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मीठी नहीं, नमकीन है राजस्थान की ये खास 'कुटेड़ी राबड़ी', जानिए इस खास डिश को बनाने का पारंपरिक तरीका

Published: Fri, 16 Jan 2026 04:47 PM (IST)

राजस्थान की 'कुटेड़ी राबड़ी' एक नमकीन, हल्की खट्टी और पौष्टिक डिश है, जो दूध से बनी मीठी रबड़ी से काफी ...और पढ़ें

कैसे बनती है राजस्थान की कुटेड़ी राबड़ी? (AI Generated Image)

कैसे बनती है राजस्थान की कुटेड़ी राबड़ी? (AI Generated Image)

HighLights

  1. कुटेड़ी राबड़ी राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है

  2. इसे रेगिस्तानी इलाकों में ज्यादा खाया जाता है

  3. यह स्वाद में नमकीन होती है

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान सिर्फ अपने किलों और गौरवशाली इतिहास के लिए नहीं जाना जाता। यहां का खान-पान भी राजस्थान को एक अलग पहचान दिलाता है। ऐसे में अगर राजस्थानी थाली की बात हो और 'राबड़ी' का जिक्र न आए, ऐसा मुमकिन नहीं। 

लेकिन यहां हम उस मीठी रबड़ी की बात नहीं कर रहे जो दूध से बनती है, बल्कि बात हो रही है 'कुटेड़ी राबड़ी' की। यह एक नमकीन, हल्की खट्टी और बेहद पौष्टिक डिश है, जो सदियों से राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में खूब चाव से खाई जाती रही है। हालांकि, इस व्यंजन की शुरुआत स्वाद से जरूरत को ध्यान में रखकर की गई थी। आइए जानें कैसे हुई कुटेड़ी राबड़ी की उतपत्ति और इसकी रेसिपी। 

मरुस्थल की जरूरत से बनी कुटेड़ी राबड़ी

कुटेड़ी राबड़ी का जन्म किसी शाही रसोई में नहीं, बल्कि राजस्थान की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीण जीवन की जरूरतों से हुआ है।

  • संसाधनों का प्रबंधन- प्राचीन समय में मरुस्थलीय क्षेत्रों में पानी की कमी थी, लेकिन पशुपालन जीवन का आधार था। ऐसे में भरपूर मात्रा में उपलब्ध छाछ या मट्ठे का सही इस्तेमाल करने के लिए इस राबड़ी बनाई गई।
  • एनर्जी का सोर्स- खेत में काम करने वाले किसानों और मीलों दूर तक मवेशी चराने वाले चरवाहों, खासकर रैबारी, गुर्जर, अहीर और राजपूत समाज, को ऐसे खाने की तलाश थी जो कम सामग्री में बने, शरीर को ठंडा रखे और लंबे समय तक भूख न लगने दे।
  • लंबे समय तक पेट भरना- कुटेड़ी शब्द का मतलब है, जौ या गेहूं को ओखली में मोटा कूटकर तैयार किया गया दलिया। अनाज को इस तरह कूटकर इस्तेमाल करने से यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ रखता है।

कैसे बनाई जाती है कुटेड़ी राबड़ी?

कुटेड़ी राबड़ी को धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है, ताकि छाछ और अनाज एक-दूसरे में पूरी तरह समा जाएं। इसलिए इसे बनाने के लिए धैर्य चाहिए होता है। यह आजकल की टू-मिनट रेसिपी जैसी नहीं है। 

सामग्री-

  • छाछ या मट्ठा
  • कुटेड़ी- दरदरा कूटा हुआ जौ या गेहूं
  • मसाले- नमक, जीरा, हींग और हल्दी
  • बारीक कटा प्याज और लहसुन स्वाद बढ़ाने के लिए (ऑप्शनल)

बनाने की विधि-

  • सबसे पहले एक मिट्टी के बर्तन या भारी तले की कड़ाही में मट्ठे को धीमी आंच पर गर्म किया जाता है।
  • जब मट्ठा हल्का गर्म हो जाए, तब इसमें धीरे-धीरे कुटेड़ी (कुटा हुआ अनाज) डाला जाता है और इसे लगातार चलाया जाता है, ताकि मिश्रण में गांठें न बनें।
  • अब इसमें स्वादानुसार नमक, चुटकी भर हल्दी, हींग और भुना हुआ जीरा मिलाया जाता है। लहसुन का पेस्ट डालने से इसका जायका और बढ़ जाता है।
  • इस मिश्रण को तब तक पकाया जाता है जब तक कि अनाज पूरी तरह गल न जाए और राबड़ी गाढ़ी न हो जाए।
 

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