सिर्फ एक मिठाई नहीं, बिहार की सांस्कृति की पहचान है 'खाजा'! बहुत दिलचस्प है इस डिश की कहानी
खाजा बिहार की एक प्रसिद्ध परतदार मिठाई है, जिसे जीआई टैग भी मिला है और यह राज्य की संस्कृति का अहम हिस्सा है।

क्या है खाजा का इतिहास? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। खाजा बिहार की सबसे स्वादिष्ट मिठाइयों में से एक है, जो अपनी क्रंची और परतदार बनावट के लिए जाना जाता है। ये सिर्फ एक मिठाई नहीं है, बल्कि बिहार की संस्कृति का हिस्सा भी है। इसलिए इसे जीआई टैग भी मिला हुआ है।
बिहार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस मिठाई की खूब मांग है और इसे बड़े चाव के साथ खाया जाता है। मैदा और चीनी से बनी ये मिठाई कई सौ साल पुरानी मानी जाती है। आइए जानें कि खाजा का इतिहास क्या है।
खाजा का इतिहास
खाजा का इतिहास हजारों साल पुराना है। माना जाता है कि इसे बनाने की शुरुआत प्राचीन मगध साम्राज्य से हुई थी। नालंदा और राजगीर के आस-पास के क्षेत्रों को खाजा के जन्म से जोड़कर देखा जाता है। सिलाव खाजा से जुड़ी कहानी है कि गौतम बुद्ध एक बार उस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तो वहां के लोगों ने उन्हें खाने के लिए खाजा दिया था।
समय के साथ मगध का विस्तार हुआ और वहां की ये मशहूर मिठाई देश के दूसरे हिस्सों, जैसे ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक पहुंची। इस तरह खाजा बनाने की शुरुआत हुई और ये बिहार के बाहर देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचा।
कुछ लोग ये भी मानते हैं कि खाजा का इतिहास ओडिशा के मंदिरों से भी जुड़ा है। पुराने समय में मंदिरों की रसोई में इस मिठाई का जन्म हुआ था, जिसे भगवान जगन्नाथ को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता था। इसलिए ओडिशा में भी इस मिठाई की खास जगह है।
कैसे बनाया जाता है खाजा?
खाजा बनाने के लिए मैदा और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। मैदे को पतली-पतली रोटियों जैसे बेल लिया जाता है। इन परतों पर घी या मैदे को घोल लगाते हुए एक के ऊपर एक रखा जाता है और कुछ छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है।
इन टुकड़ों को धीमी आंच पर घी में तला जाता है और फिर चाशनी में डुबोया जाता है। इस तरह खाजा को मिलता है उसका कुरकुरा और परतदार रूप, जो खाने में लाजवाब होता है।
खाजा की खासियत क्या है?
खाजा को उसकी परतें और कुरकुरापन ही खास बनाता है। इसकी एक-एक परत पर चाशनी का स्वाद आता है और हर बाइट में क्रंच और मिठास अनुभव होता है। दूध और मावा से बनी मिठाइयों की तुलना में खाजा कई दिनों तक बिना खराब हुए चलता है। अगर इसे डिब्बे में रखा जाए, तो कई दिनों तक इसका क्रंच भी बरकरार रहता है।
ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में खाजा को छप्पन भोग में जरूर शामिल किया जाता है। बिहार में शादी-ब्याह के मौके पर खाजा बांटने की परंपरा है। ये सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि बिहार और ओडिशा की संस्कृति का हिस्सा है।
