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क्या है 'सुपर-एजर्स' का सीक्रेट? स्टडी में सामने आया कैसे 80 की उम्र में भी जवान रह सकता है दिमाग

Published: Mon, 02 Mar 2026 11:08 AM (IST)

'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 'सुपर-एजर्स' 80 की उम्र में भी युवा जैसी मानसिक तेजी बनाए रखते हैं।

'सुपर-एजर्स' के दिमाग का अनोखा रहस्य (Image Source: Freepik)

'सुपर-एजर्स' के दिमाग का अनोखा रहस्य (Image Source: Freepik) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ-साथ याददाश्त का कमजोर होना एक आम बात मानी जाती है। हम अक्सर देखते हैं कि बुढ़ापे में लोग चीजें भूलने लगते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग 80 साल की उम्र में भी 50 साल के इंसान जैसी गजब की मानसिक तेजी कैसे बनाए रखते हैं? विज्ञान की दुनिया में ऐसे अद्भुत लोगों को 'सुपर-एजर्स' कहा जाता है।

हाल ही में मशहूर विज्ञान पत्रिका 'नेचर' में एक बेहद चौंकाने वाली रिसर्च पब्लिश हुई है। इस स्टडी ने यह साबित कर दिया है कि हमारा दिमाग बुढ़ापे में भी खुद को जवां और चुस्त बनाए रख सकता है।

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(Image Source: Freepik) 

'न्यूरोजेनेसिस' का कमाल

रिसर्च के अनुसार, इन 'सुपर-एजर्स' के दिमाग में नई कोशिकाओं (जिन्हें न्यूरॉन्स कहते हैं) के निर्माण की एक जादुई क्षमता होती है। विज्ञान की भाषा में नई मस्तिष्क कोशिकाएं बनने की इस प्रक्रिया को 'न्यूरोजेनेसिस' कहा जाता है। यही वह ताकत है जो इनके दिमाग को ढलती उम्र में भी थकने नहीं देती।

रिसर्च के हैरान करने वाले आंकड़े

वैज्ञानिकों ने जब इन सुपर-एजर्स के दिमाग का गहराई से अध्ययन किया, तो सामने आए नतीजे वाकई चौंकाने वाले थे:

दोगुने न्यूरॉन्स: एक सामान्य बुजुर्ग की तुलना में इन सुपर-एजर्स के दिमाग में दोगुने नए न्यूरॉन्स मौजूद थे।

ढाई गुना ज्यादा क्षमता: अल्जाइमर के मरीजों की तुलना में इनके पास ढाई गुना ज्यादा नए न्यूरॉन्स पाए गए।

युवाओं से भी आगे: वैज्ञानिकों ने 20 से 40 साल के युवाओं और बुजुर्गों की मस्तिष्क कोशिकाओं की आपस में तुलना की। इसमें यह बात सामने आई कि सुपर-एजर्स के दिमाग में सामान्य बुजुर्गों और युवाओं की तुलना में भी ज्यादा सक्रिय कोशिकाएं मौजूद थीं।

दिमाग के 'याददाश्त केंद्र' का कमाल

यह पूरी रिसर्च हमारे मस्तिष्क के मुख्य याददाश्त केंद्र पर की गई है, जिसे 'हिप्पोकैम्पस' कहते हैं। इस अध्ययन से जुड़ी विशेषज्ञ 'तामार गेफेन' के अनुसार, यह खोज इस बात का एक ठोस जैविक प्रमाण है कि बुढ़ापे में भी हमारा दिमाग पूरी तरह लचीला और सक्रिय बना रह सकता है।

भविष्य के लिए एक नई उम्मीद

यह शानदार रिसर्च सिर्फ एक रोचक जानकारी नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी उम्मीद है। वैज्ञानिकों का मानना है कि सुपर-एजर्स के दिमाग की यह कार्यप्रणाली आने वाले समय में अल्जाइमर जैसी खतरनाक दिमागी बीमारियों के इलाज के नए और कारगर रास्ते खोल सकती है।

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