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शाही दस्तरखान से गली-मोहल्लों तक कैसे पहुंची कुल्फी? सदियों पुरानी है इस मलाईदार मिठाई की कहानी

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:25 AM (IST)

हम कुल्फी तो बड़े चाव से खाते हैं, पर इसके बनने का दिलचस्प इतिहास नहीं जानते।

कुल्फी से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी (Image Source: AI Generated)

कुल्फी से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी ने गर्मियों के मौसम में मटके वाली मलाईदार कुल्फी का स्वाद तो जरूर चखा होगा, पर क्या आप जानते हैं कि आखिर एक शाही कुल्फी गली-मोहल्लों तक कैसे पहुंच गई? कैसे शाही दस्तरखान की शान रह चुकी कुल्फी देखते ही देखते सभी का फेवरेट स्ट्रीट फूड बन गई? आइए आपको कुल्फी का दिलचस्प इतिहास बताते हैं। 

कुल्फी के नाम का इतिहास 

कुल्फी के नाम पर जाएं तो इस शब्द का संबंध फारसी भाषा से जुड़ा हुआ है। आपको शायद पता न हो कि कुल्फी का मतलब कोई ठंडी चीज नहीं होता, इसका मतलब होता है ढका हुआ प्याला या फिर बंद कप। दरअसल, पहले के समय में जब कुल्फी बनती थी, तब इसे मेटल के कोन में ढककर बर्फ में जमाया जाता था। इसके बाद से ही फारसी में इसे कुल्फी नाम मिला। 

कुल्फी से जुड़ी ऐतिहासिक कहानी 

एक समय था जब चीन में चावल और दूध से ठंडा डेजर्ट बनाया जा रहा था, तो वहीं ईरान में 600 ईसा पूर्व बर्फ और फलों का रस मिलाकर पहली आइसक्रीम तैयार हुई। कहते हैं कि इसके बाद ईरान में दूध के मिश्रण से बनी कुल्फी का जन्म हुआ, उस समय कंडेंस्ड मिल्क, शक्कर और केसर को मिलाकर इसे बनाते थे। इन्हीं सबकी देखा-देखी भारत की देसी आइसक्रीम कुल्फी ने अपनी जगह बनाई, पर इसका अंदाज कुछ अलग था। 

आइन-ए-अकबरी में भी जिक्र 

बताते चलें कि भारत में कुल्फी की शुरुआत मुगल काल में 16वीं सदी से मानी जाती है। इसका जिक्र अकबर के नवरत्नों में शामिल अबुल फजल ने आइन-ए-अकबरी में भी किया है। उन्होंने लिखा कि कुल्फी को बनाने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट का उपयोग हुआ था, इसकी मदद से पानी को ठंडा कर बर्फ जमाई जाती थी। 

फिर मोटे दूध, मेवे और केसर के मिश्रण को मेटल के कोन में डालकर बर्फ में स्टोर कर कुल्फी तैयार होती थी। इस तरह मुगल बादशाह अकबर के दौर में कुल्फी शाही दस्तरखाने तक पहुंची। 

मुगल काल में बर्फ कैसे आई? 

अब सवाल यह उठता है कि उस जमाने में फ्रिज ही नहीं हुआ करते थे, फिर कुल्फी बर्फ से कैसे जमाई जाती थी? तो बता दें कि कुछ हिस्सों में ग्लेशियर थे और कई जगहों पर बर्फबारी होती थी, इसलिए मुगलों की जानकारी में बर्फ पहले से थी। कहते हैं मुगलों ने हिमालय से लाहौर और दिल्ली जैसे शहरों तक बर्फ लाने के लिए पैदल सेना, घोड़े, बैलगाड़ियां और नाव लगा रखी थीं।