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क्या आप जानते हैं कैसे पड़ा 'ठेकुआ' का नाम? दिलचस्प है बिहार की पहचान बन चुके इस महाप्रसाद का इतिहास

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:22 AM (IST)

ठेकुआ, बिहार की पहचान और छठ महापर्व का महत्वपूर्ण प्रसाद है। इसके इतिहास से जुड़ी कई मान्यताएं हैं।

क्या है ठेकुआ का इतिहास? (AI Generated Image)

क्या है ठेकुआ का इतिहास? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो एक जगह की पहचान बन जाती हैं, जैसे- ठेकुआ की बिहार की पहचान है। बिहार में ठेकुआ सिर्फ एक पकवान नहीं है, बल्कि वहां की आस्था और परंपरा का भी प्रतीक है। ये छठ महापर्व का प्रसाद है और इसलिए बिहार की संस्कृति का हिस्सा भी। 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठेकुआ का इतिहास क्या है? इसे बनाने की शुरुआत कैसे हुई और कैसे इसे ये नाम मिला? आइए जानें ठेकुआ की कहानी। 

ठेकुआ नाम कैसे मिला? 

माना जाता है कि ठेकुआ ठोकना या दबाना शब्द से निकला है। दरअसल, ठेकुआ बनाने के लिए आटे की लोई को लकड़ी के नक्काशीदार सांचे पर रखकर हाथ की हथेलियों से जोर से ठोका या दबाया जाता है। इससे ठेकुआ पर सुंदर आकृतियां बनती हैं और इसी प्रक्रिया के कारण इसका नाम ठेकुआ पड़ा। 

ठेकुआ बनाने की शुरुआत कैसे हुई? 

ठेकुआ बनाने की शुरुआत कैसे हुई इसका सटीक जवाब किसी को नहीं पता, लेकिन माना जाता है कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। इससे जुड़ी कई कहानियां भी हैं। एक मान्यता ऋगवेद से जुड़ी है कि इसमें अपूप नाम के एक पकवान का वर्णन मिलता है, जिसे आटे में गुड़ मिलाकर घी में पकाया जाता था। ठेकुआ भी लगभग इसी तरह बनता है और इसी पकवान से ठेकुआ निकला है।  

एक मान्यता है कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है। इसलिए जब गेहूं और गन्ने की नई फसल घर आती थी, तब सूर्य देव को शुक्रिया कहने के लिए गेहूं और गुड़ को मिलाकर ठेकुआ बनाया जाने लगा और तभी से इसे बनाने की शुरुआत हुई।

ठेकुआ के इतिहास से जुड़ी एक मान्यता ये भी है कि पुराने समय में फ्रिज नहीं हुआ करते थे। इसलिए लंबी यात्राओं पर जाने के लिए लोग अपने साथ कुछ ऐसा रखते थे, जो कई दिनों तक बिना खराब हुए उनका पेट भर सके। इसी से ठेकुआ बनाने की शुरुआत हुई, क्योंकि ठेकुआ बिना फ्रिज के भी कई दिनों तक खराब नहीं होता और शरीर को एनर्जी भी देता है।  

छठ पूजा में ठेकुआ का महत्व

छठ पूजा का प्रसाद ठेकुआ के बिना अधूरा है। इस महापर्व में सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए ठेकुआ बनाया जाता है। मौसमी फलों के साथ अर्घ्य में ठेकुआ भी शामिल होता है, जिसे प्रसाद में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। छठ पूजा के लिए ठेकुआ बनाने के लिए शुद्धता का खास ध्यान रखा जाता है। पारंपरिक रूप से इसे मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है, लेकिन आज के आधुनिक दौर में कई लोग गैस चूल्हे पर भी ठेकुआ बनाते हैं। 

ठेकुआ रेसिपी

कुल समय : 45 mins
तैयारी का समय : 15 mins
पकाने का समय :30 mins
कोर्स : Desserts
कैलोरी :
सर्विंग : 2 लोगों के लिए
व्यंजन : Indian

ठेकुआ बनाने के लिए सामग्री:

  • गेहूं का आटा- 2 कप
  • गुड़- 1 कप
  • देसी घी- 4-5 बड़े चम्मच
  • कद्दूकस किया नारियल- 2 बड़े चम्मच
  • सौंफ- 1 छोटा चम्मच
  • छोटी इलायची पाउडर- 1/2 छोटा चम्मच
  • पानी- 1/2 कप
  • तलने के लिए- शुद्ध देसी घी या रिफाइंड तेल

ठेकुआ बनाने की विधि:

1

सबसे पहले एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा छान लें और इसमें इलायची पाउडर, दरदरी सौंफ और कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल डालकर अच्छी तरह मिला लें।

2

इसके बाद इसमें 4-5 बड़े चम्मच देसी घी डालें और आटे में दोनों हाथों से मसल-मसलकर अच्छी तरह मिलाएं।

3

अब एक बर्तन में आधा कप पानी और कद्दूकस किया हुआ गुड़ डालकर हल्की आंच पर रखें, ताकि गुड़ पानी में घुल जाए।

4

अब इस गुड़ के पानी को थोड़ा-थोड़ा करके आटे में डालें और मिलाएं।

5

अब गूंथे हुए आटे से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें और लकड़ी वाले सांचे पर थोड़ा सा घी लगाएं और उस पर लोई रखें और हाथ की हथेली से जोर से दबाएं।

6

सांचे से बाहर निकालने पर उस पर सुंदर डिजाइन बन जाएगा।

7

इसके बाद एक कढ़ाई में तलने के लिए घी या तेल गर्म करें। जब तेल मध्यम गर्म हो जाए, तो इसमें तैयार ठेकुआ धीरे-धीरे डालें। गैस की आंच धीमी से मध्यम रखें।

8

दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक इसे धीमी आंच पर पलट-पलटकर तलें। इसके बाद इसे एक थाली में निकाल लें। ठेकुआ बनकर तैयार है।