नए प्रोडक्ट का साइड इफेक्ट है या क्लियर स्किन की शुरुआत? डर्मेटोलॉजिस्ट ने समझाया Skin Purging का साइंस
किसी भी नए स्किनकेयर प्रोडक्ट से हम हमेशा ग्लोइंग और हेल्दी स्किन की उम्मीद रखते हैं, लेकिन इसके बजाय कभी-कभी हमें छोटे-छोटे दाने, मुंहासे और ड्राई स्किन से जूझना पड़ता है। ऐसे में, पहला ख्याल आता है- "कहीं यह साइड इफेक्ट तो नहीं?" बता दें, डर्मेटोलॉजिस्ट इस स्थिति को 'स्किन पर्जिंग' कहते हैं। आइए, समझते हैं कि यह क्या है और क्यों होता है।

क्यों नई स्किनकेयर शुरू करते ही त्वचा पहले खराब दिखने लगती है? (Image Source: AI-Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नया स्किनकेयर शुरू करने पर अगर चेहरे पर दाने, छोटे-छोटे बंप्स या व्हाइटहेड्स उभरने लगें, तो ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं। लगता है कि प्रोडक्ट सूट नहीं कर रहा या उससे नुकसान हो रहा है, लेकिन सच यह है कि कई बार यह समस्या नहीं बल्कि एक सामान्य प्रक्रिया होती है- जिसे कहा जाता है स्किन पर्जिंग (Skin Purging)।
एनआईआईएमएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा में डिपार्टमेंट ऑफ डर्मेटोलॉजी की डॉ. शेफाली महलावत का कहना है कि यह आपकी त्वचा के बेहतर होने का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। आइए, विस्तार से समझते हैं इसके बारे में।

क्या होती है स्किन पर्जिंग?
डॉ. शेफाली के मुताबिक, स्किन पर्जिंग वह स्थिति है जब नई स्किनकेयर, खासकर एक्टिव इंग्रीडिएंट्स, त्वचा में सेल टर्नओवर को तेज कर देते हैं। यानी डेड स्किन और जमे हुए कंजेशन तेजी से बाहर आने लगते हैं। इस वजह से पहले से मौजूद बंद पोर्स सतह पर दिखने लगते हैं और चेहरे पर छोटे दाने, बंप्स या हल्के ब्रेकआउट दिखाई दे सकते हैं। यह आमतौर पर उन हिस्सों पर होता है जहां आपको पहले भी पिंपल आते रहते हैं।
क्यों होती है स्किन पर्जिंग?
यह समस्या आमतौर पर उन इंग्रीडिएंट्स से होती है जो त्वचा को तेजी से रिपेयर करते हैं, जैसे-
- रेटिनॉइड्स
- AHA (अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड)
- BHA (बीटा हाइड्रॉक्सी एसिड)
- विटामिन C
- नायसिनामाइड
- केमिकल एक्सफोलिएंट्स
ये सभी त्वचा की निचली परतों में मौजूद कंजेशन को ऊपर लाते हैं। इसलिए शुरुआत में त्वचा खराब लग सकती है, लेकिन यह एक अस्थायी चरण होता है।
स्किन पर्जिंग कितने समय तक रहती है?
आमतौर पर यह प्रक्रिया 4 से 6 हफ्तों तक चलती है।
यही वह समय है जब त्वचा नए एक्टिव से खुद को एडजस्ट करती है।
अगर इससे ज्यादा समय हो जाए या रिएक्शन बढ़ने लगे, तो यह पर्जिंग नहीं बल्कि इरीटेशन, सेंसिटिविटी या एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है।

क्या स्किन पर्जिंग अच्छी चीज है?
हां, कई मामलों में यह संकेत होता है कि स्किनकेयर त्वचा की गहराई में काम कर रहा है। पर्जिंग खत्म होने के बाद आमतौर पर ये सुधार महसूस होते हैं-
- पोर्स साफ दिखना
- स्किन का टेक्सचर स्मूद होना
- कॉम्प्लेक्शन में निखार आना
- ध्यान रहे- पर्जिंग हल्की और मैनेजेबल होनी चाहिए, दर्दनाक या सूजन वाली नहीं।
पर्जिंग और नॉर्मल ब्रेकआउट में कैसे समझें फर्क?
जगह
- पर्जिंग हमेशा उन्हीं जगहों पर होती है जहां पहले से पिंपल आते रहे हों।
- नए, अनजान हिस्सों पर दाने उभरें तो वह पर्जिंग नहीं है।
समय
- नई एक्टिव स्किनकेयर शुरू करते ही शुरू होती है।
- 4–6 सप्ताह में सुधार आने लगता है।
लुक
- छोटे, समान आकार के बंप्स या व्हाइटहेड्स होते हैं।
- बड़े, दर्दनाक सिस्ट दिखाई दें तो वह सामान्य ब्रेकआउट है।
प्रोडक्ट का टाइप
- केवल सेल टर्नओवर बढ़ाने वाले प्रोडक्ट ही पर्जिंग करते हैं।
- बाकी प्रोडक्ट से होने वाले दाने आमतौर पर ब्रेकआउट या रिएक्शन होते हैं।
स्किन पर्जिंग में क्या करें?
- एक्टिव का इस्तेमाल जारी रखें, जब तक कि जलन बहुत ज्यादा न हो।
- हर रोज लगाने की बजाय हफ्ते में 2–3 बार लगाएं।
- स्किन बैरियर को मजबूत करने के लिए साधारण, नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर लगाएं।
- फ्रेगरेंस-फ्री और हल्के क्लींजर का इस्तेमाल करें।
- स्क्रब से बचें, यह इरीटेशन बढ़ा सकता है।
- रोजाना सनस्क्रीन लगाएं क्योंकि इस दौरान स्किन ज्यादा सेंसिटिव रहती है।
- नए एक्टिव्स को हमेशा धीरे-धीरे शुरू करें- लो एंड स्लो।
अगर दाने बहुत लाल, दर्दनाक हो जाएं या 6 हफ्तों से ऊपर बने रहें, तो डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है। यह इरीटेशन या गलत प्रोडक्ट की निशानी हो सकता है।

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