विदेशी खाने में भारतीय तड़का ढूंढना छोड़ें, ऐसे समझें इटैलियन से मैक्सिकन कुजीन का असली स्वाद
भारतीय पर्यटक अब विदेशी व्यंजनों को आज़माने में रुचि रखते हैं, लेकिन उनके असली स्वाद को समझना महत्वपूर्ण है।

स्वाद की एक अलग जुबान (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
उमेश शर्मा, नई दिल्ली। आज भारतीय पर्यटक खाने के मामले में बेहद एक्सपेरिमेंटल हैं। वे जापानी, इटैलियन, मैक्सिकन, मेडिटेरेनियन और मिडिल ईस्टर्न खाना खुशी-खुशी ट्राई कर रहे हैं, लेकिन किसी इंटरनेशनल कुजीन को पसंद करना एक बात है और उसके बिल्कुल आथेंटिक स्वाद को अपनाना दूसरी बात। भारतीयों के लिए स्वादिष्ट भोजन का मतलब है- सूखे मसाले, अदरक-लहसुन, हरी मिर्च युक्त गाढ़ी मसालेदार ग्रेवी।
हमारी रसोई में खाना पकाते वक्त परत-दर-परत जायका घोला जाता है। बाकी दुनिया का अंदाज थोड़ा अलग है। इटैलियन भोजन में आलिव आयल, छोटे टमाटर, बेसिल और चीज के असली फ्लेवर को ही स्टार बनाया जाता है। तो वहीं मेडिटेरेनियन और मिडिल ईस्टर्न कुजीन में तिल के पेस्ट (ताहीनी), नींबू, ताजी हर्ब्स, ग्रिल की हुई सब्जियों और मीट का दबदबा होता है। मैक्सिकन कुजीन हमारे लिए थोड़ी जानी-पहचानी लग सकती है, क्योंकि इसमें मिर्च, धनिया, टमाटर, नींबू का इस्तेमाल होता है, हालांकि उनके पकाने का तरीका हमसे अलग है।
स्वाद की एक अलग जुबान
किसी भी विदेशी आथेंटिक कुजीन को समझाने का एक मौका दें कि वह आपको क्या महसूस कराना चाहती है। इसके लिए जान-पहचान वाले रास्तों से शुरुआत करें। आपको सीधे दाल मखनी से साशिमी पर जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पास्ता, पिज्जा, लहसुन और टमाटर का कांबीनेशन युक्त इटैलियन खाना हम भारतीयों के लिए सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प है।
इसी तरह मिडिल ईस्टर्न कुजीन में हमस, फलाफेल, ग्रिल्ड सब्जियां और चावल से शुरुआत कर सकते हैं। मैक्सिकन खाना चाहते हैं तो बीन्स, कार्न, टमाटर, मिर्च जैसे स्वाद आपको घर जैसा एहसास देंगे। एक बार जब आप इन जायकों के साथ सहज हो जाएं, तो धीरे-धीरे हल्के मसालों, कच्चे सलाद या नई टेक्सचर वाली डिशेज ट्राई करें।
पूछने में झिझक कैसी
विदेशी रेस्त्रां के मेन्यू कार्ड भले ही सुनने में बहुत फैंसी लगें, लेकिन प्लेट में क्या आने वाला है, यह कई बार स्पष्ट नहीं होता। इसलिए बेझिझक वेटर से पूछें कि क्या यह डिश स्पाइसी है या माइल्ड? क्या यह कच्ची परोसी जाएगी, ग्रिल की गई है या फ्राइड है? यह गर्म है या ठंडी? एक अच्छा रेस्त्रां हमेशा आपको सही डिश चुनने में मदद करेगा। और हां, अगर आपको खाना थोड़ा और तीखा चाहिए, तो शेफ से थोड़ा तीखा बनाने या साइड-आन में चिली फ्लेक्स, स्पाइसी सास की मांग कर सकते हैं।
भूखे नहीं रहते शाकाहारी
भारतीय शाकाहारियों के लिए विदेश में खाना थोड़ा पेचीदा हो सकता है। अब शाकाहारी हैं तो सिर्फ 'इज दिस वेज?' पूछना काफी नहीं। क्योंकि विदेश में शाकाहार के नियम अलग होते हैं। कई बार सब्जियों के सूप में चिकन स्टाक हो सकता है। चावल को ब्रोथ में पकाया गया होता है। सब्जियां उसी तेल में तली हो सकती हैं, जिसमें सी-फूड तला गया हो। सास में फिश सास या आयस्टर सास की मिलावट हो सकती है। इसलिए सीधे और स्पष्ट सवाल पूछें: 'क्या इसमें मांस, मछली या एनिमल स्टाक मिला है? क्या इसे उसी तेल या ग्रिल पर पकाया गया है, जहां मांसाहार बनता है?
क्या आप इसे साफ बर्तन में बना सकते हैं?' आपकी स्पष्ट बातचीत आपके और रेस्त्रां-दोनों के लिए चीजें आसान बना देगी। इसके अलावा अगर आप पैकेटबंद खाना ले रहे हैं तो उसमें छिपे हुए इंग्रीडिएंट्स पर नजर जरूर डालें। उसमें ब्रोथ/स्टाक, लार्ड, जिलेटिन, फिश सास/ आयस्टर सास/ एन्कोवीस, रेनेट जैसे शब्द मांसाहार की ओर इंगित करते हैं। अगर आप सख्त शाकाहारी हैं, तो मिडिल ईस्टर्न (हमस, फलाफेल, तबूले), इटैलियन (टोमैटो पास्ता, वेज पिज्जा) या मैक्सिकन (बीन्स, राइस, गुआकामोल) रेस्त्रां का रुख करें।
छोड़ें तुलना करने की प्रवृत्ति
अगर आप विदेश में हर निवाले की तुलना भारतीय खाने से करेंगे, तो जाहिर है आपको हर डिश में मिर्च-मसाले कम ही लगेंगे। इसकी जगह खुद से पूछिए कि 'यह डिश मुझे किस स्वाद का एहसास कराना चाहती है?' जब आप यह सोचेंगे, तो आपको भुने हुए टमाटर की मिठास, बेसिल लीव्स की भीनी खुशबू, आलिव आयल का फ्रूटी एहसास, नींबू की ताजा खटास और ग्रिल्ड सब्जियों का स्मोकी फ्लेवर समझ आने लगेगा। हर विदेशी डिश में अपने घर का स्वाद मत ढूंढिए। खाने को उस जगह, वहां के लोगों और उनकी संस्कृति की कहानी कहने दीजिए!
(एक्जक्यूटिव शेफ उमेश शर्मा, औरा सूइट्स होटल, दर-ए-सलाम, तंजानिया)
