इलाज आंखों का हो रहा था, कम होने लगीं झुर्रियां… क्या आप जानते हैं हमेशा से ब्यूटी ट्रीटमेंट नहीं था Botox?
आज के समय में चेहरे की झुर्रियां हटाने और जवां दिखने के लिए Botox का इस्तेमाल बेहद आम हो गया है।

झुर्रियां मिटाने वाला बोटोक्स कभी ब्यूटी ट्रीटमेंट था ही नहीं (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में बिना सर्जरी के जवां दिखने और चेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए बोटोक्स का नाम सबसे पहले लिया जाता है। हालांकि, क्या आपको पता है कि इसका आविष्कार किसी ब्यूटी लैब में नहीं हुआ था?
जी हां, इसका कॉस्मेटिक दुनिया में आना महज एक शानदार इत्तेफाक था, जो आंखों के इलाज के दौरान हुआ। आइए आपको बोटोक्स के इस बेहद दिलचस्प सफर के बारे में बताते हैं।
शुरुआत में सिर्फ एक मेडिकल ट्रीटमेंट था बोटोक्स
आज जिसे हम ब्यूटी ट्रीटमेंट का हिस्सा मानते हैं, वो Botulinum toxin type A शुरुआत में सिर्फ गंभीर बीमारियों की दवा हुआ करता था। 1980 के दशक में, एलन स्कॉट नाम के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ ने सबसे पहले इसका इस्तेमाल 'स्ट्रैबिस्मस' ठीक करने के लिए शुरू किया था। 1980 के दशक के मध्य तक हजारों मरीजों पर बड़े परीक्षण हुए और यह साफ हो गया कि यह आंखों की मांसपेशियों की बीमारी के लिए एक बेहतरीन इलाज है। इस दौर तक इसका रूप पूरी तरह से सिर्फ मेडिकल था।
एक तीर से दो शिकार वाली खोज
कहानी में असली मोड़ साल 1987 में आया। उस समय डॉक्टर जीन और एलिस्टेयर कैरदर्स अपने मरीजों में 'ब्लेफेरोस्पाज्म' का इलाज कर रहे थे। इलाज के दौरान उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाली बात नोटिस की। उन्होंने देखा कि जिन मरीजों को इंजेक्शन लगाया गया था, उनकी दोनों भौहों के बीच की गहरी लकीरें अचानक हल्की होने लगी थीं। साथ ही, आंखों के आस-पास की त्वचा भी काफी अच्छी दिखने लगी थी। यह डॉक्टरों के लिए एक अद्भुत नतीजा था, जो लगभग हर मरीज में देखा जा रहा था।
चेहरे की बनावट और झुर्रियां गायब होने का विज्ञान
आखिर आंखों के पास इंजेक्शन देने से चेहरे की झुर्रियां कैसे मिट गईं? इसका जवाब हमारे चेहरे की बनावट में छिपा है। दरअसल, हमारी भौहों के बीच पड़ने वाली सिलवटें मुख्य रूप से दो मांसपेशियों- 'कॉरुगेटर सुपरसिली' और 'प्रोसेरस' के बार-बार सिकुड़ने से बनती हैं। जब इलाज के दौरान बोटोक्स ने इन मांसपेशियों को रिलैक्स कर दिया, तो उनके ऊपर की त्वचा अपने आप स्मूथ हो गई।
दवा से कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनने तक का सफर
इस अनोखे इत्तेफाक के बाद, 1988 में पहली बार बोटोक्स के ब्यूटी बेनिफिट्स पर रिसर्च रिपोर्ट सामने आई। कैरदर्स दंपत्ति को इसकी क्लिनिकल रिसर्च शुरू करने वाले शुरुआती लोगों में गिना जाता है। हालांकि, इसे कॉस्मेटिक दुनिया में आधिकारिक तौर पर आने में काफी समय लगा। 1989 में बोटोक्स को सिर्फ आंखों की बीमारियों के लिए मंजूरी मिली थी। कई सालों की लंबी और पक्की रिसर्च के बाद, साल 2002 में जाकर इसे चेहरे की झुर्रियों के इस्तेमाल के लिए आधिकारिक कॉस्मेटिक अप्रूवल मिला।
1987 की वह घटना इसलिए मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि यह नतीजा क्लिनिक में हर मरीज के साथ दोहराया जा रहा था। डॉक्टरों ने तुरंत यह समझ लिया था कि जिस जगह इंजेक्शन लग रहा है, उसी के आस-पास की झुर्रियां गायब हो रही हैं।
