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग,केजीएमयू, लखनऊ) बताते हैं कि अगर समय पर इलाज न किया जाए तो यह कैंसर शरीर के अन्य अंगों जैसे मस्तिष्क, हड्डियों, लीवर और एड्रिनल ग्रंथि तक फैल सकता है। 

यह दो प्रकार होता है-नान-स्माल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी), जो लगभग 85 प्रतिशत मरीजों में पाया जाता है। दूसरा है- स्माल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी), यह बहुत कम मामलों में होता है, लेकिन यह तेजी से फैलता है।

किन लोगों में खतरा अधिक

फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। चाहे वह सिगरेट, बीड़ी, सिगार, हुक्का या किसी भी रूप में धूमपान हो, सभी फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं। दुनिया में लगभग 80–90 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों का कारण तंबाकू ही है।

अन्य प्रमुख कारण

  • दूसरों के धूमपान का धुआं (पैसिव स्मोकिंग)
  • वायु प्रदूषण
  • लकड़ी, कोयला या गोबर के उपलों से बनने वाला रसोई का धुआं
  • एस्बेस्टस, सिलिका, डीजल का धुआं, आर्सेनिक, क्रोमियम और निकेल जैसे रसायनों के संपर्क में काम करना
  • रेडान गैस का संपर्क
  • छाती पर रेडिएशन उपचार होना
  • परिवार में किसी को फेफड़ों का कैंसर होना
  • पुरानी फेफड़ों की बीमारियां, जैसे पल्मोनरी फाइब्रोसिस या पहले हुआ टीबी (क्षय रोग)

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण

शुरुआती अवस्था में अक्सर कोई विशेष लक्षण दिखाई नहीं देते। बीमारी बढ़ने पर ये संकेत मिल सकते हैं-

  • लगातार कई सप्ताह तक रहने वाली खांसी
  • खांसी के साथ खून आना
  • सीने में दर्द
  • सांस फूलना
  • आवाज बैठ जाना
  • बिना कारण वजन कम होना, कभी-कभी बुखार के साथ
  • लगातार कमजोरी या भूख कम लगना

ये लक्षण टीबी जैसी अन्य फेफड़ों की बीमारियों में भी हो सकते हैं। लेकिन यदि ये लंबे समय तक बने रहें, विशेषकर मध्यम आयु या बुजुर्ग व्यक्तियों, धूमपान करने वालों या पहले टीबी हो चुके लोगों में, तो इन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

टीबी और फेफड़ों का कैंसर

भारत में दुनिया के सबसे अधिक टीबी मरीज पाए जाते हैं। टीबी ठीक होने के बाद कई बार फेफड़ों में निशान रह जाते हैं। कभी-कभी कई वर्षों बाद इन्हीं निशानों वाली जगह पर कैंसर विकसित हो सकता है, जिसे स्कार कैंसर कहा जाता है। 

अध्ययनों के अनुसार, जिन लोगों को पहले फेफड़ों की टीबी हो चुकी है, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा लगभग दो गुना तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि अधिकांश टीबी मरीजों में कभी कैंसर नहीं होता। यदि टीबी हो चुकी हो और बाद में लगातार खांसी, खून वाली खांसी, वजन कम होना या एक्स-रे में नया बदलाव दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

कैसे होती है जांच

यदि डॉक्टर को फेफड़ों के कैंसर का संदेह होता है, तो सबसे पहले मरीज की पूरी जानकारी और शारीरिक जांच की जाती है। इसके बाद आवश्यकता अनुसार छाती का एक्स-रे, काट्रास्ट सीटी स्कैन किया जाता है। कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी की जाती है, जिसमें गांठ से थोड़ा सा ऊतक (टिश्यू) लेकर जांच की जाती है। 

जरूरत के अनुसार डॉक्टर ब्रोंकोस्कोपी, सीटी-गाइडेड बायोप्सी, मेडिकल थोराकोस्कोपी, पीईटी-सीटी जैसी आधुनिक जांचें भी करा सकते हैं। आजकल विशेष मालिक्यूलर टेस्ट भी उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से मरीज के लिए सबसे उपयुक्त और प्रभावी दवा चुनी जा सकती है।

क्या कैंसर ठीक हो सकता है

  • यदि बीमारी का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए तो इसका सफल इलाज संभव है।
  • शुरुआती अवस्था में आपरेशन (सर्जरी) सबसे प्रभावी उपचार होता है और कई मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
  • आवश्यकता पड़ने पर कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी भी दी जाती है।
  • यदि कैंसर काफी आगे बढ़ चुका हो, तब भी पैलिएटिव केयर के माध्यम से सांस की तकलीफ, दर्द, खांसी, कमजोरी जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है और मरीज का जीवन अधिक आरामदायक बनाया जा सकता है।
  • इसके साथ पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन (व्यायाम, सांस लेने की तकनीक, सही पोषण और मानसिक सहयोग) भी मरीज की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कैसे करें बचाव

  • तंबाकू और धूमपान से पूरी तरह दूर रहें।
  • दूसरों के धूमपान के धुएं से भी बचें।
  • रसोई में स्वच्छ ईंधन का उपयोग करें और पर्याप्त वेंटिलेशन रखें।
  • प्रदूषण और हानिकारक रसायनों से बचाव के लिए सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें।
  • टीबी का पूरा इलाज कराएं।
  • लंबे समय से धूमपान करने वाले या जिनके परिवार में फेफड़ों के कैंसर का इतिहास हो, वे डॉक्टर की सलाह से लो-डोज सीटी स्क्रीनिंग करा सकते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी

तंबाकू का सेवन न करें, प्रदूषण से बचें, टीबी का पूरा इलाज कराएं और यदि लगातार खांसी, खून वाली खांसी, बिना कारण वजन कम होना या सांस फूलने जैसी समस्या हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। संकल्प लें, हम जागरूक बनेंगे, दूसरों को भी जागरूक करेंगे और समय पर जांच कराकर जीवन बचाने में अपना योगदान देंगे।